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Noida News: जिम्मेदारियों का सफर, मां और शिक्षक की दोहरी भूमिका निभा रहीं महिलाएं
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खुशी शर्मा
नोएडा। स्कूल में बच्चों को पढ़ाने, उनकी शंकाएं दूर करने और अनुशासन सिखाने के बाद कई महिला शिक्षिकाओं की दूसरी पारी घर लौटते ही शुरू हो जाती है। घर पहुंचते ही अपने बच्चों की पढ़ाई, उनकी जरूरतों और परिवार की जिम्मेदारियों को संभालना उनकी दिनचर्या का हिस्सा है। शहर की कई महिला शिक्षिकाएं वर्षों से मां और शिक्षक की दोहरी भूमिका को जिम्मेदारी के साथ निभा रही हैं। उनके लिए शिक्षण सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि पैशन और समाज के प्रति जिम्मेदारी भी है।
सेक्टर-19 निवासी निट्टी दिमन करीब 23 वर्षों से बच्चों को पढ़ा रही हैं। उनका कहना है कि शिक्षण अब उनकी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। बच्चों को पढ़ाने से उन्हें खुशी मिलती है और वह खुद भी अनुशासन में रहती हैं, ताकि अपने बच्चों के लिए उदाहरण बन सकें। खासतौर पर अंडरप्रिविलेज्ड और धीरे सीखने वाले बच्चों को पढ़ाकर उनका भविष्य संवारना उन्हें सबसे ज्यादा अच्छा लगता है। उनके मुताबिक, मां और शिक्षक की भूमिकाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और दोनों जिम्मेदारियां उन्होंने अपनी इच्छा से चुनी हैं।
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सेक्टर-120 निवासी अमृता बोरा पिछले 13 वर्षों से शिक्षण क्षेत्र से जुड़ी हैं। वह बताती हैं कि परीक्षा के दिनों में जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। स्कूल के विद्यार्थियों की तैयारी कराने के साथ अपने बच्चों की परीक्षा की तैयारी भी करानी होती है। ऐसे में देर रात तक पढ़ाने के बाद सुबह स्कूल पहुंचना चुनौतीपूर्ण रहता है। परिवार के सहयोग से वह दोनों जिम्मेदारियां निभा पाती हैं।
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सेक्टर-121 निवासी सीमा देवी करीब 25 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रही हैं। उनके अनुसार, शिक्षक की जिम्मेदारी मां बनने से भी अधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि शिक्षक को एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों को पढ़ाने और संभालने की जिम्मेदारी होती है। बच्चों के साथ संवाद करना और उन्हें अपने अनुभव बताना उन्हें पसंद है।
सेक्टर-23 निवासी पूजा शर्मा पिछले सात-आठ वर्षों से शिक्षण क्षेत्र में हैं। उनका कहना है कि मां, पत्नी और शिक्षक की जिम्मेदारियां निभाना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन काम को पैशन के साथ किया जाए तो इसे संभालना आसान हो जाता है। परीक्षा के दिनों में पेपर तैयार करने और बच्चों की पढ़ाई देखने के बावजूद वह इसे दबाव नहीं, बल्कि जिम्मेदारी मानती हैं।