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Noida News: रामलीला मंचन के लिए सिंगल विंडो सिस्टम से मिलेंगी अनुमतियां
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डीएम कार्यालय में मिलेगी अनुमति, उपराज्यपाल की अध्यक्षता में राजनिवास में हुई बैठक में लिया निर्णय
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22 सितंबर से दो अक्तूबर तक होगा मंचन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
रामलीला मंचन के लिए अब सिंगल विंडो सिस्टम से अनुमतियां दी जाएंगी। सभी अनुमतियां जिला स्तर पर डीएम कार्यालय से मिलेंगी। एक विशेष समिति बनाई गई है जो आयोजन के दौरान किसी विवाद का मौके पर ही समाधान कर देंगी। उपराज्यपाल वीके सक्सेना की अध्यक्षता में बुधवार को राजनिवास में हुई बैठक में ये निर्णय लिया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इस बार रामलीला का मंचन 22 सितंबर से दो अक्तूबर तक होगा। आयोजकों को डीडीए, नगर निगम और अन्य विभागों से अलग-अलग एनओसी नहीं लेनी पड़ेगी। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत डीएम कार्यालय से ही सभी अनुमतियां मिलेंगी। रामलीला आयोजकों ने उनसे मुलाकात कर समस्याएं दूर करने की अपील की थी। दिल्ली में करीब 600 जगहों पर रामलीला मंचन होता है। करीब 100 बड़ी रामलीलाएं होती हैं। पिछले कुछ साल से रामलीला आयोजकों को एनओसी लेने में देरी के कारण मंचन में दिक्कतें आ रही थीं लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
ये हुए महत्वपूर्ण बदलाव
-सिंगल विंडो सिस्टम से सभी अनुमतियां डीएम कार्यालय से मिलेंगी। इससे आयोजकों को कई विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
-रामलीला के लिए जमीन का शुल्क 20 रुपये प्रति वर्गमीटर से घटाकर 15 रुपये प्रति वर्गमीटर किया गया।
-मनोरंजन स्थल की जगह बढ़ गई, झूलों और स्टॉल के लिए क्षेत्रफल को कुल जमीन का 25% से बढ़ाकर 40% किया गया।
-डीडीए उप-निदेशक और रामलीला महासंघ के दो पदाधिकारियों की विशेष समिति विवादों को तुरंत सुलझाएगी।
-हर रामलीला स्थल पर आपात स्थिति के लिए एक एंबुलेंस उपलब्ध रहेगी।
रामलीला दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामलीला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। भगवान श्रीराम के प्रति दिल्लीवासियों की आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है। ये कदम न केवल आयोजकों की मुश्किलें कम करेगा बल्कि इस परंपरा को और भव्य बनाएगा।
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22 सितंबर से दो अक्तूबर तक होगा मंचन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
रामलीला मंचन के लिए अब सिंगल विंडो सिस्टम से अनुमतियां दी जाएंगी। सभी अनुमतियां जिला स्तर पर डीएम कार्यालय से मिलेंगी। एक विशेष समिति बनाई गई है जो आयोजन के दौरान किसी विवाद का मौके पर ही समाधान कर देंगी। उपराज्यपाल वीके सक्सेना की अध्यक्षता में बुधवार को राजनिवास में हुई बैठक में ये निर्णय लिया गया।
बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि इस बार रामलीला का मंचन 22 सितंबर से दो अक्तूबर तक होगा। आयोजकों को डीडीए, नगर निगम और अन्य विभागों से अलग-अलग एनओसी नहीं लेनी पड़ेगी। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत डीएम कार्यालय से ही सभी अनुमतियां मिलेंगी। रामलीला आयोजकों ने उनसे मुलाकात कर समस्याएं दूर करने की अपील की थी। दिल्ली में करीब 600 जगहों पर रामलीला मंचन होता है। करीब 100 बड़ी रामलीलाएं होती हैं। पिछले कुछ साल से रामलीला आयोजकों को एनओसी लेने में देरी के कारण मंचन में दिक्कतें आ रही थीं लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
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ये हुए महत्वपूर्ण बदलाव
-सिंगल विंडो सिस्टम से सभी अनुमतियां डीएम कार्यालय से मिलेंगी। इससे आयोजकों को कई विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
-रामलीला के लिए जमीन का शुल्क 20 रुपये प्रति वर्गमीटर से घटाकर 15 रुपये प्रति वर्गमीटर किया गया।
-मनोरंजन स्थल की जगह बढ़ गई, झूलों और स्टॉल के लिए क्षेत्रफल को कुल जमीन का 25% से बढ़ाकर 40% किया गया।
-डीडीए उप-निदेशक और रामलीला महासंघ के दो पदाधिकारियों की विशेष समिति विवादों को तुरंत सुलझाएगी।
-हर रामलीला स्थल पर आपात स्थिति के लिए एक एंबुलेंस उपलब्ध रहेगी।
रामलीला दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत
मुख्यमंत्री ने कहा कि रामलीला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है। भगवान श्रीराम के प्रति दिल्लीवासियों की आस्था पीढ़ियों से चली आ रही है। ये कदम न केवल आयोजकों की मुश्किलें कम करेगा बल्कि इस परंपरा को और भव्य बनाएगा।
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