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एप से क्रिकेट मैच पर सट्टा लगाने वाले सरगना समेत तीन गिरफ्तार
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सट्टा लगाने के आरोप में गिरफ्तार पंकज गिरी, शिवम चौहान और शिवम कुमार। अमर उजाला
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नोएडा। एप पर क्रिकेट मैच दिखाकर ऑनलाइन सट्टा लगवाने वाले गिरोह का कोतवाली सेक्टर-58 पुलिस ने खुलासा करते हुए सरगना समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी टी-20 वर्ल्ड कप से लेकर अबू धाबी क्रिकेट लीग में सट्टा लगवाकर करोड़ों रुपये की कमाई कर रहे थे। पुलिस ने इनके पास से साढ़े चार लाख रुपये, विभिन्न बैंकों के 26 एटीएम कार्ड, 6 मोबाइल, 9 फर्जी आधार कार्ड व सट्टे संबंधित प्रिंट आउट बरामद किए हैं।
एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि कोतवाली सेक्टर-58 के प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार की टीम बृहस्पतिवार को सेक्टर-60 के पास चेकिंग कर रही थी। इस दौरान साढ़े चार लाख रुपये के साथ बाइक सवार तीन लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि तीनों सट्टेबाज हैं। इनकी पहचान गाजियाबाद के नंदग्राम निवासी पंकज गिरी, शिवम चौहान और शिवम कुमार के रूप में हुई। सरगना पंकज गिरी है जो एनसीआर में सट्टा किंग के नाम से जाना जाता है। आरोपी क्रिक लाइन गुरु और क्रिक बज एप पर मैच दिखाकर सट्टेबाजी करते हैं। गिरोह एनसीआर से लेकर आसपास के राज्यों में सक्रिय है।
50 रुपये से लाखों रुपये तक लगवाते थे सट्टा
एडीसीपी ने बताया कि आरोपी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहकर एनसीआर व अन्य शहरों के लोगों को जोड़ते थे और पचास रुपये से लाखों रुपये तक का सट्टा लगवाते थे। किसी भी मैच में आरोपी टीम, विकेट, चौके, छक्के, जीत, हार, नो बॉल से लेकर अन्य पर पैसे लगवाते थे। जीतने पर पैसों को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर लेते थे। गिरोह दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा सहित अन्य कई शहरों में सक्रिय था। एनसीआर में इनके 100 से अधिक एजेंट हैं जो लोगों को इनसे जोड़तेे हैं। इसके एवज में एजेंटों को कमीशन मिलती है।
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हर महीने की कमाई करीब डेढ़ करोड़ रुपये
एडीसीपी ने बताया कि आरोपियों की हर माह की कमाई लगभग डेढ़ करोड़ रुपये थी। इनके 14 बैंक खातों की जांच की गई है जिसमें लगभग 70 लाख रुपये के लेनदेन का पता चला है। अभी 14 और खातों की जांच चल रही है। इस मामले में सेक्टर-22 निवासी सलमान फरार है। शिवम चौहान व शिवम कुमार को पंकज गिरी ने नौकरी पर रखा हुआ था और इन्हें आठ-आठ हजार रुपये वेतन देता था।
30-30 हजार रुपये में खरीदे थे बैंक खाते
एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि पंकज सट्टे के पैसे को ट्रांसफर कराने के लिए दूसरों के खाते का इस्तेमाल करता था। इसके लिए संदीप व हिमांशु से 30-30 हजार रुपये में खाते व एटीएम कार्ड खरीदे थे। हिमांशु व संदीप इस वक्त गाजियाबाद के डासना जेल में बंद हैं। गिरफ्तार आरोपियों के पास से 9 फर्जी आधार कार्ड मिले हैं। आरोपी इनसे खुद ही खाते खुलवाने की तैयारी कर रहे थे।
पांच साल से चला रहे गिरोह
आरोपी एनसीआर के शहरों व गांवों में एजेंट के जरिये टेलीग्राम पर ग्रुप बनाकर लोगों को जोड़ते थे और सट्टेबाजी के लिए प्रोत्साहित करते थे। गिरोह पिछले पांच सालों से इस काम में लगा था। एक साल से एनसीआर में इनका बड़ा नेटवर्क हो गया था और करोड़ों का टर्नओवर था। पिछले दिनों टी-20 वर्ल्ड कप में भी इन लोगों ने करोड़ों कमाई की है।
टेलीग्राम पर ग्रुप बनाकर एप से क्रिकेट मैच में सट्टा लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। गिरोह के सरगना समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पूरे नेटवर्क के बारे में पता लगाया जा रहा है। - रणविजय सिंह, एडीसीपी नोएडा
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एडीसीपी रणविजय सिंह ने बताया कि कोतवाली सेक्टर-58 के प्रभारी निरीक्षक विनोद कुमार की टीम बृहस्पतिवार को सेक्टर-60 के पास चेकिंग कर रही थी। इस दौरान साढ़े चार लाख रुपये के साथ बाइक सवार तीन लोगों से पूछताछ की तो पता चला कि तीनों सट्टेबाज हैं। इनकी पहचान गाजियाबाद के नंदग्राम निवासी पंकज गिरी, शिवम चौहान और शिवम कुमार के रूप में हुई। सरगना पंकज गिरी है जो एनसीआर में सट्टा किंग के नाम से जाना जाता है। आरोपी क्रिक लाइन गुरु और क्रिक बज एप पर मैच दिखाकर सट्टेबाजी करते हैं। गिरोह एनसीआर से लेकर आसपास के राज्यों में सक्रिय है।
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50 रुपये से लाखों रुपये तक लगवाते थे सट्टा
एडीसीपी ने बताया कि आरोपी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहकर एनसीआर व अन्य शहरों के लोगों को जोड़ते थे और पचास रुपये से लाखों रुपये तक का सट्टा लगवाते थे। किसी भी मैच में आरोपी टीम, विकेट, चौके, छक्के, जीत, हार, नो बॉल से लेकर अन्य पर पैसे लगवाते थे। जीतने पर पैसों को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर लेते थे। गिरोह दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, नोएडा सहित अन्य कई शहरों में सक्रिय था। एनसीआर में इनके 100 से अधिक एजेंट हैं जो लोगों को इनसे जोड़तेे हैं। इसके एवज में एजेंटों को कमीशन मिलती है।
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हर महीने की कमाई करीब डेढ़ करोड़ रुपये
एडीसीपी ने बताया कि आरोपियों की हर माह की कमाई लगभग डेढ़ करोड़ रुपये थी। इनके 14 बैंक खातों की जांच की गई है जिसमें लगभग 70 लाख रुपये के लेनदेन का पता चला है। अभी 14 और खातों की जांच चल रही है। इस मामले में सेक्टर-22 निवासी सलमान फरार है। शिवम चौहान व शिवम कुमार को पंकज गिरी ने नौकरी पर रखा हुआ था और इन्हें आठ-आठ हजार रुपये वेतन देता था।
30-30 हजार रुपये में खरीदे थे बैंक खाते
एसीपी रजनीश वर्मा ने बताया कि पंकज सट्टे के पैसे को ट्रांसफर कराने के लिए दूसरों के खाते का इस्तेमाल करता था। इसके लिए संदीप व हिमांशु से 30-30 हजार रुपये में खाते व एटीएम कार्ड खरीदे थे। हिमांशु व संदीप इस वक्त गाजियाबाद के डासना जेल में बंद हैं। गिरफ्तार आरोपियों के पास से 9 फर्जी आधार कार्ड मिले हैं। आरोपी इनसे खुद ही खाते खुलवाने की तैयारी कर रहे थे।
पांच साल से चला रहे गिरोह
आरोपी एनसीआर के शहरों व गांवों में एजेंट के जरिये टेलीग्राम पर ग्रुप बनाकर लोगों को जोड़ते थे और सट्टेबाजी के लिए प्रोत्साहित करते थे। गिरोह पिछले पांच सालों से इस काम में लगा था। एक साल से एनसीआर में इनका बड़ा नेटवर्क हो गया था और करोड़ों का टर्नओवर था। पिछले दिनों टी-20 वर्ल्ड कप में भी इन लोगों ने करोड़ों कमाई की है।
टेलीग्राम पर ग्रुप बनाकर एप से क्रिकेट मैच में सट्टा लगाने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। गिरोह के सरगना समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पूरे नेटवर्क के बारे में पता लगाया जा रहा है। - रणविजय सिंह, एडीसीपी नोएडा