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Noida News: सामूहिक विवाह में चांदी की पायल के साथ देना होगा शुद्धता का प्रमाणपत्र
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सोनभद्र। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में दुल्हन को गिलट की पायल देने पर हुए हंगामे का शासन ने संज्ञान लिया है।
योजना के तहत गुणवत्ता पूर्ण सामग्री का वितरण सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। अब उपहार में दुल्हन को 30 ग्राम चांदी की पायल के साथ उसकी शुद्धता का प्रमाण पत्र देना होगा। कूकर, कड़ाही, पंखा सहित अन्य सामान भी उच्च गुणवत्ता वाले ही दिए जाएंगे।
गरीब परिवार के बेटियों की शादी भी पूरी भव्यता के साथ संपन्न कराने के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना लागू की थी। योजना के तहत प्रत्येक जोड़े के लिए पहले 51 हजार रुपये की धनराशि निर्धारित थी। इसमें 35 हजार रुपये दुल्हन के खाते में भेजे जाते थे, जबकि 10 हजार रुपये नव दंपती को गृहस्थी के सामान भेंट किए जाते थे।
शेष 6 हजार रुपये विवाह समारोह के आयोजन व खान-पान पर खर्च होता था। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली योजना के बावजूद इसकी पारदर्शिता में सेंध लगाते हुए गत वर्ष सोनभद्र में कई जोड़ों को चांदी की जगह गिलट की पायल थमा दी गई थी।
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पांच लीटर की जगह तीन लीटर का कूकर दिया गया। इस गड़बड़ी पर खूब हंगामा मचा था। मामला काफी दिनाें तक सुर्खियों में भी छाया रहा। समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड के गृह जनपद में हुई इस तरह की चूक को शासन ने गंभीरता से लिया था। इस सत्र में होने वाले विवाह के लिए शासन ने नए सिरे से दिशा निर्देश जारी किए हैं।
विवाह की धनराशि 51 हजार से बढ़ाकर एक लाख की गई है तो सामानों की गुणवत्ता को लेकर भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। प्रत्येक जोड़े को ब्रांडेड और उत्तम गुणवत्ता वाले सामान ही दिए जाने हैं। दुल्हन को 65 टंच शुद्धता वाली 30 ग्राम चांदी की पायल और 10 ग्राम चांदी की बिछिया दी जाएगी। चांदी की मात्रा और शुद्धता का प्रमाण पत्र देना भी अनिवार्य होगा।
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योजना के तहत गुणवत्ता पूर्ण सामग्री का वितरण सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रावधान किए गए हैं। अब उपहार में दुल्हन को 30 ग्राम चांदी की पायल के साथ उसकी शुद्धता का प्रमाण पत्र देना होगा। कूकर, कड़ाही, पंखा सहित अन्य सामान भी उच्च गुणवत्ता वाले ही दिए जाएंगे।
गरीब परिवार के बेटियों की शादी भी पूरी भव्यता के साथ संपन्न कराने के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना लागू की थी। योजना के तहत प्रत्येक जोड़े के लिए पहले 51 हजार रुपये की धनराशि निर्धारित थी। इसमें 35 हजार रुपये दुल्हन के खाते में भेजे जाते थे, जबकि 10 हजार रुपये नव दंपती को गृहस्थी के सामान भेंट किए जाते थे।
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शेष 6 हजार रुपये विवाह समारोह के आयोजन व खान-पान पर खर्च होता था। मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली योजना के बावजूद इसकी पारदर्शिता में सेंध लगाते हुए गत वर्ष सोनभद्र में कई जोड़ों को चांदी की जगह गिलट की पायल थमा दी गई थी।
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पांच लीटर की जगह तीन लीटर का कूकर दिया गया। इस गड़बड़ी पर खूब हंगामा मचा था। मामला काफी दिनाें तक सुर्खियों में भी छाया रहा। समाज कल्याण राज्य मंत्री संजीव सिंह गोंड के गृह जनपद में हुई इस तरह की चूक को शासन ने गंभीरता से लिया था। इस सत्र में होने वाले विवाह के लिए शासन ने नए सिरे से दिशा निर्देश जारी किए हैं।
विवाह की धनराशि 51 हजार से बढ़ाकर एक लाख की गई है तो सामानों की गुणवत्ता को लेकर भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। प्रत्येक जोड़े को ब्रांडेड और उत्तम गुणवत्ता वाले सामान ही दिए जाने हैं। दुल्हन को 65 टंच शुद्धता वाली 30 ग्राम चांदी की पायल और 10 ग्राम चांदी की बिछिया दी जाएगी। चांदी की मात्रा और शुद्धता का प्रमाण पत्र देना भी अनिवार्य होगा।