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Noida News: गौरव भाटिया पर हमले पर सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा बार एसोसिएशन को नोटिस भेजा
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सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा बार एसोसिएशन को नोटिस भेजा
- सूरजपुर कोर्ट में भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया और महिला वकील के साथ दुर्व्यवहार का लिया स्वत: संज्ञान
- उच्चतम न्यायालय की पीठ ने कहा, बार एसोसिएशन की हड़तों को नहीं दी जा सकती स्वीकृति
माई सिटी रिपोर्टर
नई दिल्ली/नोएडा। सुप्रीम कोर्ट ने सूरजपुर की अदालत में भाजपा प्रवक्ता व वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया और वकील मुस्कान गुप्ता पर हमले का स्वत: संज्ञान लेकर ग्रेटर नोएडा बार एसोसिएशन को नोटिस भेजा है। गौरव भाटिया के साथ बुधवार को सूरजपुर जनपद न्यायालय में अभद्रता का मामला सामने आया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि अदालतों में वकीलों के प्रवेश को इस तरह से नहीं रोका जा सकता है। पीठ ने कहा कि बार एसोसिएशन की हड़तालों को स्वीकृति नहीं दी जा सकती।
बुधवार को नोएडा की जिला अदालत में गौरव भाटिया व मुस्कान गुप्ता पर हमला किया गया था। इस हमले में गौतमबुद्घ नगर के अधिवक्ताओं को जिम्मेदार बताया गया था। इस मामले में बृहस्पतिवार को भारत सरकार के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, वरिष्ठ वकील विकास सिंह, केके वेणुगोपाल और जयंत भूषण ने सूरजपुर कोर्ट में हुए अभद्रता की सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी। विकास सिंह ने अदालत के सामने संविधान पीठ के उस फैसले का उल्लेख भी किया, जिसमें कहा गया है कि वकीलों को अदालतों में प्रवेश करने से नहीं रोका जा सकता है।
वहीं, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने भी कोर्ट को सूचित किया है कि घटना का संज्ञान लिया गया है। मामले में ग्रेटर नोएडा व गाजियाबाद बार एसोसिएशन को नोटिस जारी किया है। पीठ ने कहा कई फैसलों में बार एसोसिएशनों की हड़तालों की निंदा की गई है। बार के सदस्यों की हड़ताल उन वादियों को प्रभावित करती है, जो न्याय प्रणाली के अहम हितधारक हैं। इस स्तर पर कोई कारण नहीं है कि इस अदालत के सामने जो मामला और सामग्री है उसे स्वीकारते हुए विचार नहीं करे। यह इस अदालत की तरफ से निर्धारित बाध्यकारी सिद्धांतों का उल्लंघन है। बुधवार को हुई यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया और बृहस्पतिवार को यह मामला सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया।
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ये दिल्ली से हैं कहते हुए दिया गया धक्का
गौरव भाटिया के साथ सूरजपुर कोर्ट जाने वाली वकील मुस्कान गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह गौरव के साथ सूरजपुर कोर्ट में प्रवेश कर रहे थे, तभी अचानक कुछ लोगों ने उन्हें यह कहते हुए घेर लिया कि ये दिल्ली से हैं। इसके बाद बैंड छीन लिया और धक्का दिया, जिससे उनका सिर अलमारी से टकराया।
घटना के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सूजपुर के जिला न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि वे घटना के सीसीटीवी फुटेज को अगले आदेश तक सुरक्षित रखें। इसके साथ ही कहा कि जिला न्यायाधीश व उनके स्टाफ से भी एक रिपोर्ट ली जाएगी, जिसे इस मामले में रजिस्ट्रार के सामने रखा जाएगा। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा है।
कॉलर बैंड उतारने को लेकर शुरू हुआ था विवाद
सूरजपुर अदालत में वकील बुधवार को हड़ताल पर थे। इसी दौरान वकीलों को सूचना मिली कि कुछ अधिवक्ता कॉलर बांधकर काम कर रहे हैं। एक अदालत में गौरव भाटिया भी पहुंचे थे। स्थानीय अधिवक्ताओं ने उन्हें हड़ताल की जानकारी देते हुए इसका कारण भी बताया। इस दौरान अदालत में मौजूद जनपद के अधिवक्ताओं ने कॉलर बैंड उतार दिया, लेकिन दिल्ली के अधिवक्ता की ओर से ऐसा नहीं किया गया। स्थानीय कुछ अधिवक्ताओं ने उनसे कॉलरबैंड उतारने के लिए कहा। मगर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और भाजपा नेता ने कॉलर बैंड नहीं उतारा। इस पर एक स्थानीय अधिवक्ता ने कॉलर बैंड खींचकर उतार दिया। इसके बाद विवाद बढ़ गया था।
एल्विश यादव की पैरवी को लेकर फैली अफवाह
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता जब बुधवार को सूरजपुर कोर्ट पहुंचे तो स्थानीय अधिवक्ताओं को लगा कि एल्विश यादव मामले में वह वकील हैं और वह इसलिए हड़ताल में काम करने पर जोर दे रहे हैं। इस कारण यह अफवाह वकीलों के बीच फैल गई। हालांकि धक्का-मुक्की के बाद तस्वीर साफ हुई। बता दें कि रेव पार्टी में सांपों के जहर सप्लाई करने के मामले में एल्विश यादव जेल में बंद है।
सर्वोच्च अदालत में बार एसोसिएशन दाखिल करेगी जवाब
- एक अप्रैल को अध्यक्ष और सचिव सुप्रीम कोर्ट में होंगे पेश
ग्रेटर नोएडा। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान के बाद नोटिस की जानकारी होने पर बार एसोसिएशन ने सर्वोच्च अदालत के सम्मान में एक अप्रैल को जवाब देने तैयारी कर ली है। सर्वोच्च अदालत के हस्तक्षेप के बाद स्थानीय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव ने स्वयं कोर्ट के समक्ष पेश होने की बात कही है। वहीं, बृहस्पतिवार को दिनभर अदालत परिसर में इस प्रकरण को लेकर गहमा-गहमी और चर्चाओं का दौर जारी रहा। एसोसिएशन की ओर से कहा गया कि अधिवक्ता ने गौरव भाटिया के साथ अभद्रता नहीं की, बल्कि भीड़ में किसी का बैंड उतर गया। इस बात की जानकारी मिलने पर बार एसोसिएशन की ओर से खेद व्यक्त कर दिया गया था। बार अध्यक्ष उमेश भाटी के मुताबिक महिला अधिवक्ता के साथ किसी तरह की कोई अभद्रता नहीं हुई है। इस प्रकरण की जांच करने के दौरान कोई ऐसा तथ्य सामने नहीं आया है।
बार एसोसिएशन की ओर से महिला अधिवक्ता के साथ हुई अभद्रता के आरोपों की जांच में पता चला कि जिस अदालत में घटना होने की बात कही जा रही है। उस अदालत में बुधवार को अवकाश था। - धीरेंद्र भाटी, सचिव बार एसोसिएशन
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सुप्रीम कोर्ट ने ग्रेटर नोएडा बार एसोसिएशन को नोटिस भेजा
- सूरजपुर कोर्ट में भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया और महिला वकील के साथ दुर्व्यवहार का लिया स्वत: संज्ञान
- उच्चतम न्यायालय की पीठ ने कहा, बार एसोसिएशन की हड़तों को नहीं दी जा सकती स्वीकृति
माई सिटी रिपोर्टर
नई दिल्ली/नोएडा। सुप्रीम कोर्ट ने सूरजपुर की अदालत में भाजपा प्रवक्ता व वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया और वकील मुस्कान गुप्ता पर हमले का स्वत: संज्ञान लेकर ग्रेटर नोएडा बार एसोसिएशन को नोटिस भेजा है। गौरव भाटिया के साथ बुधवार को सूरजपुर जनपद न्यायालय में अभद्रता का मामला सामने आया था। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि अदालतों में वकीलों के प्रवेश को इस तरह से नहीं रोका जा सकता है। पीठ ने कहा कि बार एसोसिएशन की हड़तालों को स्वीकृति नहीं दी जा सकती।
बुधवार को नोएडा की जिला अदालत में गौरव भाटिया व मुस्कान गुप्ता पर हमला किया गया था। इस हमले में गौतमबुद्घ नगर के अधिवक्ताओं को जिम्मेदार बताया गया था। इस मामले में बृहस्पतिवार को भारत सरकार के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी, वरिष्ठ वकील विकास सिंह, केके वेणुगोपाल और जयंत भूषण ने सूरजपुर कोर्ट में हुए अभद्रता की सुप्रीम कोर्ट को जानकारी दी। विकास सिंह ने अदालत के सामने संविधान पीठ के उस फैसले का उल्लेख भी किया, जिसमें कहा गया है कि वकीलों को अदालतों में प्रवेश करने से नहीं रोका जा सकता है।
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वहीं, बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने भी कोर्ट को सूचित किया है कि घटना का संज्ञान लिया गया है। मामले में ग्रेटर नोएडा व गाजियाबाद बार एसोसिएशन को नोटिस जारी किया है। पीठ ने कहा कई फैसलों में बार एसोसिएशनों की हड़तालों की निंदा की गई है। बार के सदस्यों की हड़ताल उन वादियों को प्रभावित करती है, जो न्याय प्रणाली के अहम हितधारक हैं। इस स्तर पर कोई कारण नहीं है कि इस अदालत के सामने जो मामला और सामग्री है उसे स्वीकारते हुए विचार नहीं करे। यह इस अदालत की तरफ से निर्धारित बाध्यकारी सिद्धांतों का उल्लंघन है। बुधवार को हुई यह घटना सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया और बृहस्पतिवार को यह मामला सर्वोच्च अदालत तक पहुंच गया।
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ये दिल्ली से हैं कहते हुए दिया गया धक्का
गौरव भाटिया के साथ सूरजपुर कोर्ट जाने वाली वकील मुस्कान गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में पूरी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह गौरव के साथ सूरजपुर कोर्ट में प्रवेश कर रहे थे, तभी अचानक कुछ लोगों ने उन्हें यह कहते हुए घेर लिया कि ये दिल्ली से हैं। इसके बाद बैंड छीन लिया और धक्का दिया, जिससे उनका सिर अलमारी से टकराया।
घटना के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने सूजपुर के जिला न्यायाधीश को निर्देश दिया है कि वे घटना के सीसीटीवी फुटेज को अगले आदेश तक सुरक्षित रखें। इसके साथ ही कहा कि जिला न्यायाधीश व उनके स्टाफ से भी एक रिपोर्ट ली जाएगी, जिसे इस मामले में रजिस्ट्रार के सामने रखा जाएगा। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए कहा है।
कॉलर बैंड उतारने को लेकर शुरू हुआ था विवाद
सूरजपुर अदालत में वकील बुधवार को हड़ताल पर थे। इसी दौरान वकीलों को सूचना मिली कि कुछ अधिवक्ता कॉलर बांधकर काम कर रहे हैं। एक अदालत में गौरव भाटिया भी पहुंचे थे। स्थानीय अधिवक्ताओं ने उन्हें हड़ताल की जानकारी देते हुए इसका कारण भी बताया। इस दौरान अदालत में मौजूद जनपद के अधिवक्ताओं ने कॉलर बैंड उतार दिया, लेकिन दिल्ली के अधिवक्ता की ओर से ऐसा नहीं किया गया। स्थानीय कुछ अधिवक्ताओं ने उनसे कॉलरबैंड उतारने के लिए कहा। मगर सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और भाजपा नेता ने कॉलर बैंड नहीं उतारा। इस पर एक स्थानीय अधिवक्ता ने कॉलर बैंड खींचकर उतार दिया। इसके बाद विवाद बढ़ गया था।
एल्विश यादव की पैरवी को लेकर फैली अफवाह
सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता जब बुधवार को सूरजपुर कोर्ट पहुंचे तो स्थानीय अधिवक्ताओं को लगा कि एल्विश यादव मामले में वह वकील हैं और वह इसलिए हड़ताल में काम करने पर जोर दे रहे हैं। इस कारण यह अफवाह वकीलों के बीच फैल गई। हालांकि धक्का-मुक्की के बाद तस्वीर साफ हुई। बता दें कि रेव पार्टी में सांपों के जहर सप्लाई करने के मामले में एल्विश यादव जेल में बंद है।
सर्वोच्च अदालत में बार एसोसिएशन दाखिल करेगी जवाब
- एक अप्रैल को अध्यक्ष और सचिव सुप्रीम कोर्ट में होंगे पेश
ग्रेटर नोएडा। सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता और भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के स्वत: संज्ञान के बाद नोटिस की जानकारी होने पर बार एसोसिएशन ने सर्वोच्च अदालत के सम्मान में एक अप्रैल को जवाब देने तैयारी कर ली है। सर्वोच्च अदालत के हस्तक्षेप के बाद स्थानीय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव ने स्वयं कोर्ट के समक्ष पेश होने की बात कही है। वहीं, बृहस्पतिवार को दिनभर अदालत परिसर में इस प्रकरण को लेकर गहमा-गहमी और चर्चाओं का दौर जारी रहा। एसोसिएशन की ओर से कहा गया कि अधिवक्ता ने गौरव भाटिया के साथ अभद्रता नहीं की, बल्कि भीड़ में किसी का बैंड उतर गया। इस बात की जानकारी मिलने पर बार एसोसिएशन की ओर से खेद व्यक्त कर दिया गया था। बार अध्यक्ष उमेश भाटी के मुताबिक महिला अधिवक्ता के साथ किसी तरह की कोई अभद्रता नहीं हुई है। इस प्रकरण की जांच करने के दौरान कोई ऐसा तथ्य सामने नहीं आया है।
बार एसोसिएशन की ओर से महिला अधिवक्ता के साथ हुई अभद्रता के आरोपों की जांच में पता चला कि जिस अदालत में घटना होने की बात कही जा रही है। उस अदालत में बुधवार को अवकाश था। - धीरेंद्र भाटी, सचिव बार एसोसिएशन