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Noida News: 20 मिनट तक फ्लैट में अकेले फंसा रहा मासूम
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रेलिंग की ऊंचाई भी ज्यादा होती तो शायद बच सकती थी जान
विराट त्यागी
गुरुग्राम। सवा पांच साल के मासूम की 22वीं मंजिल की बालकनी से गिरकर हुई मौत ने सभी सोसाइटी निवासियों को झकझोर दिया है। सब के मन में यही बात घूम रही है कि अगर रेलिंग की ऊंचाई थोड़ी ज्यादा होती तो शायद मासूम बच जाता। बच्चा करीब 20 मिनट तक फ्लैट में अकेले फंसा था। इससे वह काफी घबरा गया था।
सोसाइटी में 22वीं मंजिल में रहने वाले प्रकाश चंद्र और उनकी पत्नी शनिवार को अपने काम से बाहर गए थे। घरेलू सहायिका बच्चे को सोसाइटी से खिलाकर फ्लैट में लेकर ही पहुंची थीं कि मासूम तुरंत अंदर चला गया और गेट को बंद कर दिया। घरेलू सहायिका को अंदाजा नहीं था कि इसके बाद गेट खुल ही नहीं पाएगा। सोसाइटी में घर के मेन गेट अत्याधुनिक होते हैं ऐसे में मासूम गेट खोल ही नहीं सका और बालकनी में चला गया।
मासूम का फ्लैट के अंदर जाना और उनका बालकनी से गिरने के दौरान करीब 20 मिनट का समय बीता था। इस दौरान घरेलू सहायिका गेट खुलवाने के लिए मुख्य दरवाजे पर ही मासूम को पुकारती रही। 22वीं मंजिल पर फ्लैट होने पर रेलिंग की भी ऊंचाई ज्यादा ही नहीं रखी गई।
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बच्चों के साथ बरतें सतर्कता
रिटायर्ड प्रो. सुभाष सप्रा ने बताया कि बच्चाें के साथ माता-पिता को अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। अगर माता-पिता दोनों ही काम से बाहर जाते हैं तो बच्चों की सुरक्षा के लिए पहले से ही तैयारी करें। बच्चों की हाईट के अनुसार सभी बिजली के उपकरण को उनकी पहुंच से दूर रखें। बिजली के शॉकिट को उनके कवर से ढक कर रखें।
- काम के दौरान बच्चों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी लगाया जा सकता है। सीसीटीवी की सहायता से अपने मोबाइल से उन पर नजर रख सकते हैं।
- दरवाजे पर कुछ ऐसा सामान रख दें जिससे गेट पूरी तरह बंद न हो ताकि बच्चा चाहकर भी गेट बंद न कर सके। दरवाजे में लॉक थोड़ा ऊंचा लगवाएं ताकि उनकी पहुंच से दूर रहें।
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विराट त्यागी
गुरुग्राम। सवा पांच साल के मासूम की 22वीं मंजिल की बालकनी से गिरकर हुई मौत ने सभी सोसाइटी निवासियों को झकझोर दिया है। सब के मन में यही बात घूम रही है कि अगर रेलिंग की ऊंचाई थोड़ी ज्यादा होती तो शायद मासूम बच जाता। बच्चा करीब 20 मिनट तक फ्लैट में अकेले फंसा था। इससे वह काफी घबरा गया था।
सोसाइटी में 22वीं मंजिल में रहने वाले प्रकाश चंद्र और उनकी पत्नी शनिवार को अपने काम से बाहर गए थे। घरेलू सहायिका बच्चे को सोसाइटी से खिलाकर फ्लैट में लेकर ही पहुंची थीं कि मासूम तुरंत अंदर चला गया और गेट को बंद कर दिया। घरेलू सहायिका को अंदाजा नहीं था कि इसके बाद गेट खुल ही नहीं पाएगा। सोसाइटी में घर के मेन गेट अत्याधुनिक होते हैं ऐसे में मासूम गेट खोल ही नहीं सका और बालकनी में चला गया।
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मासूम का फ्लैट के अंदर जाना और उनका बालकनी से गिरने के दौरान करीब 20 मिनट का समय बीता था। इस दौरान घरेलू सहायिका गेट खुलवाने के लिए मुख्य दरवाजे पर ही मासूम को पुकारती रही। 22वीं मंजिल पर फ्लैट होने पर रेलिंग की भी ऊंचाई ज्यादा ही नहीं रखी गई।
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बच्चों के साथ बरतें सतर्कता
रिटायर्ड प्रो. सुभाष सप्रा ने बताया कि बच्चाें के साथ माता-पिता को अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत होती है। अगर माता-पिता दोनों ही काम से बाहर जाते हैं तो बच्चों की सुरक्षा के लिए पहले से ही तैयारी करें। बच्चों की हाईट के अनुसार सभी बिजली के उपकरण को उनकी पहुंच से दूर रखें। बिजली के शॉकिट को उनके कवर से ढक कर रखें।
- काम के दौरान बच्चों पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी लगाया जा सकता है। सीसीटीवी की सहायता से अपने मोबाइल से उन पर नजर रख सकते हैं।
- दरवाजे पर कुछ ऐसा सामान रख दें जिससे गेट पूरी तरह बंद न हो ताकि बच्चा चाहकर भी गेट बंद न कर सके। दरवाजे में लॉक थोड़ा ऊंचा लगवाएं ताकि उनकी पहुंच से दूर रहें।