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जिम्स में बनेगा राज्यस्तरीय टीबी नियंत्रण व रोकथाम केंद्र
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ग्रेटर नोएडा (रणजीत मिश्रा)। जिम्स में राज्य स्तरीय टीबी नियंत्रण व रोकथाम केंद्र (सीडीसी) विकसित किया जाएगा। जिम्स ने इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था जिसकी स्वीकृति मिल गई है। शासन स्तर से जांच केंद्र व अनुसंधान लैब के लिए पहली किश्त भी जारी कर दी है।
संस्थान के निदेशक ब्रिगेडियर डॉक्टर राकेश गुप्ता ने बताया कि कोरोना के खिलाफ उपयोगिता सिद्ध करने के बाद टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों में योगदान के लिए भी जिम्स तेजी से उभरेगा। जिम्स ने शासन को टीबी पर अनुसंधान व दवाइयों की उपयोगिता आधारित लैब के लिए प्रस्ताव भेजा था। स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से शासन ने अनुसंधान केंद्र निर्माण के लिए 64 लाख रुपये की पहली किश्त सोमवार को जारी कर दी है।
यह होगा फायदा
अभी तक टीबी के संभावित मरीजों को लक्षण व एक्सरे के आधार पर प्राथमिक उपचार दिया जाता है। यहां लैब स्थापित होने के बाद पहले मरीज की जांच होगी। रिपोर्ट के आधार पर ही इलाज शुरू किया जाएगा। अभी रिपोर्ट के लिए करीब 45 दिन का इंतजार करना पड़ता है। लैब तैयार होने पर चार से पांच दिनों में रिपोर्ट मिल जाएगी। मरीजों को जिन दवाइयों की जरूरत होगी, उससे उपचार किया जाएगा।
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शासन से जिम्स में टीबी व दवाइयों पर शोध की अनुमति मिल गई है। शासन ने केंद्र निर्माण के लिए पहली किस्त जारी कर दी है। यहां शोध केंद्र बनने से टीबी के इलाज में नई क्रांति आएगी। प्राथमिक स्तर पर ही टीबी की पहचान कर इलाज किया जा सकेगा।
- ब्रिगेडियर डॉक्टर राकेश गुप्ता, निदेशक जिम्स
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संस्थान के निदेशक ब्रिगेडियर डॉक्टर राकेश गुप्ता ने बताया कि कोरोना के खिलाफ उपयोगिता सिद्ध करने के बाद टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों में योगदान के लिए भी जिम्स तेजी से उभरेगा। जिम्स ने शासन को टीबी पर अनुसंधान व दवाइयों की उपयोगिता आधारित लैब के लिए प्रस्ताव भेजा था। स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से शासन ने अनुसंधान केंद्र निर्माण के लिए 64 लाख रुपये की पहली किश्त सोमवार को जारी कर दी है।
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यह होगा फायदा
अभी तक टीबी के संभावित मरीजों को लक्षण व एक्सरे के आधार पर प्राथमिक उपचार दिया जाता है। यहां लैब स्थापित होने के बाद पहले मरीज की जांच होगी। रिपोर्ट के आधार पर ही इलाज शुरू किया जाएगा। अभी रिपोर्ट के लिए करीब 45 दिन का इंतजार करना पड़ता है। लैब तैयार होने पर चार से पांच दिनों में रिपोर्ट मिल जाएगी। मरीजों को जिन दवाइयों की जरूरत होगी, उससे उपचार किया जाएगा।
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शासन से जिम्स में टीबी व दवाइयों पर शोध की अनुमति मिल गई है। शासन ने केंद्र निर्माण के लिए पहली किस्त जारी कर दी है। यहां शोध केंद्र बनने से टीबी के इलाज में नई क्रांति आएगी। प्राथमिक स्तर पर ही टीबी की पहचान कर इलाज किया जा सकेगा।
- ब्रिगेडियर डॉक्टर राकेश गुप्ता, निदेशक जिम्स