{"_id":"61a7b83f2bf92073f33d5948","slug":"vigilance-investigation-intensifies-in-dalit-prerna-sthal-scam-case-noida-news-noi6189400133","type":"story","status":"publish","title_hn":"दलित प्रेरणा स्थल घोटाला मामले में विजिलेंस की जांच तेज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दलित प्रेरणा स्थल घोटाला मामले में विजिलेंस की जांच तेज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नोएडा। दस साल पुराने दलित प्रेरणा स्थल घोटाला प्रकरण में जांच की आंच एक बार फिर तेज हो गई है। लखनऊ में विजिलेंस टीम ने कुछ फाइलों को तलब किया था। मंगलवार को प्राधिकरण अधिकारी इन फाइलों को लेकर विजिलेंस टीम के समक्ष पेश हुए। इनमें से 23 फाइलों को टीम ने पास रख लिया है। सूत्रों की माने तो विजिलेंस टीम ने 2009 से 2012 तक प्राधिकरण में कार्यरत रहे सीईओ, एसीईओ, ओएसडी के साथ ही अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों की सूची भी तलब की है।
दरअसल, सेक्टर-95 में दलित प्रेरणा स्थल को बनाने के लिए 84 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया था। स्मारक बनना शुरू हुआ तो इसमें पानी की तरह पैसा बहाया गया। पत्थरों की कीमत से लेकर ढुलाई आदि में सरकारी धन की बर्बादी की गई। नतीजा यह रहा है कि निर्माण में एक हजार करोड़ रुपये खर्च हो गए। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम द्वारा बनाए गए इस स्थल का ऑडिट सपा सरकार ने कराया था। नोएडा के साथ ही लखनऊ में भी उस समय स्मारकों का निर्माण किया गया था। आरोप है कि दोनों ही जगह करीब 1400 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ।
चिटहेरा भूमि घोटाला : एडीएम ने शुरू की जांच, शिकायतकर्ता से मांगे तथ्य
ग्रेटर नोएडा। अपर जिलाधिकारी (एडीएम) वित्त एवं राजस्व वंदिता श्रीवास्तव ने चिटहेरा गांव में अनुसूचित जाति और भूमिहीन के नाम की जमीन को हड़पने व सरकारी जमीन का मुआवजा उठाने की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने शिकायतकर्ता से घोटाले से जुड़े सभी तथ्य, सबूत और अन्य जानकारियां मांगी हैं। वहीं, घोटाले की जांच स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) भी कर रही है।
विज्ञापन
चिटहेरा गांव में अनुसूचित जाति और भूमिहीन के नाम सरकारी जमीन के पट्टे हुए थे। भूमाफिया ने इन पट्टों की रजिस्ट्री अपने नाम करा ली, जबकि कुछ पट्टों का एग्रीमेंट टू सेल करा लिया। बाद में इस जमीन का मुआवजा उठा लिया। अरबों रुपये के घोटाले में कुछ नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप है। एक व्यक्ति ने इसकी शिकायत यूपी के डीजीपी से की थी। डीजीपी के आदेश पर एसटीएफ ने इस घोटाले की जांच शुरू की है। जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने भी वंदिता को जांच सौंपी है।
पहले एडीएम प्रशासन को जांच सौंपी थी, लेकिन जांच शुरू होने से पहले ही अधिकारी बदल दिए गए। एडीएम वंदिता श्रीवास्तव ने घोटाले की जांच शुरू कर दी है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता से तथ्य और साक्ष्य मांगे गए हैं। बुधवार को सभी कागजात और जानकारी के साथ बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं आया। शिकायतकर्ता से जानकारी मिलने के बाद जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।
विज्ञापन
दरअसल, सेक्टर-95 में दलित प्रेरणा स्थल को बनाने के लिए 84 करोड़ रुपये का अनुबंध किया गया था। स्मारक बनना शुरू हुआ तो इसमें पानी की तरह पैसा बहाया गया। पत्थरों की कीमत से लेकर ढुलाई आदि में सरकारी धन की बर्बादी की गई। नतीजा यह रहा है कि निर्माण में एक हजार करोड़ रुपये खर्च हो गए। उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम द्वारा बनाए गए इस स्थल का ऑडिट सपा सरकार ने कराया था। नोएडा के साथ ही लखनऊ में भी उस समय स्मारकों का निर्माण किया गया था। आरोप है कि दोनों ही जगह करीब 1400 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ।
विज्ञापन
चिटहेरा भूमि घोटाला : एडीएम ने शुरू की जांच, शिकायतकर्ता से मांगे तथ्य
ग्रेटर नोएडा। अपर जिलाधिकारी (एडीएम) वित्त एवं राजस्व वंदिता श्रीवास्तव ने चिटहेरा गांव में अनुसूचित जाति और भूमिहीन के नाम की जमीन को हड़पने व सरकारी जमीन का मुआवजा उठाने की जांच शुरू कर दी है। उन्होंने शिकायतकर्ता से घोटाले से जुड़े सभी तथ्य, सबूत और अन्य जानकारियां मांगी हैं। वहीं, घोटाले की जांच स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) भी कर रही है।
विज्ञापन
चिटहेरा गांव में अनुसूचित जाति और भूमिहीन के नाम सरकारी जमीन के पट्टे हुए थे। भूमाफिया ने इन पट्टों की रजिस्ट्री अपने नाम करा ली, जबकि कुछ पट्टों का एग्रीमेंट टू सेल करा लिया। बाद में इस जमीन का मुआवजा उठा लिया। अरबों रुपये के घोटाले में कुछ नेताओं और अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप है। एक व्यक्ति ने इसकी शिकायत यूपी के डीजीपी से की थी। डीजीपी के आदेश पर एसटीएफ ने इस घोटाले की जांच शुरू की है। जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने भी वंदिता को जांच सौंपी है।
पहले एडीएम प्रशासन को जांच सौंपी थी, लेकिन जांच शुरू होने से पहले ही अधिकारी बदल दिए गए। एडीएम वंदिता श्रीवास्तव ने घोटाले की जांच शुरू कर दी है। उनका कहना है कि शिकायतकर्ता से तथ्य और साक्ष्य मांगे गए हैं। बुधवार को सभी कागजात और जानकारी के साथ बुलाया गया था, लेकिन वह नहीं आया। शिकायतकर्ता से जानकारी मिलने के बाद जांच को आगे बढ़ाया जाएगा।