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कोटला झील से बदलेगी किसानों की तकदीर
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पुन्हाना। नूंह जिला में करीब 90 फीसदी लोगों की आजीविका कृषि, पशुपालन पर आधारित है। क्षेत्र में कम बरसात और पर्याप्त नहरी पानी की सुविधा न होने की वजह से जमीन का पानी लेवल 100 से 600 फीट से ज्यादा गहरा चला गया है। ऐसे में मेवात के किसानों की कोटला झील को विकसित करने की दो दशकों से मांग की जा रही है। कोटला झील में करीब पांच हजार एकड़ जमीन में बरसाती पानी भर जाने से हर साल उसमें बिजाई नहीं होने से किसानों को काफी नुकसान हो जाता है। राज्यपाल के दौरा से कोटला झील के विकसित होने की उम्मीदें बंध गई है।
पूर्व की कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2013 में करीब 500 एकड़ जमीन अधिग्रहण कर कोटला झील को विकसित करने की योजना बनाई थी। पहले फेस में 108 एकड़ जमीन अधिग्रहण कर करीब 81 करोड़ कर राशि भी जारी कर दी थी। प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद यह मामला खटाई में पड़ गया। हाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने महूं चौपडा की एक जनसभा में कोटला झील को 100 की जगह 250 एकड़ जमीन में विकसित करने की घोषणा थी। सोमवार को राज्यपाल द्वारा कोटला झील का दौरान करने से किसानों की उम्मीदें बढ़ गई है। कोटला झील में बरसाती पानी इकट्ठा कर जरूरत पड़ने पर उसे नूंह जिला के खेतों की सिंचाई को इस्तेमाल किया जा सकेगा।
पूर्व विधायक हबीबुर्रहमान का कहना है कि उसने अपने कार्यकाल 2005 में कोटला झील को विकसित करने की योजना बनाई थी। उनका कहना है कि मेवात की नहरों से बरसात के समय काफी पानी बेकार में यमुना नदी में चला जाता है। कोटला झील की खुदाई कर जरूरत पड़ने पर नूंह जिला की छोटी-बडी नहरों के माध्यम से पंपों के जरिए सिंचाई में इस्तेमाल करना था।
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कांग्रेस विधायक आफताब अहमद का कहना है कि उनकी सरकार ने कोटला झील को विकसित करने के लिए 108 एकड़ जमीन अधिग्रहण कर 81 करोड़ रुपये की 2013 में राशि जारी की थी लेकिन जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है उसने इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। इस झील के विकसित होने से नूंह जिला के किसानों को काफी फायदा होगा।
भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष सुरेंद्र देशवाल का कहना है कि कोटला झील के विकसित करने की मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने फरवरी 2015 में घोषणा कर करीब 80 करोड़ रुपये की राशि जारी की थी। कांग्रेस के लोगों ने अपने आदमियों से इसपर कोर्ट में स्टे लगवाकर रूकवाकर रखा है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्र ने अब इस झील को 250 एक में बनाने की घोषणा की है। यहां पर पर्यटन स्थल बनेगा जिससे काफी फायदा होगा और लोगों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।
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पूर्व की कांग्रेस सरकार ने वर्ष 2013 में करीब 500 एकड़ जमीन अधिग्रहण कर कोटला झील को विकसित करने की योजना बनाई थी। पहले फेस में 108 एकड़ जमीन अधिग्रहण कर करीब 81 करोड़ कर राशि भी जारी कर दी थी। प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद यह मामला खटाई में पड़ गया। हाल में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने महूं चौपडा की एक जनसभा में कोटला झील को 100 की जगह 250 एकड़ जमीन में विकसित करने की घोषणा थी। सोमवार को राज्यपाल द्वारा कोटला झील का दौरान करने से किसानों की उम्मीदें बढ़ गई है। कोटला झील में बरसाती पानी इकट्ठा कर जरूरत पड़ने पर उसे नूंह जिला के खेतों की सिंचाई को इस्तेमाल किया जा सकेगा।
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पूर्व विधायक हबीबुर्रहमान का कहना है कि उसने अपने कार्यकाल 2005 में कोटला झील को विकसित करने की योजना बनाई थी। उनका कहना है कि मेवात की नहरों से बरसात के समय काफी पानी बेकार में यमुना नदी में चला जाता है। कोटला झील की खुदाई कर जरूरत पड़ने पर नूंह जिला की छोटी-बडी नहरों के माध्यम से पंपों के जरिए सिंचाई में इस्तेमाल करना था।
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कांग्रेस विधायक आफताब अहमद का कहना है कि उनकी सरकार ने कोटला झील को विकसित करने के लिए 108 एकड़ जमीन अधिग्रहण कर 81 करोड़ रुपये की 2013 में राशि जारी की थी लेकिन जब से भाजपा सरकार सत्ता में आई है उसने इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया था। इस झील के विकसित होने से नूंह जिला के किसानों को काफी फायदा होगा।
भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष सुरेंद्र देशवाल का कहना है कि कोटला झील के विकसित करने की मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने फरवरी 2015 में घोषणा कर करीब 80 करोड़ रुपये की राशि जारी की थी। कांग्रेस के लोगों ने अपने आदमियों से इसपर कोर्ट में स्टे लगवाकर रूकवाकर रखा है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्र ने अब इस झील को 250 एक में बनाने की घोषणा की है। यहां पर पर्यटन स्थल बनेगा जिससे काफी फायदा होगा और लोगों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा।