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Noida News: देगची, कटोरा, हुक्का व जनाना कपड़े चोरी होने की हुई थी पहली एफआईआर

Sun, 23 Jul 2023 07:06 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 23 Jul 2023 07:06 PM IST
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The first FIR was lodged for the theft of kettle, bowl, hookah and Janana clothes
सब्जी मंडी थाने में 18 अक्तूबर, 1861 को दर्ज की गई थी प्राथमिकी
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2. 81 : रुपये थी चोरी हुए सामान की कीमत
30 : एफआईआर को वेबसाइट पर किया अपलोड
1861 : से वर्ष 1900 तक के हैं सभी मामले

पुरुषोत्तम वर्मा
नई दिल्ली। अंग्रेजों के शासनकाल में 18 अक्तूबर, 1861 को उत्तरी दिल्ली के सब्जी मंडी थाने में पहली एफआईआर उर्दू-फारसी भाषा में दर्ज हुई थी। दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार कटरा शीश महल निवासी मोइनुद्दीन वल्द मोहम्मद यार खान की शिकायत पर देगची-कटोरा व लोटा समेत आठ बर्तनों, हुक्का, कुल्फी और महिलाओं के वस्त्र चोरी की रिपोर्ट दर्ज की गई थी। चोरी हुए सामान की कुल कीमत 2. 81 रुपये थी।
दिल्ली पुलिस के पुराने रिकार्ड व एफआईआर की देखभाल करने वाले एसीपी राजेंद्र सिंह कलकल का कहना है कि इस बात के रिकार्ड नहीं मिले हैं कि इस एफआईआर का परिणाम व फैसला क्या हुआ। इसके अलावा दो आने की कीमत के संतरों और पैंतालीस आने के मूल्य का सामान चोरी होने की एफआईआर भी दर्ज की गईं थी। दिल्ली पुलिस ने इन पुरानी एफआईआर से लोगों, दिल्ली पुलिस अधिकारियों व कर्मियों को रूबरू कराने के लिए 1861 से लेकर 1900 से पहले की करीब 30 एफआईआर को अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया है।
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शुरूआत में दिल्ली में पांच थाने थे

अंग्रेजों ने 1861 में दिल्ली शहर और देहात में पांच थाने सब्जी मंडी, कोतवाली, सदर बाजार, महरौली ओर मुंडका (अब नांगलोई) में बनाए थे। पुलिस अधिनियम बनने के बाद दिल्ली में इन थानों को बनाया गया था। उस समय एफआईआर बहुत ही छोटी यानी संक्षिप्त रूप से लिखी जाती थी। आजकल एफआईआर कई पेज की होती है।
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एफआईआर को रजिस्टर रूजू-ए-मुकदमात कहा जाता था
दिल्ली पुलिस के रिकार्ड से पता लगा कि अंग्रेजोंं के समय एफआईआर या प्राथमिकी को उस समय रजिस्टर रूजू-ए-मुकदमात के नाम से जाना जाता था। एफआईआर में उर्दू-और फारसी की मिलीजुली भाषा का इस्तेमाल किया जाता था।

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कोतवाली थाने की पहली एफआईआर-

कोतवाली थाने की पहली एफआईआर 4 नवंबर, 1861 में दर्ज की गई थी। मोहम्मद अली वल्द शगीर अली बेग ने पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सुबह वह सोकर उठा तो देखा कि घर में सेंध लगी थी। उसके घर से 24 रुपये नकद और कुछ सामान गायब था। पुलिस ने इस संबंध में नकबजनी यानी सेंधमारी का मामला दर्ज किया था।

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दुकान में सेंधमारी-

कोतवाली थाने में दूसरी एफआईआर 8 नवंबर, 1861 को दर्ज की गर्ई। दरीबा खुर्द के एक दुकानदार मोती मल सुपुत्र दौलतराम ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि सुबह मैंने देखा कि दुकान में पड़ोसी अमजद अली की दुकान की तरफ से सेंध लगाई गई है,लेकिन दुकान से कोई सामान चोरी नहीं हुआ है। मोती मल ने इस मामले में अमजद अली के नौकर पर संदेह जताया था।

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सब्जी मंडी थाने में दो आने केे संतरे चोरी होने की हुई थी पहली एफआईआर

सब्जी मंडी थाने में दो आने की कीमत के 11 संतरे चोरी होने की पहली एफआईआर 16 फरवरी, 1891 को हुई थी। इस एफआईआर के शिकायतकर्ता राम प्रसाद ने 11 संतरे चोरी करने वाले रामबक्श सुपुत्र अल्लाह बक्श को रंगेहाथों पकड़ लिया था। इसके बाद उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया। मुकदमा चला। अदालत ने 23 दिसंबर,1891 को रामबक्श को एक महीना कैद की सजा सुनाई थी। इसी तरह एक खच्चर/टट्टू चोरी होने का मामला 30 अप्रैल, 1895 को दर्ज हुआ था। शिकायकर्ता ने अपने पुराने नौकर पर संदेह जताया था। इस मामले को पुलिस सुलझा नहीं पाई थी।



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कुरान शरीफ चोरी होने की प्राथमिकी-



महरौली थाने में अल्लादिया ने 23 जून, 1899 में गुट्टू के खिलाफ कुरान शरीफ चोरी करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। अल्लादिया ने शिकायत में कहा था कि गुट्टू मस्जिद में आया और अजमेर शरीफ जाने के लिए मदद मांगी। उसने चंदा एकत्र कर उसे दिया, खाना खिलाया और रात को मस्जिद में ठहराया। गुट्टू सुबह कुरान शरीफ चोरी करके ले गया। सिपाही अब्दुल करीम ने एक दुकान पर गुट्टू को पकड़ लिया। अदालत ने उसे एक सप्ताह की कैद की सजा सुनाई।



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शिकस्ता लिपि में दर्ज की जाती थी एफआईआर



दिल्ली पुलिस ने पिछले महीने अपने रिकॉर्ड दिल्ली पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड किए है। दिल्ली पुलिस के इन पुराने रिकॉर्ड्स में इसी तरह के 30 मामलों की जानकारी मिलती है। इन मामलों को दिल्ली के पांच प्रमुख पुलिस थाने सब्ज़ी मंडी, महरौली, कोतवाली, सदर बाजार और नांगलोई में 1861 से 1900 के शुरुआती वर्षों में दर्ज किया गया था। ये शिकायत मूल रूप में उर्दू की बेहद कठिन कही जाने वाली शिकस्ता लिपि में दर्ज की गई थी। इसमें अरबी और फ़ारसी के शब्द भी इस्तेमाल किए गए थे।



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पुराने दस्तावेज मानो बात करते हैं- एसीपी कलकल



इन सभी एफ़आईआर को दिल्ली पुलिस के एसीपी राजेंद्र सिंह कलकल की अगुवाई वाली एक टीम ने अनुवाद करके जमा किया है। राजेंद्र सिंह ख़ुद हर एक मामले की तफ्सील में बयान करते हैं। राजेंद्र सिंह कलकल का कहना है कि ऐसा लगता है कि पुलिस के ये दस्तावेज मानो उनसे ''बातें करते है, क्योंकि इनमें दिल्ली के उस दौर के लोगों की जिंदगी की दिलचस्प झलकियां देखने को मिलती हैं’।



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एक थाली की चोरी-

महरौली थाने में मात्र एक थाली की चोरी होने की भी एफआईआर हु़ई थी। ये एफआईआर २९ सितंबर, १८७३ को हुई थी। मुई नन्हें वल्द शौंंभू भान हलवाई ने मुलजिम कुलू वल्द मायका माली पर आरोप लगाया था कि उसने उसकी एक थाली चुरा ली है। इस थाली की कीमत एक रुपया है। मुर्ई ने मुलजिम को मय थाली पकड़कर थाने में पेश किया। इस मामले में कुलू को एक महीने के कठोर कारावास की सजा हुई।

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रजाई और एक जूता चोरी का भी मामला दर्ज हुआ था-

सब्जी मंडी थाने में रजाई और एक जूता चोरी होने का मामला 11 दिसंबर, 1899 को दर्ज हुआ था। पचेतराम पुत्र दर्शन(45) ने हाजिर थाना आकर बयान किया कि उसे जेमत साहब बहादुरने बोरियों की सुरक्षा के लिए लगाया था। कल रात जब वह इन बोरियों पर सो रहा था तो एक शख्स आकर उसकी रजाई को खींचने लगा। उसने रजाई नहीं छोड़ी। उस समय तो वह शख्स वहां से चला गया, मगर बाद में वह अपने कुछ आदमी लेकर मौके पर आया और उसके साथ मार-पीटाई की। उसके बाद वह रजाई और उसका एक जूता छीन कर भाग गए। ये मामला अनसुलझा रहा। पुलिस आरोपियों को पकड़ नहीं सकी।

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एक रुपये के पेड़ की चोरी-

अलीपुर थाने में मात्र एक पेड़ चोरी होने का मामला 1 अक्तूबर, 1899 को दर्ज हुआ था। मुलजिम टोरी वल्द सौंडू चौहान ने एक रुपये का पेड़ (कीकर) सरकारी सड़क से काट कर अपने खेत में छुपा लिया। इस पेड़ को इकराम अली नंबरदार की निशानदेही पर बरामद किया गया। इस मामले में टोरी पर 5 रुपये का जुर्माना हुआ था।


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4 आने के 104 कबूतर चोरी-

नांगलोई थाने में 24 जनवरी, 1895 को चार आने के 104 कबूतर चोरी होने का मामला दर्ज हुआ था। रामचंदर वल्द मनोहर लाल ने शिकायत दर्ज कराई कि दो आदमियों ने उसके घर से 104 कबूतर चुरा लिए है। उसे शक है कि इस चोरी के पीछे उसके पुराने नौकर कुतुबुदीन का हाथ है। उसे उसके घर के बारे में सब पता है।
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एक पूली बाजरा चोरी-
मात्र बाजरे की एक पूली(पूरी) चोरी का भी मामला दर्ज हुआ था। ये मामला 7 सितंबर, 1895 में महरौली थाने में दर्ज हुआ था। लाल चंद वल्द मालसिंह गुर्जर शिकायत दर्ज कराई कि हीरा सिंह उसके खेत से एक पूली बाजरा उठा कर भाग रहा था। उसे बाद में चौकीदार की मदद से पकड़ लिया। इस पूरी की कीमत चार आना थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान मुलजिम को बरी कर दिया गया।

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पुरुषोत्तम वर्मा
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