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Noida News: लोक निर्माण विभाग ने टेंडर प्रकिया में किया बदलाव
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असामान्य रूप से कम बोली लगाने वाले ठेकेदारों को अतिरिक्त परफॉर्मेंस गारंटी जमा करानी होगी
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। अब असामान्य रूप से कम बोली लगाने वाले ठेकेदारों को अतिरिक्त एन्हांस्ड परफॉर्मेंस गारंटी (ईपीजी) जमा करानी होगी। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी की ओर से सर्कुलर जारी कर दिया गया है। यह सभी भविष्य के टेंडरों पर लागू होगा जहां तकनीकी मूल्यांकन अभी पूरा नहीं हुआ है।
विभाग के अनुसार, कई टेंडरों में ठेकेदार अनुमानित लागत से बहुत कम रेट पर बोली लगाते हैं जिससे काम की गुणवत्ता, स्थिरता और वित्तीय व्यवहार्यता पर सवाल उठते हैं। नई नीति के तहत अगर कोई बोली अनुमानित लागत (ईसीपीटी) से 25 प्रतिशत या उससे अधिक कम है तो उसे असामान्य रूप से कम बोली माना जाएगा। ऐसे मामलों में ठेकेदार को मानक परफॉर्मेंस गारंटी के अलावा अतिरिक्त ईपीजी जमा करनी होगी जो ईसीपीटी के 25 प्रतिशत कम राशि और बोली गई राशि के बीच के अंतर के बराबर होगी। यह गारंटी बैंक गारंटी या अन्य स्वीकृत रूप में समय सीमा के अंदर जमा करानी होगी। सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि यह नियम सभी मुख्य अभियंताओं, अधीक्षक अभियंताओं और कार्यकारी अभियंताओं की ओर से सख्ती से लागू किया जाएगा। बिना ईपीजी के ऐसे टेंडरों में कोई काम आवंटित नहीं किया जाएगा। कुछ मामलों में छूट केवल सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति से दी जा सकेगी। यह फैसला पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा की मंजूरी के बाद जारी किया गया है।
नई व्यवस्था से होंगे कई लाभ
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने से सार्वजनिक कार्यों में कई महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके तहत कम बोली से होने वाले जोखिमों को कम करके काम की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी जिससे परियोजनाएं समय पर और मजबूती से पूरी होंगी। ठेकेदारों की वित्तीय व्यवहार्यता पर नजर रखने से सरकारी धन की बर्बादी रुकेगी और परियोजनाओं के बीच में रुकने की संभावना घटेगी। असामान्य कम बोली से होने वाली अनुचित प्रतिस्पर्धा पर अंकुश लगेगा जिससे ईमानदार ठेकेदारों को समान अवसर मिलेंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और गुणवत्ता को मजबूत करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। अब असामान्य रूप से कम बोली लगाने वाले ठेकेदारों को अतिरिक्त एन्हांस्ड परफॉर्मेंस गारंटी (ईपीजी) जमा करानी होगी। इस संबंध में पीडब्ल्यूडी की ओर से सर्कुलर जारी कर दिया गया है। यह सभी भविष्य के टेंडरों पर लागू होगा जहां तकनीकी मूल्यांकन अभी पूरा नहीं हुआ है।
विभाग के अनुसार, कई टेंडरों में ठेकेदार अनुमानित लागत से बहुत कम रेट पर बोली लगाते हैं जिससे काम की गुणवत्ता, स्थिरता और वित्तीय व्यवहार्यता पर सवाल उठते हैं। नई नीति के तहत अगर कोई बोली अनुमानित लागत (ईसीपीटी) से 25 प्रतिशत या उससे अधिक कम है तो उसे असामान्य रूप से कम बोली माना जाएगा। ऐसे मामलों में ठेकेदार को मानक परफॉर्मेंस गारंटी के अलावा अतिरिक्त ईपीजी जमा करनी होगी जो ईसीपीटी के 25 प्रतिशत कम राशि और बोली गई राशि के बीच के अंतर के बराबर होगी। यह गारंटी बैंक गारंटी या अन्य स्वीकृत रूप में समय सीमा के अंदर जमा करानी होगी। सर्कुलर में स्पष्ट किया गया है कि यह नियम सभी मुख्य अभियंताओं, अधीक्षक अभियंताओं और कार्यकारी अभियंताओं की ओर से सख्ती से लागू किया जाएगा। बिना ईपीजी के ऐसे टेंडरों में कोई काम आवंटित नहीं किया जाएगा। कुछ मामलों में छूट केवल सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति से दी जा सकेगी। यह फैसला पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा की मंजूरी के बाद जारी किया गया है।
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नई व्यवस्था से होंगे कई लाभ
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने से सार्वजनिक कार्यों में कई महत्वपूर्ण लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके तहत कम बोली से होने वाले जोखिमों को कम करके काम की गुणवत्ता सुनिश्चित होगी जिससे परियोजनाएं समय पर और मजबूती से पूरी होंगी। ठेकेदारों की वित्तीय व्यवहार्यता पर नजर रखने से सरकारी धन की बर्बादी रुकेगी और परियोजनाओं के बीच में रुकने की संभावना घटेगी। असामान्य कम बोली से होने वाली अनुचित प्रतिस्पर्धा पर अंकुश लगेगा जिससे ईमानदार ठेकेदारों को समान अवसर मिलेंगे।
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