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Noida: शिक्षिकाओं ने मांगा वेतन तो स्कूल ने थमा दिया निष्कासन पत्र, पढ़ाना छोड़ प्रदर्शन कर रहीं मैडम

Mon, 02 Jun 2025 07:49 PM IST
विकास कुमार माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा Published by: विकास कुमार Updated Mon, 02 Jun 2025 07:49 PM IST
सार


शिक्षिकाओं का आरोप है कि स्कूल की ओर से कहा गया था कि स्कूल पर नोएडा प्राधिकरण का करोड़ों रुपये बकाया है, इसलिए स्कूल प्राधिकरण में पैसे जमा करने के नाम पर शिक्षिकाओं के वेतन से नगद पैसे लिए जाते थे। लेकिन यह पैसे कभी प्राधिकरण में जमा नहीं कराए गए। 

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Teachers protest outside Uttarakhand Public School allegation given expulsion letter for demanding salary
प्रदर्शन करतीं शिक्षिकाएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नोएडा सेक्टर-56 स्थित उत्तराखंड पब्लिक स्कूल की नौ से ज्यादा शिक्षिकाओं ने निष्कासन पत्र वापस लेने, कैश में वापस लिए जा रहे वेतन को लौटाने और उत्तराखंड जन कल्याण परिषद के निष्पक्ष तरीके से चुनाव कराने की मांग को लेकर सोमवार को स्कूल के बाहर धरना प्रदर्शन किया। यह धरना प्रदर्शन सुबह 8:30 बजे से लेकर दोपहर 12:30 बजे तक चार दिन तक चलेगा।

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शिक्षिकाओं का आरोप है कि स्कूल की ओर से कहा गया था कि स्कूल पर नोएडा प्राधिकरण का करोड़ों रुपये बकाया है, इसलिए स्कूल प्राधिकरण में पैसे जमा करने के नाम पर शिक्षिकाओं के वेतन से नगद पैसे लिए जाते थे। लेकिन यह पैसे कभी प्राधिकरण में जमा नहीं कराए गए। इसका अंदाजा तब हुआ जब स्कूल ने एक कागज पर हस्ताक्षर करने को कहा, जिसमें लिखा था कि शिक्षिकाओं ने कैश में वेतन नहीं लौटाया है। जब शिक्षिकाओं ने इसका विरोध किया तो स्कूल से निकालने की धमकी दी जाने लगी। इसको लेकर अक्टूबर 2024 में शिक्षिकाओं ने शिकायत दर्ज कराई थी।

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उसी आधार पर जिलाधिकारी ने सिटी मैजिस्ट्रेट, डिप्टी रजिस्ट्रार और जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की थी। शिक्षिकाओं ने जांच समिति को सभी सबूत उपलब्ध कराए। इसको लेकर तीन बार मीटिंग भी हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकला है।

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जांच समिति की पहली मीटिंग के दौरान साफ कहा गया था कि शिक्षिकाओं को स्कूल से नहीं निकाला जाएगा। फिर भी विरोध करने वाली 11 शिक्षिकाओं को निष्कासित कर दिया गया। कुछ शिक्षिकाओं को जबरदस्ती स्कूल छोड़ने पर मजबूर किया गया। इसको लेकर कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मजबूरी में हमें धरने पर बैठना पड़ा। यह धरना तीन दिन तक चलेगा। हमारी मांग है कि अध्यक्ष और प्रिंसिपल को भी हटाया जाए।

स्कूल मैनेजमेंट ने सोच समझकर यह कदम उठाया है। इसके लिए डिस्पेंसरी कमेटी बैठी है पूरी जांच के बाद यह निर्णय लिया गया। -मोहिनी नेगी, प्रिंसिपल, उत्तराखंड पब्लिक स्कूल

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