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गोशाला में गोवंश मरने के मामले में दो को जेल
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ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो प्राधिकरण की जलपुरा गोशाला में गोवंश के दम तोड़ने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। ईकोटेक-3 थाने में दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि जिम्मेदार अधिकारियों ने चारे का रुपया हड़प लिया। वहीं, गोवंशों ने भूख के कारण दम तोड़ दिया। इतना ही नहीं, साक्ष्य मिटाने के लिए आरोपी पशु क्रूरता अधिनियम का उल्लंघन करते हुए गोवंशों को गोशाला परिसर में ही दफना रहे थे।
मामले में प्राधिकरण के ओएसडी एसपी शुक्ला ने जांच के बाद के गोशाला पर्यवेक्षण अधिकारी वरिष्ठ प्रबंधक स्वास्थ्य रमेश चंद, तकनीकी प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी डॉ. प्रेमचंद, सुपरवाइजर शीतल प्रकाश तिवारी और कपाउंडर सतेंद्र कुमार पर केस दर्ज कराया है। डीसीपी सेंट्रल जोन हरीश चंदर ने बताया कि पुलिस ने बीती रात चारों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। रविवार को इन्हें जिला अदालत में पेश किया गया। जहां से रमेश चंद और डॉ. प्रेमचंद को जमानत मिल गई। वहीं, शीतल प्रकाश और सतेंद्र कुमार को जेल भेज दिया गया।
ओएसडी एसपी शुक्ला की शिकायत और उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार द्विवेेदी की जांच व एफआईआर के मुुताबिक, गोशाला में गायों के मरने का वीडियो वायरल होने के बाद मौके पर जाकर पूछताछ की गई। इसमें पता चला है कि अधिकारी रमेश चंद और प्रेमचंद ने ही अपने प्रभाव के कारण आरोपी शीतल प्रकाश और सतेंद्र कुमार को नौकरी पर रखा था। यह लोग समय पर गोवंशों को चारा-पानी नहीं देते थे। आरोपी आपराधिक षड्यंत्र के तहत रुपये हड़प लेते थे।
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अधिकारियों और कर्मचारियों के रवैये से ही गोवंश कमजोर और बीमार होते चले गए। बाद में वह दम तोड़ने लगे। इसके बाद शवों को गोपनीय तरीके से दफनाकर साक्ष्य मिटाए जाते थे। 25 मार्च को ग्रामीणों ने गोशाला के कर्मचारियों को ऐसा करते हुए देख लिया और उनका वीडियो बना लिया। इससे कर्मचारी हड़बड़ा गए और साक्ष्य मिटाने के लिए शव को ही गायब कर दिया।
‘बीमार गाय को डंडे से मारते हुए बोल रहे थे बहाना बनाकर लेटी है’
एफआईआर में कहा गया है कि जांच के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि 23 मार्च को गोशाला में एक गाय बहुत कमजोर हालत में थी। उसे डंडे से मारकर उठाने की कोशिश की जा रही थी। साथ ही यह कहा जा रहा था कि गाय बहाना बनाकर लेटी है। बाद में गाय मर गई।
पहले भी तोड़ा गोवंशों ने दम, डाल दिया पर्दा
यह पहला मामला नहीं है जब मुख्यमंत्री के सख्त आदेश के बावजूद चारे की कमी से गोवंशों के मरने का आरोप लगा हो। दो साल पहले जलपुरा की गोशाला में ही बड़ी संख्या में गोवंशों की मौत हुई थी। छह माह पहले भी इसी गोशाला में गोवंशों के मरने का मामला सामने आया था। नोएडा और रबूपुरा की गोशाला में भी गोवंशों ने दम तोड़ा था, लेकिन हर बार कार्रवाई के बजाय पर्दा डाला जाता रहा। पहली बार जिले में गोवंश के मरने पर इतनी बड़ी कार्रवाई की गई है।
काम की निगरानी करने वालों पर कार्रवाई कब
सरकारी कार्य की जिम्मेदारी किसी छोटे अधिकारी व कर्मचारी को देने के बाद बड़े अफसर उन पर नजर रखते हैं। अब दो अधिकारियों और दो कर्मचारियों पर केस दर्ज होने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि नामजद आरोपियों के काम की निगरानी करने वाले बड़े अधिकारियों पर कब कार्रवाई होगी। जानकारी यह भी मिली है कि नामजद आरोपी रमेश चंद का 17 मार्च को ही स्थानांतरण हो चुका है।
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मामले में प्राधिकरण के ओएसडी एसपी शुक्ला ने जांच के बाद के गोशाला पर्यवेक्षण अधिकारी वरिष्ठ प्रबंधक स्वास्थ्य रमेश चंद, तकनीकी प्रभारी पशु चिकित्साधिकारी डॉ. प्रेमचंद, सुपरवाइजर शीतल प्रकाश तिवारी और कपाउंडर सतेंद्र कुमार पर केस दर्ज कराया है। डीसीपी सेंट्रल जोन हरीश चंदर ने बताया कि पुलिस ने बीती रात चारों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की थी। रविवार को इन्हें जिला अदालत में पेश किया गया। जहां से रमेश चंद और डॉ. प्रेमचंद को जमानत मिल गई। वहीं, शीतल प्रकाश और सतेंद्र कुमार को जेल भेज दिया गया।
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ओएसडी एसपी शुक्ला की शिकायत और उपनिरीक्षक प्रदीप कुमार द्विवेेदी की जांच व एफआईआर के मुुताबिक, गोशाला में गायों के मरने का वीडियो वायरल होने के बाद मौके पर जाकर पूछताछ की गई। इसमें पता चला है कि अधिकारी रमेश चंद और प्रेमचंद ने ही अपने प्रभाव के कारण आरोपी शीतल प्रकाश और सतेंद्र कुमार को नौकरी पर रखा था। यह लोग समय पर गोवंशों को चारा-पानी नहीं देते थे। आरोपी आपराधिक षड्यंत्र के तहत रुपये हड़प लेते थे।
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अधिकारियों और कर्मचारियों के रवैये से ही गोवंश कमजोर और बीमार होते चले गए। बाद में वह दम तोड़ने लगे। इसके बाद शवों को गोपनीय तरीके से दफनाकर साक्ष्य मिटाए जाते थे। 25 मार्च को ग्रामीणों ने गोशाला के कर्मचारियों को ऐसा करते हुए देख लिया और उनका वीडियो बना लिया। इससे कर्मचारी हड़बड़ा गए और साक्ष्य मिटाने के लिए शव को ही गायब कर दिया।
‘बीमार गाय को डंडे से मारते हुए बोल रहे थे बहाना बनाकर लेटी है’
एफआईआर में कहा गया है कि जांच के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि 23 मार्च को गोशाला में एक गाय बहुत कमजोर हालत में थी। उसे डंडे से मारकर उठाने की कोशिश की जा रही थी। साथ ही यह कहा जा रहा था कि गाय बहाना बनाकर लेटी है। बाद में गाय मर गई।
पहले भी तोड़ा गोवंशों ने दम, डाल दिया पर्दा
यह पहला मामला नहीं है जब मुख्यमंत्री के सख्त आदेश के बावजूद चारे की कमी से गोवंशों के मरने का आरोप लगा हो। दो साल पहले जलपुरा की गोशाला में ही बड़ी संख्या में गोवंशों की मौत हुई थी। छह माह पहले भी इसी गोशाला में गोवंशों के मरने का मामला सामने आया था। नोएडा और रबूपुरा की गोशाला में भी गोवंशों ने दम तोड़ा था, लेकिन हर बार कार्रवाई के बजाय पर्दा डाला जाता रहा। पहली बार जिले में गोवंश के मरने पर इतनी बड़ी कार्रवाई की गई है।
काम की निगरानी करने वालों पर कार्रवाई कब
सरकारी कार्य की जिम्मेदारी किसी छोटे अधिकारी व कर्मचारी को देने के बाद बड़े अफसर उन पर नजर रखते हैं। अब दो अधिकारियों और दो कर्मचारियों पर केस दर्ज होने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि नामजद आरोपियों के काम की निगरानी करने वाले बड़े अधिकारियों पर कब कार्रवाई होगी। जानकारी यह भी मिली है कि नामजद आरोपी रमेश चंद का 17 मार्च को ही स्थानांतरण हो चुका है।