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कहीं आज का निर्णय भविष्य के लिए न बन जाए चुनौती
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कहीं आज के निर्णय, भविष्य के लिए बन न जाएं चुनौती
नोएडा। कोरोना संकट का असर चारो तरफ दिख रहा है। हाल ही में प्रदेश सरकार ने सभी विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं रद्द करके छात्रों को प्रमोट करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस निर्णय के साथ ही छात्रों और शिक्षकों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। जहां कोरोना से बचाव के लिहाज से इसे एक अच्छा कदम माना जा रहा है। वहीं, इस निर्णय से भविष्य के संबंध में चिंताएं बढ़ गई हैं।
कहीं लग न जाए प्रमोट करने का ठप्पा
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रीति राजवंशी का कहना है कि यदि सुरक्षा की दृष्टि से देखें तो यह एक बेहतर कदम है। लेकिन, एक डर है कि कहीं हमेशा के लिए बच्चों पर एक ठप्पा न लग जाए। जब इस वर्ष के छात्र कहीं प्लेसमेंट या नई जगह दाखिले के लिए जाएं तो उनसे यह न कहा जाए कि ये लोग तो 2020 के प्रमोट छात्र हैं। सबको एक ही नजर से देखा जाए। साथ ही फाइनल ईयर के बैक पेपर वाले छात्रों का क्या होगा। यह भी अभी समझ नहीं आ रहा है।
प्लेसमेंट के लिए कदम उठाने की आवश्यकता
असिस्टेंट प्रोफेसर रोहित कुमार कहते हैं कि वर्तमान हालातों को देखते हुए प्रमोट करना अच्छा निर्णय है। लेकिन, भविष्य के बारे में भी सोचा जाना चाहिए। जुलाई में शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे। अभी विद्यार्थी प्रमोट हो गए, लेकिन ऐसे में प्लेसमेंट कब और कैसे होंगे यह बड़ा सवाल है। भविष्य में दाखिला और प्लेसमेंट के संबंध में भी आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है।
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छात्रों की मेहनत में फिर गया पानी
बीसीए में सेकेंड ईयर की छात्रा आकांक्षा कहती हैं कि वर्तमान में कोविड स्थिति में सुधार नहीं है। इसलिए परीक्षा कराना ठीक नहीं है। लेकिन, तैयारी करने वाले छात्रों को थोड़ा बुरा लगा है। हर छात्र की मेहनत अलग होती है। कैसे प्रमोट करेंगे, क्या होगा बहुत से सवाल मन में उठ रहे हैं।
मुश्किलें कम हुई, लेकिन चिंताएं बढ़ी
बीसीए में फाइनल ईयर के छात्र आदित्य कहते हैं कि वह लॉकडाउन में अपने घर कोलकाता आ गए। अब कोलकाता से नोएडा पेपर देने कैसे लौटेंगे, इस बात की चिंता थी। वापस आने में बहुत परेशानी होती। यह मुश्किल इस निर्णय से दूर हो गई। लेकिन, भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। प्रमोट की जगह ऑनलाइन परीक्षाएं हो जाती तो ज्यादा बेहतर होता।
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नोएडा। कोरोना संकट का असर चारो तरफ दिख रहा है। हाल ही में प्रदेश सरकार ने सभी विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं रद्द करके छात्रों को प्रमोट करने का निर्णय लिया है। सरकार के इस निर्णय के साथ ही छात्रों और शिक्षकों के मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। जहां कोरोना से बचाव के लिहाज से इसे एक अच्छा कदम माना जा रहा है। वहीं, इस निर्णय से भविष्य के संबंध में चिंताएं बढ़ गई हैं।
कहीं लग न जाए प्रमोट करने का ठप्पा
असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. प्रीति राजवंशी का कहना है कि यदि सुरक्षा की दृष्टि से देखें तो यह एक बेहतर कदम है। लेकिन, एक डर है कि कहीं हमेशा के लिए बच्चों पर एक ठप्पा न लग जाए। जब इस वर्ष के छात्र कहीं प्लेसमेंट या नई जगह दाखिले के लिए जाएं तो उनसे यह न कहा जाए कि ये लोग तो 2020 के प्रमोट छात्र हैं। सबको एक ही नजर से देखा जाए। साथ ही फाइनल ईयर के बैक पेपर वाले छात्रों का क्या होगा। यह भी अभी समझ नहीं आ रहा है।
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प्लेसमेंट के लिए कदम उठाने की आवश्यकता
असिस्टेंट प्रोफेसर रोहित कुमार कहते हैं कि वर्तमान हालातों को देखते हुए प्रमोट करना अच्छा निर्णय है। लेकिन, भविष्य के बारे में भी सोचा जाना चाहिए। जुलाई में शैक्षणिक संस्थान बंद रहेंगे। अभी विद्यार्थी प्रमोट हो गए, लेकिन ऐसे में प्लेसमेंट कब और कैसे होंगे यह बड़ा सवाल है। भविष्य में दाखिला और प्लेसमेंट के संबंध में भी आवश्यक कदम उठाने की आवश्यकता है।
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छात्रों की मेहनत में फिर गया पानी
बीसीए में सेकेंड ईयर की छात्रा आकांक्षा कहती हैं कि वर्तमान में कोविड स्थिति में सुधार नहीं है। इसलिए परीक्षा कराना ठीक नहीं है। लेकिन, तैयारी करने वाले छात्रों को थोड़ा बुरा लगा है। हर छात्र की मेहनत अलग होती है। कैसे प्रमोट करेंगे, क्या होगा बहुत से सवाल मन में उठ रहे हैं।
मुश्किलें कम हुई, लेकिन चिंताएं बढ़ी
बीसीए में फाइनल ईयर के छात्र आदित्य कहते हैं कि वह लॉकडाउन में अपने घर कोलकाता आ गए। अब कोलकाता से नोएडा पेपर देने कैसे लौटेंगे, इस बात की चिंता थी। वापस आने में बहुत परेशानी होती। यह मुश्किल इस निर्णय से दूर हो गई। लेकिन, भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। प्रमोट की जगह ऑनलाइन परीक्षाएं हो जाती तो ज्यादा बेहतर होता।