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Noida News: महापंचायत में होगा बाउंसरों से कराए गए हमले का निर्णय
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महापंचायत में होगा बाउंसरों से कराए गए हमले का निर्णय
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अंसल बिल्डर के खिलाफ 10 साल से चल रहे आंदोलन को लेकर किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी वह आंदोलन जारी रखेंगे। बिल्डर की ओर से बाउंसरों को भेजकर किसानों पर जो हमला किया गया है उसके खिलाफ एक दिसंबर को होने वाली महापंचायत में निर्णय लिया जाएगा।
दरअसल, अंसल बिल्डर की ओर से साल-2007 से जमीन खरीदना शुरू किया था और बाद में किसानों ने मुआवजा समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया था। इस वजह से बिल्डर का काम अधर में लटक गया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब कुछ दिन पहले ही अंसल से कुछ हिस्सा सर्वोत्तम बिल्डर ने लेकर विकसित करना शुरू किया था। मगर किसानों ने बिल्डर का काम रुकवाकर फिर से धरना शुरू कर दिया और कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होंगी काम नहीं चलने दिया जाएगा।
बिल्डर के प्रतिनिधियों-बाउंसरों के खिलाफ दी तहरीर
बोड़ाकी के किसान संजय भाटी और रामगढ़ के किसान वीरसिंह की ओर से दादरी कोतवाली में तहरीर देकर सर्वोत्तम बिल्डर के कुछ प्रतिनिधियों और बाउंसरों के खिलाफ तहरीर दी है। इसमें फायरिंग करते हुए जानलेवा हमले और मारपीट समेत अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने की पुलिस से गुहार लगाई है।
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साल-2013 के समझौते को लेकर अड़े हैं किसान
10 साल पहले किसानों का जब आंदोलन उग्र था और लंब समय से धरना-प्रदर्शन करते चले आ रहे थे तो तत्कालीन जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं बिल्डर प्रतिनिधियों के साथ वार्ता हुई थी। उसमें किसानों को 10 फीसदी भूखंड, 64 फीसदी मुआजवा, युवाओं को रोजगार, भूमिहीनों को भूखंड आदि मांग रखी गई थी। उस समय यह समझौता हुआ था और उसके बाद ही धरना हटाया गया था।
क्या है किसानों की मांगें
-किसानों को ग्रेनो प्राधिकरण की तर्ज पर अतिरिक्त मुआवजा
-अंसल प्रभावित किसानों को ग्रेनो की तर्ज पर 10 फीसदी भूखंड
-किसान परिवारों के बेरोजगार युवाओं को योग्यतानुसार रोजगार
-भूमिहीनों को 120 वर्गमीटर का भूखंड देने की मांग
-प्रभावित गांवों में नाली-खड़ंजे से लेकर स्वास्थ्य सेवाएं समेत पूर्ण विकास
-एक जनवरी 2014 के बाद नए अधिग्रहण नियम से किसानों को लाभ दिया जाए
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अंसल बिल्डर के खिलाफ 10 साल से चल रहे आंदोलन को लेकर किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। किसानों का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होगी वह आंदोलन जारी रखेंगे। बिल्डर की ओर से बाउंसरों को भेजकर किसानों पर जो हमला किया गया है उसके खिलाफ एक दिसंबर को होने वाली महापंचायत में निर्णय लिया जाएगा।
दरअसल, अंसल बिल्डर की ओर से साल-2007 से जमीन खरीदना शुरू किया था और बाद में किसानों ने मुआवजा समेत अन्य मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया था। इस वजह से बिल्डर का काम अधर में लटक गया और मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब कुछ दिन पहले ही अंसल से कुछ हिस्सा सर्वोत्तम बिल्डर ने लेकर विकसित करना शुरू किया था। मगर किसानों ने बिल्डर का काम रुकवाकर फिर से धरना शुरू कर दिया और कहा कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होंगी काम नहीं चलने दिया जाएगा।
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बिल्डर के प्रतिनिधियों-बाउंसरों के खिलाफ दी तहरीर
बोड़ाकी के किसान संजय भाटी और रामगढ़ के किसान वीरसिंह की ओर से दादरी कोतवाली में तहरीर देकर सर्वोत्तम बिल्डर के कुछ प्रतिनिधियों और बाउंसरों के खिलाफ तहरीर दी है। इसमें फायरिंग करते हुए जानलेवा हमले और मारपीट समेत अन्य धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज करने की पुलिस से गुहार लगाई है।
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साल-2013 के समझौते को लेकर अड़े हैं किसान
10 साल पहले किसानों का जब आंदोलन उग्र था और लंब समय से धरना-प्रदर्शन करते चले आ रहे थे तो तत्कालीन जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं बिल्डर प्रतिनिधियों के साथ वार्ता हुई थी। उसमें किसानों को 10 फीसदी भूखंड, 64 फीसदी मुआजवा, युवाओं को रोजगार, भूमिहीनों को भूखंड आदि मांग रखी गई थी। उस समय यह समझौता हुआ था और उसके बाद ही धरना हटाया गया था।
क्या है किसानों की मांगें
-किसानों को ग्रेनो प्राधिकरण की तर्ज पर अतिरिक्त मुआवजा
-अंसल प्रभावित किसानों को ग्रेनो की तर्ज पर 10 फीसदी भूखंड
-किसान परिवारों के बेरोजगार युवाओं को योग्यतानुसार रोजगार
-भूमिहीनों को 120 वर्गमीटर का भूखंड देने की मांग
-प्रभावित गांवों में नाली-खड़ंजे से लेकर स्वास्थ्य सेवाएं समेत पूर्ण विकास
-एक जनवरी 2014 के बाद नए अधिग्रहण नियम से किसानों को लाभ दिया जाए