Chandrayaan-3: इन छह सितारों ने बनाई चांद के सफर की सीढ़ी, अपने हुनर और कौशल से मिशन को बनाया सफल
इसमें किसी का योगदान अत्याधुनिक कैमरा इस्टॉल करने का है तो किसी ने चंद्रयान के लिए खास सॉफ्टवेयर तैयार किया। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ सितारों के बारे में जिन्होंने अपनी लगन और मेहनत से इस मिशन को इस मुकाम तक पहुंचाया...
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इसरो के महत्वाकांक्षी मिशन चंद्रयान-3 को सफल बनाने के पीछे देशभर की प्रतिभाओं की कड़ी मेहनत है। इसमें देश के अलग-अलग शहरों के वैज्ञानिक ने दिन रात मेहनत कर अपने हुनर और कौशल के जरिए मिशन को इस मुकाम तक पहुंचाया है। इसमें किसी का योगदान अत्याधुनिक कैमरा इस्टॉल करने का है तो किसी ने चंद्रयान के लिए खास सॉफ्टवेयर तैयार किया। आइए जानते हैं ऐसे ही कुछ सितारों के बारे में जिन्होंने अपनी लगन और मेहनत से इस मिशन को सफल बनाया...
लैंड कराने में दिखेगा अभिषेक का मैनेजमेंट
मिशन चंद्रयान-3 को चंद्रमा की कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचाने में देवरिया स्थित बनकटा के अभिषेक के महत्वपूर्ण योगदान है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के इस महत्वाकांक्षी मिशन में सेटेलाइट की गति को नियंत्रित करने, सुरक्षित लैंडिंग कराने एवं चंद्रमा की कक्षा में पहुंचाने वाले देवरिया के इस सितारे की सब ओर चर्चा हो रही है।
मुरादाबाद के तीन वैज्ञानिक बने हैं मिशन का खास हिस्सा, अनीश के कैमरों से दिख रही चंद्रमा की आभा
इसरो में कार्यरत मुरादाबाद निवासी अनीश सक्सेना चंद्रयान मिशन 1 से लेकर अब तक जुड़े हैं। उनके बनाए गए हाई रिजोल्यूशन कैमरों से चांद की आभा को निहार रहे हैं। उन्होंने चंद्रयान 2 में लैंडर गिरने के बारे में सटीक जानकारी टीम को उपलब्ध करवाई थी। दूसरे वैज्ञानिक मेघ भटनागर हैं। वह चंद्रयान के महत्वपूर्ण हिस्सा ऑनबोर्ड सॉफ्टवेयर के क्वालिटी कंट्रोलिंग का जिम्मा संभाल रहे हैं। तीसरे वैज्ञानिक रजत प्रताप सिंह भी रॉकेट की कंट्रोलिंग करने वाली टीम में अपना योगदान दे रहे हैं।
लखनऊ की वैज्ञानिक डॉ. रितु सौंपी गई चंद्रयान-3 की लैंडिंग की जिम्मेदारी
इसरो ने जानकारी दी है कि चंद्रयान-3 की लैंडिंग की जिम्मेदारी इस बार लखनऊ की वरिष्ठ महिला वैज्ञानिक डॉ. रितु को सौंपी गई है और वह चंद्रयान-3 की मिशन डायरेक्टर हैं। अभियान के प्रोजेक्ट डायरेक्टर पी. वीरा मुथुवेल हैं। इसके पहले डॉ. रितु मंगलयान की डिप्टी ऑपरेशन डायरेक्टर और चंद्रयान-2 में मिशन डायरेक्टर रह चुकी हैं।
डॉ. रितु कारिधाल का जन्म 1975 में लखनऊ के मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ। बचपन से उन्हें चांद-सितारों और आसमान में दिलचस्पी थी। इसरो और नासा से संबंधित समाचार पत्रों के लेख, जानकारी और तस्वीरें इकट्ठा करना उनका शौक था। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से भौतिकी में बीएससी और एमएससी की पढ़ाई की। फिर एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री लेने के लिए आईआईएससी, बंगलूरू में दाखिला लिया। डॉ. करिधाल ने नवंबर 1997 से इंजीनियर के तौर पर इसरो में काम करना शुरू किया।
मुजफ्फरनगर की बेटी शितिशा और उनकी टीम की मुख्य भागीदारी
मुजफ्फरनगर के अवध विहार निवासी जैन कन्या इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. कंचन प्रभा शुक्ला की बेटी शितीशा भी चंद्रयान-3 का हिस्सा हैं। इसरो में 2017 से कार्यरत शितीशा चंद्रयान-2 और गगनयान मिशन की इलेक्ट्रॉनिक्स विशेषज्ञ टीम में रहीं है। उनकी टीम ने लैंडर का निर्माण किया।
मिशन में शामिल है फिरोजाबाद के किसान का बेटा
चंद्रयान-3 मिशन में टूंडला क्षेत्र के गांव टिकरी निवासी वरिष्ठ वैज्ञानिक धर्मेंद्र यादव भी शामिल हैं। चंद्रयान-3 के लांच होने के बाद वह बंगलुरू से इसकी निगरानी कर रहे हैं। धर्मेंद्र के पिता शंभू दयाल यादव और मां का नाम कमला है। पिता एक किसान हैं। वैज्ञानिक धर्मेंद्र यादव के भाई उपेंद्र यादव ने बताया कि चंद्रयान की लांचिंग हरिकोटा से हुई थी। चंद्रयान की निगरानी बंगलुरू से की जा रही है। इसमें धर्मेद्र वरिष्ठ वैज्ञानिक की भूमिका में निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चंद्रयान को लेकर पूरा देश भारतीय वैज्ञानिकों पर गर्व महसूस कर रहा है। मगर, धर्मेंद्र की भूमिका से गांव में उत्साह का माहौल बना है।
प्रतापगढ़ के रवि केसरवानी ने लगाया एसएचएपीई
चंद्रयान-3 में 'एसएचएपीई लगाने का काम प्रतापगढ़ के रवि केसरवानी और उनकी टीम ने किया है। रवि के अनुसार अब तक यान को चंद्रमा से रिफलेक्ट होने वाला प्रकाश मिलता है। एसएचएपीई लगने से चंद्रयान सीधे धरती से जुड़कर प्रकाश ले रहा है। ऐसा पहली बार हुआ है।