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बीमार बना रही देर रात तक जागने की आदत
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नोएडा। प्रकृति ने रात सोने के लिए और दिन काम के लिए बनाया है, लेकिन बदलते दौर में बड़ी आबादी देर रात या सुबह होने तक जागती है और दिन में सोती है। अगर हम कुदरत को दरकिनार कर अपना अलग रास्ता बनाएंगे तो उसका अंजाम भुगतना ही होगा। अच्छी सेहत के लिए रात की नींद बेहद जरूरी है। बदलती जीवनशैली से बिगड़ रही सेहत पर दुनियाभर के फिजिशियन और बायोलॉजिस्ट मंथन करेंगे। इस बार एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडिया (एपीआई) का वार्षिक सम्मेलन सेक्टर-18 स्थित होटल रेडिसन में होने जा रहा है। एपीआई के संयुक्त सचिव एवं मेट्रो अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. एस चक्रवर्ती ने बताया कि सम्मेलन में दिल्ली-एनसीआर के अलावा देशभर से 250 विशेषज्ञ मौजूद रहेंगे। जबकि, यूके, अमेरिका, मिस्त्र, यूएई, मलेशिया, फ्रांस, जर्मनी, जापान समेत कई देशों के एक हजार से अधिक विशेषज्ञ वर्चुअल तरीके से हिस्सा लेंगे।
मैक्स अस्पताल की डॉ. मीनाक्षी ने बताया कि सम्मेलन का विषय क्रोनोमेडिसन है। क्रोनो का मतलब समय और मेडिसिन का मतलब दवा से है। दैनिक दिनचर्या जो कि प्राकृतिक घड़ी सूर्य और चंद्रमा के अनुसार क्रियान्वित थी, आज की कृत्रिम रोशनी और लगातार काम करने के साथ ही रात में जागने एवं देर रात भोजन करने की वजह से बाधित हो गई है। इसी वजह से आज लोग मेटाबोलिक, मधुमेह, रक्तचाप, मोटापा और कैंसर जैसी बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। इसके साथ ही सम्मेलन में कब क्या खाएं, कैसे खाएं, कैसे सोएं, कौन सी दवा किस समय ज्यादा असर करती है, बॉडी क्लॉक को कैसे समय पर रखा जाए। ऐसे सवालों के जवाब विशेषज्ञों द्वारा दिए जाएंगे।
कैलाश अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एके शुक्ला ने बताया कि बदलती जीवनशैली के कारण लोगों को कई तरह की बीमारियां हो रही हैं। रात को देर तक जागने से बच्चों का दिमागी विकास, बड़ों के काम करने की क्षमता प्रभावित हो रही है। रात में काम करने वाले तनाव, दिल और कैंसर जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीर गुप्ता ने बताया कि समय के साथ लोगों में बीमारियों का परिवर्तन हो रहा है। सुबह और रात को शारीरिक गतिविधियां बदलती हैं। मेडिकल साइंस ही नहीं बीमारियां और उनसे लड़ने का तरीका किस तरह बदल रहा है, यह जानने के लिए इस बार सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण साबित होगा।
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मैक्स अस्पताल की डॉ. मीनाक्षी ने बताया कि सम्मेलन का विषय क्रोनोमेडिसन है। क्रोनो का मतलब समय और मेडिसिन का मतलब दवा से है। दैनिक दिनचर्या जो कि प्राकृतिक घड़ी सूर्य और चंद्रमा के अनुसार क्रियान्वित थी, आज की कृत्रिम रोशनी और लगातार काम करने के साथ ही रात में जागने एवं देर रात भोजन करने की वजह से बाधित हो गई है। इसी वजह से आज लोग मेटाबोलिक, मधुमेह, रक्तचाप, मोटापा और कैंसर जैसी बीमारियों से पीड़ित हो रहे हैं। इसके साथ ही सम्मेलन में कब क्या खाएं, कैसे खाएं, कैसे सोएं, कौन सी दवा किस समय ज्यादा असर करती है, बॉडी क्लॉक को कैसे समय पर रखा जाए। ऐसे सवालों के जवाब विशेषज्ञों द्वारा दिए जाएंगे।
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कैलाश अस्पताल के वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. एके शुक्ला ने बताया कि बदलती जीवनशैली के कारण लोगों को कई तरह की बीमारियां हो रही हैं। रात को देर तक जागने से बच्चों का दिमागी विकास, बड़ों के काम करने की क्षमता प्रभावित हो रही है। रात में काम करने वाले तनाव, दिल और कैंसर जैसी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. समीर गुप्ता ने बताया कि समय के साथ लोगों में बीमारियों का परिवर्तन हो रहा है। सुबह और रात को शारीरिक गतिविधियां बदलती हैं। मेडिकल साइंस ही नहीं बीमारियां और उनसे लड़ने का तरीका किस तरह बदल रहा है, यह जानने के लिए इस बार सम्मेलन काफी महत्वपूर्ण साबित होगा।
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