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ट्विन टावर मामला : प्राधिकरण में आठ घंटे तक विजिलेंस टीम ने खंगाले दस्तावेज
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नोएडा। ट्विन टावर मामले की जांच करने पहली बार विजिलेंस की पांच सदस्यीय टीम शुक्रवार को प्राधिकरण कार्यालय में आई और करीब आठ घंटे तक दस्तावेज खंगाले। इसके बाद करीब एक से डेढ़ घंटे तक टीम ने ट्विन टावर पहुंचकर विचार विमर्श भी किया।
मामले में शासन के निर्देश पर प्राधिकरण ने नियोजन व सिविल विभाग के 11 अफसरों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर शासन को भेजा जा चुका है। इसमें ऋतुराज व्यास, एके मिश्रा, राजपाल कौशिक, त्रिभुवन सिंह, वीए देवपुजारी आदि कई अफसर शामिल हैं। हालांकि, कई अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जो अधिकारी प्राधिकरण में है वह निलंबित चल रहे हैं।
ट्विन टावर प्रकरण में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को प्राधिकरण के उन अधिकारियों के खिलाफ भी जांच करने का आदेश दिया था, जिनकी सरपरस्ती में इन टावरों को बनाया गया था। प्रदेश सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी की रिपोर्ट में सुपरटेक के चार निदेशकों व 24 अफसरों व दो आर्किटेक्ट कंपनियों को जिम्मेदार बताया गया था। जांच रिपोर्ट आने पर प्राधिकरण की ओर से लखनऊ विजिलेंस में चार अक्तूबर 2021 को आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। इन सभी प्रक्रिया के बाद ट्विन टावर गिराने की प्रक्रिया में तेजी आई है। इसके बाद विजिलेंस ने इस मामले को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है।
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विस्फोट करने की योजना की रिपोर्ट एडिफिस ने प्राधिकरण में जमा की
ट्विन टावर को गिराने के लिए एडिफिस की ओर से विस्फोट करने की योजना की ड्राफ्ट रिपोर्ट प्राधिकरण में जमा करा दी गई है। इस रिपोर्ट को प्राधिकरण ने ऑनलाइन ही रुड़की भेज दिया है। रुड़की में अध्ययन के बाद कोई बदलाव करने की जरूरत पड़ी तो संशोधन किया जाएगा। यदि सीबीआरआई की ओर से इस रिपोर्ट पर संतुष्टि जताई गई तो आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। विस्फोटक लाने के लिए एडिफिस को पुलिस के साथ तालमेल भी बैठाना है। 15 दिन पहले ही विस्फोटक लाकर सुरक्षित जगह रखे जाएंगे। ब्यूरो
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मामले में शासन के निर्देश पर प्राधिकरण ने नियोजन व सिविल विभाग के 11 अफसरों के खिलाफ आरोप पत्र तैयार कर शासन को भेजा जा चुका है। इसमें ऋतुराज व्यास, एके मिश्रा, राजपाल कौशिक, त्रिभुवन सिंह, वीए देवपुजारी आदि कई अफसर शामिल हैं। हालांकि, कई अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जो अधिकारी प्राधिकरण में है वह निलंबित चल रहे हैं।
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ट्विन टावर प्रकरण में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त 2021 को प्राधिकरण के उन अधिकारियों के खिलाफ भी जांच करने का आदेश दिया था, जिनकी सरपरस्ती में इन टावरों को बनाया गया था। प्रदेश सरकार ने स्पेशल टास्क फोर्स (एसआईटी) का गठन किया था। एसआईटी की रिपोर्ट में सुपरटेक के चार निदेशकों व 24 अफसरों व दो आर्किटेक्ट कंपनियों को जिम्मेदार बताया गया था। जांच रिपोर्ट आने पर प्राधिकरण की ओर से लखनऊ विजिलेंस में चार अक्तूबर 2021 को आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। इन सभी प्रक्रिया के बाद ट्विन टावर गिराने की प्रक्रिया में तेजी आई है। इसके बाद विजिलेंस ने इस मामले को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया है।
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विस्फोट करने की योजना की रिपोर्ट एडिफिस ने प्राधिकरण में जमा की
ट्विन टावर को गिराने के लिए एडिफिस की ओर से विस्फोट करने की योजना की ड्राफ्ट रिपोर्ट प्राधिकरण में जमा करा दी गई है। इस रिपोर्ट को प्राधिकरण ने ऑनलाइन ही रुड़की भेज दिया है। रुड़की में अध्ययन के बाद कोई बदलाव करने की जरूरत पड़ी तो संशोधन किया जाएगा। यदि सीबीआरआई की ओर से इस रिपोर्ट पर संतुष्टि जताई गई तो आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। विस्फोटक लाने के लिए एडिफिस को पुलिस के साथ तालमेल भी बैठाना है। 15 दिन पहले ही विस्फोटक लाकर सुरक्षित जगह रखे जाएंगे। ब्यूरो