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अर्जुन अवार्ड पाने वाले सुहास एलवाई पहले आईएएस हों
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नोएडा। इस वर्ष मिलने वाले अर्जुन अवार्ड में जिले के नाम एक नई उपलब्धि जुड़ रही है। राष्ट्रीय खेल समिति ने इस पुरस्कार के लिए जिलाधिकारी सुहास एलवाई के नाम की संस्तुति की है। सुहास यह अवार्ड पाने वाले पहले आईएएस अधिकारी होंगे। जिलाधिकारी का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में तब आया, जब उन्होंने इस साल टोक्यो में आयोजित पैरालंपिक में देश के लिए रजत पदक जीता। उनकी यही सफलता अर्जुन अवार्ड पाने का आधार बनी है। दिव्यांग खिलाड़ियों में इससे पहले जिले से वरुण सिंह भाटी को 2017 में अर्जुन अवार्ड मिला था। वरुण ने समर पैरालंपिक खेल 2016 में कांस्य जीता था। उन्हें 29 अगस्त 2017 में अर्जुन अवार्ड मिला था।
प्रशासनिक सेवा संग शुरू हुआ बैडमिंटन का सफर
जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने एक खिलाड़ी के रूप में कॅरिअर की शुरुआत प्रशासनिक सेवा में चयन के बाद की। आजमगढ़ में जिलाधिकारी रहते हुए वर्ष 2016 में वह एक राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का उद्घाटन करने पहुंचे। जहां उन्होंने शौक के तौर पर खिलाड़ियों के साथ खेलना शुरू किया। इस दौरान उनके प्रदर्शन को काफी सराहना हुई। उनके प्रदर्शन से प्रभावित होकर प्रतियोगिता में मौजूद कोच ने सुहास को प्रोफेशनल खिलाड़ी के तौर पर पैरालंपिक की तैयारी करने की नसीहत दी। इसके बाद एक प्रोफेशनल खिलाड़ी के रूप में उनका सफर शुरू हुआ।
मूल रूप से कर्नाटक के निवासी
जिलाधिकारी सुहास एलवाई मूल रूप से कर्नाटक निवासी हैं। उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। सिविल सेवा में उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी सुहास आगरा, जौनपुर, सोनभद्र, आजमगढ़, हाथरस, महाराजगंज और प्रयागराज के जिलाधिकारी रह चुके हैं। वह 2016 बीजिंग एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण, 2017 तुर्किश ओपन में रजत और 2018 जकार्ता एशियन पैरा गेम्स में कांस्य जीत चुके हैं। साथ ही उन्होंने 2018 नेशनल पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण, 2019 आयरलैंड ओपन में रजत, 2019 तुर्किश ओपन में स्वर्ण जैसे कई पदक अपने नाम किए हैं।
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प्रशासनिक सेवा संग शुरू हुआ बैडमिंटन का सफर
जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने एक खिलाड़ी के रूप में कॅरिअर की शुरुआत प्रशासनिक सेवा में चयन के बाद की। आजमगढ़ में जिलाधिकारी रहते हुए वर्ष 2016 में वह एक राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का उद्घाटन करने पहुंचे। जहां उन्होंने शौक के तौर पर खिलाड़ियों के साथ खेलना शुरू किया। इस दौरान उनके प्रदर्शन को काफी सराहना हुई। उनके प्रदर्शन से प्रभावित होकर प्रतियोगिता में मौजूद कोच ने सुहास को प्रोफेशनल खिलाड़ी के तौर पर पैरालंपिक की तैयारी करने की नसीहत दी। इसके बाद एक प्रोफेशनल खिलाड़ी के रूप में उनका सफर शुरू हुआ।
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मूल रूप से कर्नाटक के निवासी
जिलाधिकारी सुहास एलवाई मूल रूप से कर्नाटक निवासी हैं। उन्होंने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। सिविल सेवा में उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी सुहास आगरा, जौनपुर, सोनभद्र, आजमगढ़, हाथरस, महाराजगंज और प्रयागराज के जिलाधिकारी रह चुके हैं। वह 2016 बीजिंग एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण, 2017 तुर्किश ओपन में रजत और 2018 जकार्ता एशियन पैरा गेम्स में कांस्य जीत चुके हैं। साथ ही उन्होंने 2018 नेशनल पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप में स्वर्ण, 2019 आयरलैंड ओपन में रजत, 2019 तुर्किश ओपन में स्वर्ण जैसे कई पदक अपने नाम किए हैं।
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