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सर्वे से तय होगी एलिवेटेड रोड पर वाहनों की गति सीमा
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एलिवेटेड रोड।
नोएडा (योगेश शर्मा)। शहर के सबसे पहले एलिवेटेड रोड (एमपी-2 मार्ग) पर वाहनों की गति सीमा तय करने के लिए नोएडा प्राधिकरण सर्वे कराने जा रहा है। इसका जिम्मा सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) को सौंपा गया है। साथ ही, एलिवेटेड रोड पर बोझ कम करने के लिए भारी वाहनों की नो एंट्री पर भी सीआरआरआई से राय मांगी गई है। जल्द ही एलिवेटेड रोड पर सुरक्षित सफर के लिए अहम कदम उठाए जाएंगे। 4.80 किमी लंबे इस एलिवेटेड रोड पर वाहनों की गति सीमा को लेकर असमंजस की स्थिति बनी है। हल्के वाहनों के लिए पहले 50 किमी प्रति घंटा की गति तय थी। बाद में इसे घटाकर 40 किमी प्रति घंटा कर दिया गया और अब 60 किमी प्रति घंटा गति सीमा बताई जा रही है। हालांकि, एलिवेटेड रोड पर कहीं कोई गति सूचक बोर्ड नहीं लगा है। गति सीमा की उलझन को दूर करने के लिए प्राधिकरण ने सीआरआरआई को पत्र लिखकर सर्वे करने को कहा है। सुझाव के आधार पर वाहनों की गति सीमा तय की जाएगी।
ट्रैफिक पुलिस ने रोक का दिया था सुझाव
सेक्टर-28 स्थित विश्वभारती स्कूल से शॉप्रिक्स मॉल तक बने एलिवेटेड रोड पर भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने का सुझाव ट्रैफिक पुलिस की तरफ से दिया गया है। एनएच-9 बंद होने के कारण इन दिनों एलिवेटेड रोड पर बढ़े यातायात के दबाव को कम करने के लिए ऐसा करने को कहा गया है। हालांकि, प्राधिकरण ने पिछले साल अक्तूबर में ही उतरने-चढ़ने वाले सभी रैंप पर बैरियर लगवाने की तैयारी कर ली थी। जिससे भारी वाहन प्रवेश नहीं कर सकें, लेकिन नियम लागू नहीं हो सका। बैरियर के पोल पर नो एंट्री के बोर्ड अब भी लगे हैं। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई जाती है तो विकल्प क्या होगा, इसके लिए सीआरआरआई से सुझाव मांगा गया है।
480 करोड़ का प्रोजेक्ट, 44 महीने में ही जर्जर
480 करोड़ रुपये की लागत से बना एलिवेटेड रोड 28 जून 2017 को जनता को समर्पित किया गया था। इसे बनाने में 79 हजार मिट्रिक टन सीमेंट, 26 हजार टन स्टील का प्रयोग किया गया था, लेकिन 44 महीने में ही एलिवेटेड रोड पर वाहन हिचकौले खाने लगे हैं। सड़क की हालत जर्जर हो गई है।
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गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के धरने की वजह से एलिवेटेड रोड पर यातायात का दबाव बढ़ा है। इसको ध्यान में रखकर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक की जरूरत समझी जा रही है। गति सीमा और नो एंट्री पर लगातार प्राधिकरण के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है।
- गणेश प्रसाद साहा, डीसीपी ट्रैफिक
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ट्रैफिक पुलिस ने रोक का दिया था सुझाव
सेक्टर-28 स्थित विश्वभारती स्कूल से शॉप्रिक्स मॉल तक बने एलिवेटेड रोड पर भारी वाहनों के प्रवेश को रोकने का सुझाव ट्रैफिक पुलिस की तरफ से दिया गया है। एनएच-9 बंद होने के कारण इन दिनों एलिवेटेड रोड पर बढ़े यातायात के दबाव को कम करने के लिए ऐसा करने को कहा गया है। हालांकि, प्राधिकरण ने पिछले साल अक्तूबर में ही उतरने-चढ़ने वाले सभी रैंप पर बैरियर लगवाने की तैयारी कर ली थी। जिससे भारी वाहन प्रवेश नहीं कर सकें, लेकिन नियम लागू नहीं हो सका। बैरियर के पोल पर नो एंट्री के बोर्ड अब भी लगे हैं। प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई जाती है तो विकल्प क्या होगा, इसके लिए सीआरआरआई से सुझाव मांगा गया है।
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480 करोड़ का प्रोजेक्ट, 44 महीने में ही जर्जर
480 करोड़ रुपये की लागत से बना एलिवेटेड रोड 28 जून 2017 को जनता को समर्पित किया गया था। इसे बनाने में 79 हजार मिट्रिक टन सीमेंट, 26 हजार टन स्टील का प्रयोग किया गया था, लेकिन 44 महीने में ही एलिवेटेड रोड पर वाहन हिचकौले खाने लगे हैं। सड़क की हालत जर्जर हो गई है।
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गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों के धरने की वजह से एलिवेटेड रोड पर यातायात का दबाव बढ़ा है। इसको ध्यान में रखकर भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक की जरूरत समझी जा रही है। गति सीमा और नो एंट्री पर लगातार प्राधिकरण के साथ विचार-विमर्श किया जा रहा है।
- गणेश प्रसाद साहा, डीसीपी ट्रैफिक