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हम सब पर यमुना के संरक्षण की जिम्मेदारी : प्रवेश वर्मा
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यमुना किनारे वासुदेव घाट पर लोक निर्माण मंत्री प्रवेश वर्मा ने विशेष नौका-यात्रा और यमुना की संध्याकालीन आरती की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मां यमुना की गोद में आज इस पावन संध्या पर आकर यह महसूस हुआ कि भक्ति के साथ-साथ हम सब पर इस नदी के संरक्षण की जिम्मेदारी भी है।
केवल संकल्प लेने से नहीं बल्कि मिलकर कार्य करने से ही यमुना को स्वच्छ और जीवनदायी बनाया जा सकता है। इस गौरवशाली अवसर पर हमें यह भाव अपनाना चाहिए कि सच्चे अर्थों में विकसित राष्ट्र वही होता है जो आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक विरासत और सांस्कृतिक धरोहरों का भी सम्मान व संरक्षण करता है। यमुना का पुनर्जीवन कोई एक विभाग का काम नहीं है बल्कि हम सबका साझा कर्तव्य है। उन्होंने उपस्थित शिक्षाविदों, युवाओं और नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस अभियान को जन आंदोलन बनाने में सहभागी बनें और आने वाली पीढ़ियों के सामने स्वच्छ एवं सम्मानित यमुना की मिसाल प्रस्तुत करें। गत कुछ महीनों में पीडब्ल्यूडी, जल बोर्ड और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (आईएफसी) की ओर से मिलकर यमुना घाटों की सफाई, सिल्ट हटाने, कचरा-उन्मूलन और सौंदर्यीकरण के कई प्रयास किए गए हैं।
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नई दिल्ली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर यमुना किनारे वासुदेव घाट पर लोक निर्माण मंत्री प्रवेश वर्मा ने विशेष नौका-यात्रा और यमुना की संध्याकालीन आरती की। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मां यमुना की गोद में आज इस पावन संध्या पर आकर यह महसूस हुआ कि भक्ति के साथ-साथ हम सब पर इस नदी के संरक्षण की जिम्मेदारी भी है।
केवल संकल्प लेने से नहीं बल्कि मिलकर कार्य करने से ही यमुना को स्वच्छ और जीवनदायी बनाया जा सकता है। इस गौरवशाली अवसर पर हमें यह भाव अपनाना चाहिए कि सच्चे अर्थों में विकसित राष्ट्र वही होता है जो आधुनिक बुनियादी ढांचे के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक विरासत और सांस्कृतिक धरोहरों का भी सम्मान व संरक्षण करता है। यमुना का पुनर्जीवन कोई एक विभाग का काम नहीं है बल्कि हम सबका साझा कर्तव्य है। उन्होंने उपस्थित शिक्षाविदों, युवाओं और नागरिकों से आग्रह किया कि वे इस अभियान को जन आंदोलन बनाने में सहभागी बनें और आने वाली पीढ़ियों के सामने स्वच्छ एवं सम्मानित यमुना की मिसाल प्रस्तुत करें। गत कुछ महीनों में पीडब्ल्यूडी, जल बोर्ड और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग (आईएफसी) की ओर से मिलकर यमुना घाटों की सफाई, सिल्ट हटाने, कचरा-उन्मूलन और सौंदर्यीकरण के कई प्रयास किए गए हैं।
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