{"_id":"6913307fa86c8075990b1cc0","slug":"silent-pneumonia-on-the-rise-in-children-noida-news-c-1-noi1095-3616629-2025-11-11","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: बच्चों में बढ़ रहा साइलेंट निमोनिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: बच्चों में बढ़ रहा साइलेंट निमोनिया
विज्ञापन
विश्व निमोनिया दिवस पर विशेष
- अकेले जिला अस्पताल में 60 प्रतिशत बच्चे सर्दी, जुकाम, बुखार के साथ पहुंच रहे
नेहा शर्मा
नोएडा। ठंड की शुरुआत के साथ ही बच्चों में सर्दी, जुकाम और निमोनिया के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। जिला अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों तक ओपीडी में सर्दी-खांसी, बुखार और श्वसन संक्रमण से पीड़ित बच्चों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। कई बच्चों में साइलेंट निमोनिया के लक्षण भी सामने आ रहे हैं।
जिला अस्पताल की चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ अरविंद कुशवाह ने बताया कि रोजाना 5 से 8 निमोनिया से पीड़ित बच्चे आ रहे हैं। हालांकि अभी गंभीर निमोनिया वाले मरीज नहीं आ रहे हैं। इसके अलावा, सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत लेकर करीब 60 प्रतिशत बच्चे आ रहे हैं। इनमें से कुछ बच्चों में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (श्वसन संक्रमण) और कुछ में फेफड़ों का इंफेक्शन मिल रहा है। सूखी खांसी के मामले भी बढ़े हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -
खुद न करें इलाज, बढ़ सकता है संक्रमण
यथार्थ हॉस्पिटल के डॉ पोटलुरी चेतन ने बताया कि पिछले दो महीने में बच्चों की ओपीडी में सर्दी, खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण वाले मामले 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। कई मामलों में बच्चों में साइलेंट निमोनिया के लक्षण पाए गए हैं। पांच 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया के मामले अधिक देखने को मिल रहे हैं। ऐसा भी देखने को मिल रहा है कि कई अभिभावक बच्चे को घर पर ही नेबुलाइजर या दवाइयां देकर उपचार करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे संक्रमण बढ़ जाता है।
विज्ञापन
-- -- -- -- -- -- -- --
40 प्रतिशत बच्चे लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन से प्रभावित
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉ. आशु साहनी बताती हैं कि सर्दी शुरू होने के साथ ही बच्चों में सर्दी-जुकाम, खांसी और सांस की बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं। इस समय लगभग 40 प्रतिशत बच्चे लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (एलआरटीआई ) से प्रभावित हो रहे हैं। एलआरटीआई एक संक्रमण है जो गले के नीचे वायुमार्ग और फेफड़ों को प्रभावित करता है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
घर में बनाए रखें वेंटिलेशन
बंद कमरे, हीटर या लकड़ी जलाने जैसी गतिविधियां कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता का खतरा बढ़ा सकती हैं। इसलिए घर में वेंटिलेशन बनाए रखना बहुत जरूरी है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
निमोनिया केवल सर्दियों की बीमारी नहीं
डॉक्टर का कहना है कि यह धारणा गलत है कि निमोनिया केवल ठंड में होता है। निमोनिया किसी भी मौसम में हो सकता है। इसका समय पर पता लगाना और इलाज करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। अभिभावकों को बच्चे को निमोनिया वैक्सीन लगवानी चाहिए। साथ ही, फ्लू वैक्सीन साल में एक बार लगवाने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को।
-- -- -- --
बच्चे की इम्युनिटी पर दें ध्यान
डॉक्टर का कहना है कि अभिभावकों को बच्चों को उच्च प्रोटीन युक्त आहार देना चाहिए, ताकि उनकी इम्युनिटी मजबूत हो और बार-बार संक्रमण का खतरा कम हो। संतुलित पोषण और समय पर वैक्सीनेशन से बच्चे निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रह सकते हैं।
-- -- -- -- -- -- -- -- -
बच्चों की देखभाल कैसे करें
- बच्चों को बीमार व्यक्तियों से दूर रखें।
- नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोएं।
- छोटे बच्चों को प्रदूषित जगहों पर ले जाने से बचें।
- मौसम के अनुसार गर्म कपड़े पहनाएं।
-ठंडी हवा या अचानक तापमान में बदलाव से बचाएं।
- बीसीजी, डीपीटी, निमोनिया वैक्सीन टीका, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी का टीका लगवाएं।
-पहले 6 महीने तक केवल मां का दूध (एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग) कराएं।
- पौष्टिक आहार दें जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े।
- धूल, धुआं और रसोई के धुएं से बच्चों को दूर रखें।
-- -- -- -- -- --
अधूरे या गलत इलाज से फेफड़ों को हो सकता है नुकसान
-सांस लेने में स्थायी कठिनाई
- फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी
- बार-बार संक्रमण होना
- अस्थमा जैसी क्रॉनिक बीमारियां
-हृदय व अन्य अंगों पर प्रभाव पड़ सकता है
विज्ञापन
- अकेले जिला अस्पताल में 60 प्रतिशत बच्चे सर्दी, जुकाम, बुखार के साथ पहुंच रहे
नेहा शर्मा
नोएडा। ठंड की शुरुआत के साथ ही बच्चों में सर्दी, जुकाम और निमोनिया के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। जिला अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों तक ओपीडी में सर्दी-खांसी, बुखार और श्वसन संक्रमण से पीड़ित बच्चों की संख्या में इजाफा देखा जा रहा है। कई बच्चों में साइलेंट निमोनिया के लक्षण भी सामने आ रहे हैं।
जिला अस्पताल की चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉ अरविंद कुशवाह ने बताया कि रोजाना 5 से 8 निमोनिया से पीड़ित बच्चे आ रहे हैं। हालांकि अभी गंभीर निमोनिया वाले मरीज नहीं आ रहे हैं। इसके अलावा, सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत लेकर करीब 60 प्रतिशत बच्चे आ रहे हैं। इनमें से कुछ बच्चों में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (श्वसन संक्रमण) और कुछ में फेफड़ों का इंफेक्शन मिल रहा है। सूखी खांसी के मामले भी बढ़े हैं।
विज्ञापन
खुद न करें इलाज, बढ़ सकता है संक्रमण
यथार्थ हॉस्पिटल के डॉ पोटलुरी चेतन ने बताया कि पिछले दो महीने में बच्चों की ओपीडी में सर्दी, खांसी, बुखार और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण वाले मामले 20 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। कई मामलों में बच्चों में साइलेंट निमोनिया के लक्षण पाए गए हैं। पांच 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया के मामले अधिक देखने को मिल रहे हैं। ऐसा भी देखने को मिल रहा है कि कई अभिभावक बच्चे को घर पर ही नेबुलाइजर या दवाइयां देकर उपचार करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे संक्रमण बढ़ जाता है।
विज्ञापन
40 प्रतिशत बच्चे लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन से प्रभावित
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉ. आशु साहनी बताती हैं कि सर्दी शुरू होने के साथ ही बच्चों में सर्दी-जुकाम, खांसी और सांस की बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं। इस समय लगभग 40 प्रतिशत बच्चे लोअर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (एलआरटीआई ) से प्रभावित हो रहे हैं। एलआरटीआई एक संक्रमण है जो गले के नीचे वायुमार्ग और फेफड़ों को प्रभावित करता है।
घर में बनाए रखें वेंटिलेशन
बंद कमरे, हीटर या लकड़ी जलाने जैसी गतिविधियां कार्बन मोनोऑक्साइड विषाक्तता का खतरा बढ़ा सकती हैं। इसलिए घर में वेंटिलेशन बनाए रखना बहुत जरूरी है।
निमोनिया केवल सर्दियों की बीमारी नहीं
डॉक्टर का कहना है कि यह धारणा गलत है कि निमोनिया केवल ठंड में होता है। निमोनिया किसी भी मौसम में हो सकता है। इसका समय पर पता लगाना और इलाज करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। अभिभावकों को बच्चे को निमोनिया वैक्सीन लगवानी चाहिए। साथ ही, फ्लू वैक्सीन साल में एक बार लगवाने की सलाह दी जाती है। विशेष रूप से 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को।
बच्चे की इम्युनिटी पर दें ध्यान
डॉक्टर का कहना है कि अभिभावकों को बच्चों को उच्च प्रोटीन युक्त आहार देना चाहिए, ताकि उनकी इम्युनिटी मजबूत हो और बार-बार संक्रमण का खतरा कम हो। संतुलित पोषण और समय पर वैक्सीनेशन से बच्चे निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रह सकते हैं।
बच्चों की देखभाल कैसे करें
- बच्चों को बीमार व्यक्तियों से दूर रखें।
- नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोएं।
- छोटे बच्चों को प्रदूषित जगहों पर ले जाने से बचें।
- मौसम के अनुसार गर्म कपड़े पहनाएं।
-ठंडी हवा या अचानक तापमान में बदलाव से बचाएं।
- बीसीजी, डीपीटी, निमोनिया वैक्सीन टीका, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप बी का टीका लगवाएं।
-पहले 6 महीने तक केवल मां का दूध (एक्सक्लूसिव ब्रेस्टफीडिंग) कराएं।
- पौष्टिक आहार दें जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े।
- धूल, धुआं और रसोई के धुएं से बच्चों को दूर रखें।
अधूरे या गलत इलाज से फेफड़ों को हो सकता है नुकसान
-सांस लेने में स्थायी कठिनाई
- फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी
- बार-बार संक्रमण होना
- अस्थमा जैसी क्रॉनिक बीमारियां
-हृदय व अन्य अंगों पर प्रभाव पड़ सकता है