हिंदू धर्म के रक्षा की शपथ ले तोगड़िया ने कहा, संविधान के दायरे में चल रहे शौर्य शिविर
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शौर्य प्रशिक्षण शिविर पहली बार आयोजित नहीं किए गए हैं बल्कि पिछले 25 वर्षों से चल रहे हैं। शिविर में कानून और संविधान के दायरे में रहते हुए गतिविधियां चलाई जाती रही हैं।
यह कहना है विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया का। वह सेक्टर-12 के सरस्वती शिशु मंदिर में आयोजित सात दिवसीय शौर्य प्रशिक्षण शिविर के समापन पर आयोजित दीक्षांत समारोह में शामिल होने आए थे।
उनसे जब पिछले दिनों एक यूपी के फैजाबाद में आयोजित शौर्य शिविर में उठे विवाद पर पूछा गया तो उन्होंने ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि शौर्य शिविर का मकसद कार्यकर्ताओं को शारीरिक तौर पर स्वस्थ बनाना है।
उनसे जब राम मंदिर पर सवाल पूछा गया तो टालते हुए कहा कि यह मुद्दा काफी पुराना है और वह इस पर कुछ नहीं कहना चाहते। उन्होंने कहा कि वह किसी धर्म के खिलाफ नहीं है बल्कि राष्ट्रवादी सोच के साथ हैं।
टोपी वाले सवाल पर उन्होंने कहा कि सफेद टोपी तो हिंदू भी पहनते हैं। इसमें बुरा क्या है। उन्होंने शिविर में आयोजित दीक्षांत समारोह में 400 प्रशिक्षणार्थियों को दीक्षा दी। दीक्षा के दौरान उन्होंने हिंदू धर्म के 10 तत्वों को समझाया।
यही नहीं उन्होंने धर्म की रक्षा की शपथ भी दिलाई। इस मौके पर विश्व हिंदू परिषद नोएडा के कार्यकारी अध्यक्ष उमानंद कौशिक, क्षेत्रीय संगठन मंत्री ईश्वरी प्रसाद, प्रांत संयोजक बजरंग दल बलराज डूंगर सहित कई अन्य मौजूद रहे।
विवादों से बचते रहे बजरंग दल और वीएचपी के नेता
नोएडा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वीएचपी व बजरंग दल के नेता किसी भी विवाद से बचते रहे। प्रवीण तोगड़िया ने भी बीते दिनों शौर्य प्रशिक्षण शिविर में उपजे विवाद व राममंदिर समेत कई मुद्दों पर टालमटोल वाला जवाब दिया।
अहम बात यह रही कि पार्टी ने मीडिया से बातचीत करने के बाद बाहर जाने को कहा। मीडिया के जाने के बाद ही दीक्षांत समारोह के आगे की कार्रवाई पूरी की गई।
इस बाबत वीएचपी के नेताओं ने कहा किपार्टी नहीं चाहती कि उनके बयानों को मुद्दा बनाया जाए और उसे तोड़ मरोड़ कर पेश किया जाए।