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मां की प्रेरणा और लगन से मायावती ने राजनीति में लहराया परचम

Mon, 15 Nov 2021 12:48 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 15 Nov 2021 12:48 AM IST
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With the inspiration and dedication of her mother, Mayawati raised her mark in politics
गांव बादलपुर स्थित पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के परिवार की कोठी। - फोटो : Grnoida
ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा सुप्रीमो मायावती की माता रामरती के निधन से न केवल बादलपुर बल्कि जिले भर में शोक है। बड़ी संख्या में लोग सोशल मीडिया आदि के माध्यम से श्रद्धांजलि देकर दुख प्रकट कर रहे हैं। बादलपुर के ग्रामीणों का कहना है कि मां की प्रेरणा और लगन के कारण ही बेटी ने राजनीति में परचम लहराया। मायावती ने भी ट्विटर हैंडल पर यही बात कही है। पिता प्रभुदयाल दिल्ली दूर संचार विभाग में नौकरी करते थे। शुरुआत में उन्हें आने-जाने और ड्यूटी पूरी करने में काफी समय लगता था। उन्हें घर से बाहर ही रहना पड़ता था। इस दौरान मां रामरती ही मायावती व अन्य बच्चों की देखभाल करती थीं। हालांकि, बाद में पूरा परिवार दिल्ली में ही रहने लगा।
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पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के पैतृक गांव बादलपुर में उनकी माता की मृत्यु का समाचार मिलने पर लोग संवेदना व्यक्त करने के लिए कोठी पर पहुंचे, लेकिन वहां से दिल्ली भेज दिया गया। दिल्ली में ही अंतिम संस्कार और शोक संवेदना व्यक्त करने लोग पहुंच रहे हैं। मायावती के पिता प्रभुदयाल का गांव के जगदीश नंबरदार के यहां पर काफी आना जाना था। जब उन्होंने गांव छोड़ा था, उस दौरान भी उनके परिवार से काफी नजदीकी थी। जगदीश नंबरदार का कहना है कि जब मायावती बाल अवस्था में थीं, उस समय उनके पिता प्रभुदयाल बादलपुर से आठ मील साइकिल चलाकर गाजियाबाद रेलवे स्टेशन तक जाते थे।
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इसके बाद स्टेशन के पास साइकिल खड़ी कर ट्रेन से ड्यूटी करने दिल्ली जाते थे। इसमें काफी समय लगता था। इस कारण उन्होंने परिवार समेत दिल्ली रहने की योजना बनाई थी। दिल्ली जाने के बाद प्रभुदयाल रविवार को गांव में मकान को देखने आते थे। इस दौरान वह जगदीश नंबरदार से भी मिलते थे। मायावती के मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उनका गांव से जुड़ाव था। गांव आकर लोगों की समस्याओं को अधिकारियों से दूर कराते थे। उन्होंने बताया कि एक बार गांव के कुछ लोग उनके साथ समस्या लेकर दिल्ली में गए थे। दिल्ली स्थित आवास पर जगदीश नंबरदार को पूर्व मुख्यमंत्री की माता रामरती मिली थीं। उन्होंने उनकी समस्या का समाधान कराया था। 19 नवंबर 2020 को प्रभुदयाल का निधन हो गया था। उनके जाने के बाद परिवार से संपर्क टूट गया।
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शोक व्यक्त करने गांव से दिल्ली पहुंचे लोग
पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की माता रामरती का हृदय गति रुकने से निधन होने की सूचना मिली थी। इसके बाद ही ग्रामीण उनकी कोठी पर पहुंचे थे, लेकिन उनको दिल्ली भेज दिया गया। ग्रामीणों ने बताया कि श्रद्धांजलि देने के लिए गांव में कई स्थानों पर बैठक कर दो मिनट का मौन रखा गया। ग्रामीणों ने बताया कि रामरती ने बच्चों की अच्छी परवरिश के लिए बड़ी मेहनत की। उनकी परवरिश के कारण ही मायावती उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बनीं।
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