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ट्विन टावर: सुप्रीम कोर्ट में 26 को प्राधिकरण दाखिल करेगा जवाब
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नोएडा। सुपरटेक बिल्डर के एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट में बने ट्विन टावर को गिराने के मामले में प्राधिकरण अब 26 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में जवाब दाखिल करने की तैयारी कर रहा है। मंगलवार को भी कई अधिकारी रिपोर्ट बनाते नजर आए। वहीं, सुपरटेक की ओर से प्राधिकरण को भेजे गए ई-मेल में टावर गिराने की कार्ययोजना पेश करने के लिए 21 दिनों की समय सीमा मांगी गई है। सुपरटेक ने यह ई-मेल 20 नवंबर को प्राधिकरण को भेजा था। वहीं, प्रकरण को लेकर एमराल्ड कोर्ट की आरडब्ल्यूए सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल करने की बात कर रही है।
प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण में 90 दिन का समय देते हुए ट्विन टावर को ध्वस्त करने की रिपोर्ट 30 नवंबर तक पेश करने का आदेश दिया था। ध्वस्तीकरण पर आने वाला खर्च भी सुपरटेक ही वहन करेगा। पहले ही दिन से सुपरटेक बिल्डर कंपनी को इसकी जानकारी दे दी गई थी। कई बार वर्चुअल बैठक की गई, पत्राचार भी किया गया। इसके बावजूद सुपरटेक ध्वस्तीकरण के लिए न तो किसी एजेंसी को तय पाया और न ही कोई कार्ययोजना प्राधिकरण को सौंपी गई। मंगलवार को भी सुपरटेक और प्राधिकरण अधिकारियों के बीच बात हुई, लेकिन कार्ययोजना प्रस्तुत नहीं की गई।
इधर, प्राधिकरण सूत्रों की माने तो सुप्रीम कोर्ट आदेश की अवहेलना से बचने के लिए अब प्राधिकरण जवाब तैयार कर रहा है। इसमें ट्विन टावर को लेकर अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा दिया जा रहा है। इसमें ग्रीन बेल्ट कब्जा मुक्त कराने से लेकर, एसआईटी गठित करने, जांच कमेटी बनाने, जांच रिपोर्ट के बाद परिवाद दर्ज कराने तक की बात शामिल की जा रही है। सुपरटेक इस प्रकरण में प्राधिकरण के समक्ष छह कंपनियों जेट डिमोलेशन, एग्जीक्यूट प्रा. लि., जैनेसिस, इडफिक, प्रेसिडेंट ऑफ एक्सपर्ट डिमोलेशन और मैसर्स चावला एंड कंपनी के नाम प्रस्तुत कर चुका है, लेकिन किसी भी कंपनी ने कार्ययोजना नहीं दी है।
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प्राधिकरण की मुख्य कार्यपालक अधिकारी रितु माहेश्वरी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रकरण में 90 दिन का समय देते हुए ट्विन टावर को ध्वस्त करने की रिपोर्ट 30 नवंबर तक पेश करने का आदेश दिया था। ध्वस्तीकरण पर आने वाला खर्च भी सुपरटेक ही वहन करेगा। पहले ही दिन से सुपरटेक बिल्डर कंपनी को इसकी जानकारी दे दी गई थी। कई बार वर्चुअल बैठक की गई, पत्राचार भी किया गया। इसके बावजूद सुपरटेक ध्वस्तीकरण के लिए न तो किसी एजेंसी को तय पाया और न ही कोई कार्ययोजना प्राधिकरण को सौंपी गई। मंगलवार को भी सुपरटेक और प्राधिकरण अधिकारियों के बीच बात हुई, लेकिन कार्ययोजना प्रस्तुत नहीं की गई।
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इधर, प्राधिकरण सूत्रों की माने तो सुप्रीम कोर्ट आदेश की अवहेलना से बचने के लिए अब प्राधिकरण जवाब तैयार कर रहा है। इसमें ट्विन टावर को लेकर अब तक की गई कार्रवाई का पूरा ब्योरा दिया जा रहा है। इसमें ग्रीन बेल्ट कब्जा मुक्त कराने से लेकर, एसआईटी गठित करने, जांच कमेटी बनाने, जांच रिपोर्ट के बाद परिवाद दर्ज कराने तक की बात शामिल की जा रही है। सुपरटेक इस प्रकरण में प्राधिकरण के समक्ष छह कंपनियों जेट डिमोलेशन, एग्जीक्यूट प्रा. लि., जैनेसिस, इडफिक, प्रेसिडेंट ऑफ एक्सपर्ट डिमोलेशन और मैसर्स चावला एंड कंपनी के नाम प्रस्तुत कर चुका है, लेकिन किसी भी कंपनी ने कार्ययोजना नहीं दी है।
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