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Noida News: हवा में नमी के साथ चेहरे में अधरंग का बढ़ा खतरा, इस सप्ताह पहुंचे चार केस
Sat, 11 Oct 2025 12:08 AM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
संवाद न्यूज एजेंसी, नोएडा
Updated Sat, 11 Oct 2025 12:08 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। हवा में नमी बढ़ने के साथ चेहरे में अधरंग का खतरा बढ़ गया है। इस तरह के मामले अस्पतालाें में आए हैं। जिला नागरिक अस्पताल में ही इस सप्ताह अब तक चार मामले अधरंग के पहुंच गए हैं। चिकित्सकों ने झाड़-फूंक की बजाय चिकित्सक इलाज को जरूरी बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि झाड़ फूंक के चक्कर में बीमारी गंभीर हो जाती है। इसका इलाज संभव नहीं हो पाता। शुरुआती दिनों में ही चिकित्सा पद्धति से इलाज संभव है और आराम भी जल्दी होता है।
जिला नागरिक अस्पताल में चेहरे के टेढ़ापन (अधरंग) के मामले बढ़ने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी क्षेत्रों में भी लोग अज्ञानता के अभाव में अधरंग को झाड़-फूंक से जोड़ देते हैं और चिकित्सा पद्धति से इलाज न लेकर झाड़-फूंक में लगे रहते है जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है और उसका इलाज से भी ठीक हो पाना मुश्किल हो जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि यदि शुरुआती दिनों में ही लोग चिकित्सा पद्धति व फिजियोथेरेपी से अधरंग का इलाज करवाते हैं तो इसे ठीक किया जा सकता है। जिला नागरिक अस्पताल की फिजियिथेरेपिस्ट डॉ. नेहा बंसल ने बताया कि हवा में नमी बढ़ने पर या गर्मी के मौसम में लू चलने से अधरंग के मामले बढ़ जाते हैं। फिजियिथेरेपी और चिकित्सा पद्धति से अधरंग को शुरुआती दिनों में ही रोका जा सकता है। यदि लोग झाड़-फूंक की तरफ न जाकर इसका शुरूआत में ही इलाज करवाते हैं तो चेहरे के टेढ़ेपन जैसी बीमारी को भी ठीक किया जा सकता है।
चेहरे के टेढ़ापन से व्यक्ति ठीक तरीके से बोल भी नहीं पाता : डॉ. नेहा
डॉ. नेहा ने बताया कि अधरंग से व्यक्ति की आंख, नाक, कान, मुंह, होंठ प्रभावित होते हैं जिससे वह न तो ठीक से बोल पाता है, न ही खाना चबा पाता है और चेहरे से अपने भाव को भी स्पष्ट करने में उसे मुश्किल आती है। लोगों को बदलते मौसम में स्वयं व अपने परिवार का अतिरिक्त ध्यान रखना चाहिए। बाहर जाते समय सिर को ढ़ककर रखना चाहिए क्योंकि हमारे कानों के पास की नसें तेज हवा व लू से प्रभावित होती है जो काम करना बंद कर देती हैं जिससे चेहरे में टेढा पन आ जाता है। सुबह व शाम के समय अपने सिर को ढक कर ही बाहर निकले। यदि किसी को यह हो जाता है तो वह झाड़-फूंक की तरफ न जाकर चिकित्सा पद्धति से इलाज करवाए।
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पानीपत। हवा में नमी बढ़ने के साथ चेहरे में अधरंग का खतरा बढ़ गया है। इस तरह के मामले अस्पतालाें में आए हैं। जिला नागरिक अस्पताल में ही इस सप्ताह अब तक चार मामले अधरंग के पहुंच गए हैं। चिकित्सकों ने झाड़-फूंक की बजाय चिकित्सक इलाज को जरूरी बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि झाड़ फूंक के चक्कर में बीमारी गंभीर हो जाती है। इसका इलाज संभव नहीं हो पाता। शुरुआती दिनों में ही चिकित्सा पद्धति से इलाज संभव है और आराम भी जल्दी होता है।
जिला नागरिक अस्पताल में चेहरे के टेढ़ापन (अधरंग) के मामले बढ़ने लगे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी क्षेत्रों में भी लोग अज्ञानता के अभाव में अधरंग को झाड़-फूंक से जोड़ देते हैं और चिकित्सा पद्धति से इलाज न लेकर झाड़-फूंक में लगे रहते है जिससे बीमारी गंभीर हो जाती है और उसका इलाज से भी ठीक हो पाना मुश्किल हो जाता है। चिकित्सकों का कहना है कि यदि शुरुआती दिनों में ही लोग चिकित्सा पद्धति व फिजियोथेरेपी से अधरंग का इलाज करवाते हैं तो इसे ठीक किया जा सकता है। जिला नागरिक अस्पताल की फिजियिथेरेपिस्ट डॉ. नेहा बंसल ने बताया कि हवा में नमी बढ़ने पर या गर्मी के मौसम में लू चलने से अधरंग के मामले बढ़ जाते हैं। फिजियिथेरेपी और चिकित्सा पद्धति से अधरंग को शुरुआती दिनों में ही रोका जा सकता है। यदि लोग झाड़-फूंक की तरफ न जाकर इसका शुरूआत में ही इलाज करवाते हैं तो चेहरे के टेढ़ेपन जैसी बीमारी को भी ठीक किया जा सकता है।
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चेहरे के टेढ़ापन से व्यक्ति ठीक तरीके से बोल भी नहीं पाता : डॉ. नेहा
डॉ. नेहा ने बताया कि अधरंग से व्यक्ति की आंख, नाक, कान, मुंह, होंठ प्रभावित होते हैं जिससे वह न तो ठीक से बोल पाता है, न ही खाना चबा पाता है और चेहरे से अपने भाव को भी स्पष्ट करने में उसे मुश्किल आती है। लोगों को बदलते मौसम में स्वयं व अपने परिवार का अतिरिक्त ध्यान रखना चाहिए। बाहर जाते समय सिर को ढ़ककर रखना चाहिए क्योंकि हमारे कानों के पास की नसें तेज हवा व लू से प्रभावित होती है जो काम करना बंद कर देती हैं जिससे चेहरे में टेढा पन आ जाता है। सुबह व शाम के समय अपने सिर को ढक कर ही बाहर निकले। यदि किसी को यह हो जाता है तो वह झाड़-फूंक की तरफ न जाकर चिकित्सा पद्धति से इलाज करवाए।
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