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दिल्ली दंगा: एक साथ मिलाए गए मामलों को अलग कर पुलिस करेगी जांच

Mon, 13 Sep 2021 07:44 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 13 Sep 2021 07:44 PM IST
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Police will investigate by separating the cases mixed together
नई दिल्ली। अदालत ने कोर्ट की फटकार के बाद दिल्ली पुलिस ने दिल्ली दंगों के उन मामलों में अलग-अलग जांच और आरोपपत्र दाखिल करने का फैसला किया है जो कई शिकायतों पर आधारित थे। पुलिस ने इन मामलों को मिला (क्लब) दिया था। अदालत ने इस पर सवाल उठाया था।
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कड़कड़डूमा अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने दिल्ली पुलिस से पूछा था कि दंगा, चोरी और आगजनी के पांच मामले जो भजनपुरा के तीन अलग ब्लॉकों सी, डी और ई में अलग-अलग तारीखों पर हुए थे, उन्हें क्यों एक ही एफआईआर और आरोपपत्र में मिला दिया गया।
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थाना भजनपुरा एसएचओ ने दस सितंबर को अदालत में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर कहा कि डी और ई ब्लॉक में दंगों की शिकायतों पर अलग-अलग जांच की जाएगी। इनमें जांच के बाद तीन आरोपपत्र दाखिल किए जाएंगे। कोर्ट ने इस बात को स्वीकार कर लिया है।
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इनके अलावा सी ब्लॉक में दंगों से जुड़ी दो शिकायतों के संबंध में पहले से दाखिल आरोपपत्र पर विचार करने की सहमति प्रदान की है।
पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों नीरज और मनीष को दो शिकायतों के आधार पर गिरफ्तार किया था। ये शिकायतें दुकानदारों ने देकर आरोप लगाया था कि दंगों के दौरान दंगाइयों ने उनकी दुकानों में लूटपाट और तोड़फोड़ की थी।
अदालत ने इन मामलों में आरोप तय करते हुए आरोपियों के खिलाफ लगाई गई आगजनी की धारा को हटा दिया। अदालत ने इस बात पर गौर किया कि न दुकानदारों ने ये आरोप लगाया था और न इसकी पुष्टि के लिए कोई सीसीटीवी फुटेज पेश की गई।
अदालत ने कहा कि शिकायतों और बयानों को बारीकी से देखने के बाद पता चलता है कि किसी ने आरोपियों की दंगाइयों की उस भीड़ के हिस्से के रूप में पहचान नहीं की है जिसने दुकानों में तोड़फोड़ की थी। दुकानों में आगजनी का भी आरोप नहीं लगाया गया था। इसके मद्देनजर आरोपियों के खिलाफ आगजनी का मामला नहीं बनता।
अदालत ने कहा कि जो फोटो पुलिस ने पेश किए हैं उनसे भी आग या विस्फोटकों शरारत का मामला नहीं बनता। इसके अलावा पुलिस ने घटना की कोई सीसीटीवी फुटेज या वीडियो क्लिप पेश नहीं की है। वहीं पुलिस ने 24 और 25 फरवरी की दो घटनाओं को एक ही एफआईआर में मिला दिया। क्या पुलिस ऐसा कर सकती थी, इस पर मुकदमे की सुनवाई के दौरान विचार किया जाएगा।

अदालत ने आरोपियों के खिलाफ आगजनी का मामला नहीं बनता। इसके अलावा दंगा, हथियारों से लैस होकर दंगा करना, अवैध रूप से जमा होना, चोरी, शरारत करना, अनाधिकृत प्रवेश करना आदि धाराएं मजिस्ट्रेट के समक्ष सुनवाई योग्य हैं। इसलिए इस मामले को सुनवाई के लिए मुख्य महानगर दंडाधिकारी के समक्ष भेजा जा रहा है।
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