UP: नोएडा एयरपोर्ट पर रोबोटिक सिस्टम से होगी बमों की जांच, 2.5 मीटर की दूरी से उठा सकता है 20 किलो वजन
एमआरओवी से सुरक्षा बल बिना जान जोखिम में डाले संदिग्ध वस्तुओं की जांच और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम होंगे। यह स्वदेशी रूप से विकसित उन्नत रोबोटिक सिस्टम भारत की सिक्योरिटी डिफेंस सिस्टम कंपनी ने तैयार की है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नोएडा एयरपोर्ट पर विमानों का परिचालन शुरू होने से पहले अत्याधुनिक तकनीक से लैस सुरक्षा व्यवस्था लागू की जा रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को मिनी रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल (एमआरओवी) का सफल परीक्षण किया गया, जो बम की पहचान करने और उसे निष्क्रिय करने में सक्षम है।
एमआरओवी से सुरक्षा बल बिना जान जोखिम में डाले संदिग्ध वस्तुओं की जांच और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने में सक्षम होंगे। यह स्वदेशी रूप से विकसित उन्नत रोबोटिक सिस्टम भारत की सिक्योरिटी डिफेंस सिस्टम कंपनी ने तैयार की है। पहले चरण में एयरपोर्ट पर ऐसे छह एमआरओवी तैनात किए जाएंगे। इससे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और देश की रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।
नोएडा एयरपोर्ट की सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नेटवर्क को साइबर हमले से सुरक्षित रखने और प्रौद्योगिकी संचालन की रियल टाइम निगरानी की जिम्मेदारी अमेरिकी आईटी कंपनी किंड्रिल की है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस संचालित ओपन इंटीग्रेशन प्लेटफार्म सिस्टम से व्यवस्था परखी जाएगी और किसी भी संभावित तकनीकी समस्या का समाधान किया जाएगा। कंपनी तकनीकी कार्यों में साइबर अपराधियों की सेंधमारी व अन्य तकनीकी गड़बड़ी समेत अन्य संभावित समस्याओं के निदान के लिए विशेष आइटी नेटवर्क तैयार कर रही है।
2.5 मीटर की दूरी से उठा सकता है 20 किलो वजन
एमआरओवी किसी भी कठिन इलाके में काम करने में सक्षम होगा। इसमें चार-पहिया ड्राइव सिस्टम होगा। रोबोटिक आर्म 20 किलोग्राम तक की वस्तु को 2.5 मीटर और 9 किलोग्राम तक की वस्तु को 4 मीटर की दूरी से उठा सकता है। वाटर जेट डिसरप्टर से बम को बिना विस्फोट के निष्क्रिय किया जा सकता है। हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे, नाइट विजन, और एनबीसी (न्यूक्लियर, बायोलॉजिकल, केमिकल) रेकनाइसेंस सिस्टम से लैस है। पोर्टेबल एक्स-रे डिवाइस और शॉट गन जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। 500 मीटर की दूरी से रिमोट कंट्रोल और 3 घंटे का बैटरी बैकअप होगा। यह सिस्टम विशेष रूप से विमान, ट्रेन, मेट्रो जैसे सीमित और जटिल स्थानों में कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसके 90 फीसदी से अधिक पुर्जे भारत में निर्मित हैं, जिससे यह तकनीक मेक इन इंडिया पहल को मजबूती देती है।
यह भी पढ़ें: Rain Records : दिल्ली में 124 साल में मई माह के दौरान दूसरी सर्वाधिक बारिश, उत्तर भारत में गई आठ लोगों की जान
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.