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सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट मामला : कड़ियां जोड़ने में जुटी एसआईटी
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सुपरटेक एमराल्ड कोर्ट मामला : कड़ियां जोड़ने में जुटी एसआईटी
नोएडा। सुपरटेक के एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट मामले में शासन की ओर से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की टीम दूसरे दिन भी जांच के दौरान गड़बड़झाले की परत दर परत कड़ियां जोड़ने में लगी रही। चार सदस्यीय टीम का गहमागहमी के बीच प्राधिकरण के अधिकारियों ने जांच में सहयोग किया। शासन की ओर से सात दिनों में रिपोर्ट देने का आदेश है। इसकी समयसीमा बृहस्पतिवार को समाप्त होगी।
सूत्रों के मुताबिक, आवंटन से लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तक तीन श्रेणियों में जांच की जा रही है। इसमें 2004 से लेकर 2009 के दौरान आवंटन से लेकर पहले संशोधित प्लान, 2009 से लेकर 2012 तक के दूसरे व तीसरे संशोधित प्लान में नक्शा पास करने और 2014 से लेकर 2021 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक की अवधि में प्राधिकरण की गतिविधियों की जांच की जा रही है। एसआईटी की ओर से इसमें यह देखा जा रहा है कि कहां-कहां नियमों के उल्लंघन के मामले में कड़ियां जुड़ रही हैं यानी कुछ खास समयावधि में किसी तरह के नियमों का उल्लंघन किया गया है या फिर शुरू से ही नियमों को ताक पर रखकर इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी गई थी।
एसआईटी जांच करने के लिए दूसरे दिन पहुंचे अधिकारियों में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त के साथ-साथ प्राधिकरण के चेयरमैन संजीव मित्तल, ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक राजीव सब्बरवाल और मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक अनूप कुमार श्रीवास्तव मौजूद रहे। कमेटी में एक-एक क्षेत्र के विशेषज्ञ अधिकारियों को शामिल किया गया है जो मामले की जांच कर रहे हैं। इसके अलावा सीईओ रितु माहेश्वरी, एसीईओ नेहा शर्मा, नियोजन विभाग के महाप्रबंधक इश्तियाक अहमद, ग्रुप हाउसिंग विभाग के ओएसडी अविनाश त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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कहां तक जाएगी जांच और कितने नाम होंगे चिह्नित
जांच से पहले प्राधिकरण ने सात नाम चिह्नित किए हैं। अधिकांश फाइलें इन्हीं सातों अधिकारियों के कार्यकाल में मंजूर की गई हैं, लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि इनके अलावा और कितने नाम चिह्नित किए जाएंगे। जांच में क्या उच्चाधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। यह सब कुछ जांच का विषय है। संभव है कि जांच के दौरान किसी बिंदु पर एसआईटी अन्य अधिकारियों को भी तलब कर ले और उनकी भी जवाबदेही तय की जाए।
नियोजन विभाग से मांगे कई कागजात
मंगलवार को एसआईटी जांच के दौरान नियोजन विभाग से कई प्रकार के कागजात मांगे गए। इसके लिए नियोजन विभाग की ओर से महाप्रबंधक इश्तियाक अहमद सहित पूरी टीम लगाई गई थी। एसआईटी के मांगने पर नियोजन विभाग की टीम पूरे दिन कागजात उपलब्ध कराती रही। बंद कमरे में चल रही जांच के दौरान महाप्रबंधक से जो भी मांग की गई उसे नियोजन विभाग ने कागजात से पूरा करने का काम किया। इस दौरान नियोजन विभाग ने पहले दिन से लेकर अंत तक का एक प्रस्तुतिकरण भी दिखाया। इसमें नक्शा पास करने के दौरान नियमों पर एसआईटी की नजर रही। हर चरण पर पास किए गए नक्शे की जानकारी दी गई। एसआईटी की जांच के दौरान ग्रुप हाउसिंग विभाग के अधिकारी भी मुस्तैदी से कमान संभाले रहे। हर बिंदु को समझाने का प्रयास किया गया। एसीईओ नेहा शर्मा और ओएसडी अविनाश त्रिपाठी इस दौरान मौजूद रहीं।
दो सेशन में हो रही एसआईटी जांच
सुबह करीब 9:30 बजे सेक्टर-6 स्थित कार्यालय पर एसआईटी जांच में शामिल अधिकारी पहुंचने शुरू हो गए। सुबह 10:15 बजे तक सभी अधिकारी दूसरे दिन की जांच के लिए कार्यालय आ चुके थे। सुबह करीब 11 बजे से शुरू हुई जांच दोपहर दो बजे तक हुई। इसके बाद दूसरे सेशन में 3 बजे से दोबारा जांच शुरू हुई, जो शाम 7:15 तक चली।
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नोएडा। सुपरटेक के एमराल्ड कोर्ट प्रोजेक्ट मामले में शासन की ओर से गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की टीम दूसरे दिन भी जांच के दौरान गड़बड़झाले की परत दर परत कड़ियां जोड़ने में लगी रही। चार सदस्यीय टीम का गहमागहमी के बीच प्राधिकरण के अधिकारियों ने जांच में सहयोग किया। शासन की ओर से सात दिनों में रिपोर्ट देने का आदेश है। इसकी समयसीमा बृहस्पतिवार को समाप्त होगी।
सूत्रों के मुताबिक, आवंटन से लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तक तीन श्रेणियों में जांच की जा रही है। इसमें 2004 से लेकर 2009 के दौरान आवंटन से लेकर पहले संशोधित प्लान, 2009 से लेकर 2012 तक के दूसरे व तीसरे संशोधित प्लान में नक्शा पास करने और 2014 से लेकर 2021 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले तक की अवधि में प्राधिकरण की गतिविधियों की जांच की जा रही है। एसआईटी की ओर से इसमें यह देखा जा रहा है कि कहां-कहां नियमों के उल्लंघन के मामले में कड़ियां जुड़ रही हैं यानी कुछ खास समयावधि में किसी तरह के नियमों का उल्लंघन किया गया है या फिर शुरू से ही नियमों को ताक पर रखकर इस प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी गई थी।
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एसआईटी जांच करने के लिए दूसरे दिन पहुंचे अधिकारियों में अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त के साथ-साथ प्राधिकरण के चेयरमैन संजीव मित्तल, ग्राम विकास एवं पंचायती राज विभाग के अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह, मेरठ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक राजीव सब्बरवाल और मुख्य नगर एवं ग्राम नियोजक अनूप कुमार श्रीवास्तव मौजूद रहे। कमेटी में एक-एक क्षेत्र के विशेषज्ञ अधिकारियों को शामिल किया गया है जो मामले की जांच कर रहे हैं। इसके अलावा सीईओ रितु माहेश्वरी, एसीईओ नेहा शर्मा, नियोजन विभाग के महाप्रबंधक इश्तियाक अहमद, ग्रुप हाउसिंग विभाग के ओएसडी अविनाश त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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कहां तक जाएगी जांच और कितने नाम होंगे चिह्नित
जांच से पहले प्राधिकरण ने सात नाम चिह्नित किए हैं। अधिकांश फाइलें इन्हीं सातों अधिकारियों के कार्यकाल में मंजूर की गई हैं, लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि इनके अलावा और कितने नाम चिह्नित किए जाएंगे। जांच में क्या उच्चाधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। यह सब कुछ जांच का विषय है। संभव है कि जांच के दौरान किसी बिंदु पर एसआईटी अन्य अधिकारियों को भी तलब कर ले और उनकी भी जवाबदेही तय की जाए।
नियोजन विभाग से मांगे कई कागजात
मंगलवार को एसआईटी जांच के दौरान नियोजन विभाग से कई प्रकार के कागजात मांगे गए। इसके लिए नियोजन विभाग की ओर से महाप्रबंधक इश्तियाक अहमद सहित पूरी टीम लगाई गई थी। एसआईटी के मांगने पर नियोजन विभाग की टीम पूरे दिन कागजात उपलब्ध कराती रही। बंद कमरे में चल रही जांच के दौरान महाप्रबंधक से जो भी मांग की गई उसे नियोजन विभाग ने कागजात से पूरा करने का काम किया। इस दौरान नियोजन विभाग ने पहले दिन से लेकर अंत तक का एक प्रस्तुतिकरण भी दिखाया। इसमें नक्शा पास करने के दौरान नियमों पर एसआईटी की नजर रही। हर चरण पर पास किए गए नक्शे की जानकारी दी गई। एसआईटी की जांच के दौरान ग्रुप हाउसिंग विभाग के अधिकारी भी मुस्तैदी से कमान संभाले रहे। हर बिंदु को समझाने का प्रयास किया गया। एसीईओ नेहा शर्मा और ओएसडी अविनाश त्रिपाठी इस दौरान मौजूद रहीं।
दो सेशन में हो रही एसआईटी जांच
सुबह करीब 9:30 बजे सेक्टर-6 स्थित कार्यालय पर एसआईटी जांच में शामिल अधिकारी पहुंचने शुरू हो गए। सुबह 10:15 बजे तक सभी अधिकारी दूसरे दिन की जांच के लिए कार्यालय आ चुके थे। सुबह करीब 11 बजे से शुरू हुई जांच दोपहर दो बजे तक हुई। इसके बाद दूसरे सेशन में 3 बजे से दोबारा जांच शुरू हुई, जो शाम 7:15 तक चली।