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निजी एजेंसियां खेतों पर ही खरीद रहीं सरसों की फसल, किसानों को सरकारी मूल्य से 1450 रुपये मिल रहे अधिक
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फिरोजपुर झिरका। जिले के किसान सरसों की फसल लेकर अनाज मंडी में न पहुंच जाएं, इसलिए आढ़ती, मिलों के मालिक और प्राइवेट एजेंसियां किसानों से खेतों पर ही संपर्क कर उनकी फसल को 6500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद रहे हैं। वहीं, सरसों का सरकारी रेट 5050 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया। इससे किसानों को भारी मुनाफा हो रहा है और उनके चेहरे खिले नजर आ रहे हैं।
दरअसल, निर्धारित सरकारी दामों की तुलना में किसानों को फसल का दाम मंडी के बाहर ही अधिक मिल रहा है इसलिए किसान अपनी फसल मंडी लाने की बजाय बाहर ही बेच दे रहे हैं। मंडी के बाहर सरसों की फसल खरीद रहे बड़े व्यापारी भी इसका पूरा फायदा उठा रहे हैं। ये व्यापारी बड़े स्तर पर सरसों का भंडारण करने में लगे हैं, ताकि उचित समय पर उन्हें सही दाम मिल सके। वहीं, सरकारी एजेंसियां ऐसे लोगों पर सरकारी मार्केट फीस की चोरी करने, स्टाक से अधिक भंडारण करने पर रोक नहीं लगा पा रही हैं। इससे सरसों की खरीद करने वाले लोगों के हौसले बुलंद हैं। उधर, मंडी में सरकारी खरीद के लिए बैठी खरीद एजेंसियां इन सभी बातों से पूरी तरह से वाकिफ है। क्षेत्रीय किसान भीम पटेल, राजू गुर्जर , यादराम पटेल, जग्गी, आस मोहम्मद, हारुन, मोहम्मद इसराईल, सुमेर पटेल ने बताया कि सरकार ने इस बार सरसों का सरकारी रेट 5050 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इसमें भी कई शर्तें हैं, जैसे सरसों को सूखाकर लाना है, नमी इत्यादि नहीं होनी चाहिए। लेकिन, मंडी के बाहर उनकी सरसों 6500 रुपये में बिक रही है।
किसानों ने बताया कि जो व्यापारी उनसे सरसों की खरीद कर रहे हैं, वो उन्हें नकद भुगतान कर रहे हैं। जबकि सरकारी खरीद में काफी दिनों के बाद पैसा मिलता है। बहुत से किसान ऐसे हैं, जो दूसरों का भंडारण रेट अधिक होने की संभावना को लेकर कर रहे हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो पिछले वर्ष क्षेत्रीय किसानों ने करीब 30 हजार हेक्टेयर में सरसों की खेती की थी तो इस बार किसानों ने इस रकबे को बढ़ाकर इसे 38 से 40 हजार हेक्टेयर के बीच पहुंचा दिया।
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दरअसल, निर्धारित सरकारी दामों की तुलना में किसानों को फसल का दाम मंडी के बाहर ही अधिक मिल रहा है इसलिए किसान अपनी फसल मंडी लाने की बजाय बाहर ही बेच दे रहे हैं। मंडी के बाहर सरसों की फसल खरीद रहे बड़े व्यापारी भी इसका पूरा फायदा उठा रहे हैं। ये व्यापारी बड़े स्तर पर सरसों का भंडारण करने में लगे हैं, ताकि उचित समय पर उन्हें सही दाम मिल सके। वहीं, सरकारी एजेंसियां ऐसे लोगों पर सरकारी मार्केट फीस की चोरी करने, स्टाक से अधिक भंडारण करने पर रोक नहीं लगा पा रही हैं। इससे सरसों की खरीद करने वाले लोगों के हौसले बुलंद हैं। उधर, मंडी में सरकारी खरीद के लिए बैठी खरीद एजेंसियां इन सभी बातों से पूरी तरह से वाकिफ है। क्षेत्रीय किसान भीम पटेल, राजू गुर्जर , यादराम पटेल, जग्गी, आस मोहम्मद, हारुन, मोहम्मद इसराईल, सुमेर पटेल ने बताया कि सरकार ने इस बार सरसों का सरकारी रेट 5050 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। इसमें भी कई शर्तें हैं, जैसे सरसों को सूखाकर लाना है, नमी इत्यादि नहीं होनी चाहिए। लेकिन, मंडी के बाहर उनकी सरसों 6500 रुपये में बिक रही है।
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किसानों ने बताया कि जो व्यापारी उनसे सरसों की खरीद कर रहे हैं, वो उन्हें नकद भुगतान कर रहे हैं। जबकि सरकारी खरीद में काफी दिनों के बाद पैसा मिलता है। बहुत से किसान ऐसे हैं, जो दूसरों का भंडारण रेट अधिक होने की संभावना को लेकर कर रहे हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों की मानें तो पिछले वर्ष क्षेत्रीय किसानों ने करीब 30 हजार हेक्टेयर में सरसों की खेती की थी तो इस बार किसानों ने इस रकबे को बढ़ाकर इसे 38 से 40 हजार हेक्टेयर के बीच पहुंचा दिया।
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