ऐसा भी होता है क्या: वैक्सीन न लगवाने के अजीब बहाने, कुछ डरकर नदी में कूदे तो कुछ...
देश में जारी वैक्सीनेशन की सुस्त रफ्तार के बीच एक बड़ा संकट अलग-अलग भ्रांतियों का भी है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कई लोग टीका लगवाने से बच रहे हैं। इसके पीछे किस्म-किस्म के तर्क भी दे रहे हैं। इन्हें जानकर आप दंग रह जाएंगे।
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कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने एक बार फिर जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इसकी रोकथाम और बचाव के लिए कई तरह के प्रयास भी किए जा रहे हैं लेकिन तमाम कारणों से इसमें बाधाएं आ रही हैं। पहली लहर में तो लोगों के पास सीमित उपचार के विकल्प और सख्त पाबंदियों के पालन के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं था। सभी को जल्द से जल्द वैक्सीन के उपलब्ध होने का इंतजार था।
इस बार जब लोगों के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है और उन्हें वैक्सीन के दोनों डोज लगाने के लिए जागरूक किया जा रहा है तो जनता का एक अलग ही चेहरा सामने आ रहा है। अफवाहों और अज्ञानता के चक्कर में लोग वैक्सीन से बचने के लिए इस तरह की लापरवाहियां कर रहे हैं जिन्हें जानकर आप भी दंग रह जाएंगे। आइए बात करते हैं उत्तर प्रदेश में वैक्सीनेशन के दौरान लोगों की ऐसी प्रतिक्रियाओं के बारे में जिनसे सभी लोग हैरान रह गए:
बाराबंकी : वैक्सीन से बचने के लिए लोग नदी में कूदे
बाराबंकी जिले के सिसौड़ा गांव की यह घटना देश भर में चर्चा का विषय बन गई है। कुछ दिनों पहले यहां वैक्सीन लगाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की एक टीम पहुंची थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम को देख गांव के कई लोग डर गए और पास स्थित सरयू नदी में कूद गए। इसे देख स्वास्थ्य विभाग के लोग हक्का-बक्का हो गए और गांव वालों से नदी से बाहर निकलने के लिए आग्रह करने लगे।
स्वास्थ्य कर्मियों की लाख मिन्नतों के बाद भी गांव वाले जब नदी से बाहर नहीं निकले, तो उपजिलाधिकारी को बुलाना पड़ा। इसके बाद रामनगर के उपजिलाधिकारी राजीव शुक्ल और नोडाल अधिकारी राहुल त्रिपाठी के समझाने के बाद गांव के लोग नदी से बाहर निकले और वैक्सीन लगवाने के लिए राजी हुए। गौरतलब बात यह है कि पूरे गांव में केवल 14 लोगों ने ही वैक्सीन लगवाया।
शाहजहांपुर : वैक्सीन के डर से भाग रहे ग्रामीण
सरकार का टीकाकरण अभियान शाहजहांपुर में अफवाहों और अज्ञानता का शिकार होने के कारण कमजोर पड़ गया है। यहां तो टीकाकरण के लिए ग्रामीणों को प्रेरित करने के सरकारी प्रयास धरातल पर काम करते नहीं दिख रहे हैं। यही वजह है कि टीकाकरण के बाद बीमार पड़ने और मौत होने की अफवाह जागरूकता अभियान पर भारी पड़ रही हैं। ग्रामीण अपने प्रधान की बात मानने को भी तैयार नहीं हैं। यहां तक कि टीकाकरण के लिए कहने पर गांव में काम करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों से झगड़े पर भी उतारू हो जाते हैं।
जालौन : बदमाशों ने फेंकी दवाइयां और कोरोना जांच टीम से की अभद्रता
जालौन के कठपुरवा गांव में तीन संक्रमित मरीज मिले थे, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में कैंप लगाकर जांच करने के लिए गई थी। टीम परिषदीय विद्यालय में संक्रमितों के संपर्क में आने वालों की जांच पड़ताल कर ही रही थी कि तभी छह ग्रामीण आ धमके और टीम के साथ अभद्रता करने लगे।
स्वास्थ्य टीम ने मना किया तो उक्त युवकों ने उनके साथ धक्कामुक्की शुरू कर दी। इतना ही नहीं, वहां रखी दवाइयों व कागजों को उठाकर इधर-उधर फेंकने लगे। यह देख शिविर में अफरातफरी मच गई और सभी भागने लगे। तभी टीम ने घटना की जानकारी चिकित्सा अधीक्षक को फोन पर कर दी। इससे पहले कि अधीक्षक पुलिस को लेकर मौके पर पहुंचते तब तक उपद्रवी भाग निकले।
हाथरस : गांव-गांव घूमकर मरीज खोज रही टीम
हाथरस में कोरोना संक्रमण के साथ ही ब्लैक फंगस का भी खतरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में लोगों को सही समय से इलाज करवाना जरूरी है, लेकिन हालत यह है कि मरीज इलाज के लिए अस्पताल पहुंचने से कतरा रहे हैं। हाथरस जिला अस्पताल में जितने वेंटिलेटर हैं, वह सक्रिय हैं, लेकिन कोरोना मरीजों को खोजने के लिए टीमें लगातार गांव-गांव जा रही हैं और लोगों की जांचें कर रही हैं।