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Noida News: महिला बिरादरी को लेकर खलनायक की छवि गढ़ने वाले अब शांत क्यों हैं
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-सिरसा गांव में शनिवार को महिला को जिंदा जलाने की घटना से महिलाओं में गुस्सा
-कहा, मामले की फर्स्ट ट्रैक कोर्ट में हो सुनवाई, दोषियों को फांसी की मिले सजा
अंकुर त्रिपाठी
ग्रेटर नोएडा। सिरसा गांव में शनिवार को महिला को जिंदा जलाने की घटना को लेकर महिलाओं में गुस्सा है। उनका कहना है कि मेरठ और इंदौर में पति की हत्या करने के बाद महिलाओं को खलनायक बना दिया गया था, लेकिन अब लोग शांत क्यों है। मामले की फास्टट्रैक कोर्ट में सुनवाई की जाए और दोषियों को फांसी की सजा मिले। उनका कहना है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम व महिला आरक्षण विधेयक संसद में भले ही पास हो गया हो,लेकिन महिलाओं के साथ अन्याय बढ़ते जा रहे हैं। महिलाओं को बराबरी के दावे केवल कागजों में ही सीमित हैं। आज भी महिलाएं दहेज, घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है। बस समाज के लिए ये बातें इतनी सामान्य हो गई है कि बहुत ज्यादा विचलित नहीं करती हैं।
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महिला बिरादरी को लेकर खलनायक की छवि बनाने वाले अब क्यों शांत हो गए हैं। दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए फंसी का सजा जल्द से जल्द मिलनी चाहिए।
- अनीता प्रजापति, 6 एवेन्यू सोसाइटी
पैसे के लिए जान लेना समाज के लिए इससे घातक कोई चीज नहीं हो सकती। महिलाओं को अपने लिए लड़ना होगा,जिससे उनके साथ कोई घटना करने से पहले 100 बार सोचे।
- वंदना गुप्ता, गौड़ सौैंदर्यम सोसाइटी
- बेटियों को मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्हें यह भी बताना होगा कि कभी भी उनके साथ कोई घटना हो तो वह तुरंत इसके खिलाफ आवाज उठाएं। अपराध को न झेलें।
- रश्मि पांडेय, ग्रीन आर्क सोसाइटी
आरोपी की पत्नी से बन नहीं रही थी तो कोर्ट का रास्ता अपनाना चाहिए था। मारने का अधिकार किसने दिया। बेटियों को ऐसी घटनाओं से पहले ही आवाज उठानी होगी।
- अल्केश पाराशर, एसकेए मेट्रो विले सोसाइटी
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-कहा, मामले की फर्स्ट ट्रैक कोर्ट में हो सुनवाई, दोषियों को फांसी की मिले सजा
अंकुर त्रिपाठी
ग्रेटर नोएडा। सिरसा गांव में शनिवार को महिला को जिंदा जलाने की घटना को लेकर महिलाओं में गुस्सा है। उनका कहना है कि मेरठ और इंदौर में पति की हत्या करने के बाद महिलाओं को खलनायक बना दिया गया था, लेकिन अब लोग शांत क्यों है। मामले की फास्टट्रैक कोर्ट में सुनवाई की जाए और दोषियों को फांसी की सजा मिले। उनका कहना है कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम व महिला आरक्षण विधेयक संसद में भले ही पास हो गया हो,लेकिन महिलाओं के साथ अन्याय बढ़ते जा रहे हैं। महिलाओं को बराबरी के दावे केवल कागजों में ही सीमित हैं। आज भी महिलाएं दहेज, घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है। बस समाज के लिए ये बातें इतनी सामान्य हो गई है कि बहुत ज्यादा विचलित नहीं करती हैं।
महिला बिरादरी को लेकर खलनायक की छवि बनाने वाले अब क्यों शांत हो गए हैं। दोषियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए फंसी का सजा जल्द से जल्द मिलनी चाहिए।
- अनीता प्रजापति, 6 एवेन्यू सोसाइटी
पैसे के लिए जान लेना समाज के लिए इससे घातक कोई चीज नहीं हो सकती। महिलाओं को अपने लिए लड़ना होगा,जिससे उनके साथ कोई घटना करने से पहले 100 बार सोचे।
- वंदना गुप्ता, गौड़ सौैंदर्यम सोसाइटी
- बेटियों को मजबूत बनाने की जरूरत है। उन्हें यह भी बताना होगा कि कभी भी उनके साथ कोई घटना हो तो वह तुरंत इसके खिलाफ आवाज उठाएं। अपराध को न झेलें।
- रश्मि पांडेय, ग्रीन आर्क सोसाइटी
आरोपी की पत्नी से बन नहीं रही थी तो कोर्ट का रास्ता अपनाना चाहिए था। मारने का अधिकार किसने दिया। बेटियों को ऐसी घटनाओं से पहले ही आवाज उठानी होगी।
- अल्केश पाराशर, एसकेए मेट्रो विले सोसाइटी