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हादसे रोकने के लिए यमुना एक्सप्रेसवे पर नहीं दौड़ सकेंगे ओवरलोड वाहन
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ग्रेटर नोएडा। सड़क सुरक्षा समिति की बृहस्पतिवार रात हुई बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों को तत्काल यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसे रोकने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कार्ययोजना बनाकर एक माह में सभी कार्य शुरू करने के लिए कहा। वहीं, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद प्राधिकरण और जेपी प्रबंधन ने कार्ययोजना बनानी शुरू कर दी है। अब ओवरलोड वाहन एक्सप्रेसवे पर नहीं चल पाएंगे। तीनों टोल पर वजन तोला जाएगा। यदि ओवरलोड वाहन होगा जीरो प्वाइंट पर ही रोक लिया जाएगा।
सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों से अध्ययन कराने के बाद यमुना एक्सप्रेसवे पर खामियों को दूर कराया गया था, लेकिन बृहस्पतिवार को सड़क सुरक्षा समिति की बैठक लखनऊ में बुलाई गई थी। इसमें सभी एक्सप्रेसवे पर चर्चा की गई। साथ ही, यमुना एक्सप्रेसवे पर इसी माह हुए दो हादसों में 12 लोगों की मौत के बाद हादसे रोकने के सख्त निर्देश दिए गए। अब प्राधिकरण और जेपी प्रबंधन मिलकर एक्सप्रेसवे पर ओवरलोड वाहनों को एक्सप्रेसवे पर चढ़ने नहीं देंगे। बीच के टोल से चढ़ने वाले वाहनों का भी वहां पर वजन कराया जाएगा और किसी भी हालत में उनको आगे नहीं जाने दिया जाएगा। चालान की भी कार्रवाई होगी। इसके अलावा बस और ट्रक को एक लेन में ही चलाने की योजना बनाई जा रही है। यदि दूसरी लेन में प्रवेश किया तो चालान किया जाएगा। कार और दोपहिया वाहनों के लिए भी अलग-अलग लेन बनेंगी। इस कार्ययोजना पर सोमवार को जेपी प्रबंधन के साथ बैठक होगी और फिर काम शुरू कर दिया जाएगा।
40 किमी दूरी को 42 मिनट में किया था तय
यमुना प्राधिकरण के सीईओ ने बताया कि 12 मई को हुए हादसे में बोलेरो ने मथुरा से जेवर तक 40 किमी की दूूरी को 42 मिनट में तय किया था। इसका मतलब है कि 100 किमी की रफ्तार थी और वह भी सुबह के समय जब नींद का समय था और कार में अधिकतर लोग सो रहे थे। इससे चालक को नींद आना सामान्य बात थी और आगे जा रहे डंपर की रफ्तार काफी धीमी थी।
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पांच मिनट में एक्सप्रेसवे पर मिलेगी मदद
सीईओ ने बताया कि एक्सप्रेसवे पर हादसे के पांच मिनट में क्विक रिस्पांस टीम पहुंचेगी और तत्काल अस्पताल पहुंचाने में मदद करेगी। इससे जीवन बचाने का गोल्डन टाइम हादसे में घायलों को मिलेगा। इसके लिए क्विक रिस्पांस टीम और एंबुलेंस की संख्या भी दोगुनी की जा रही है और मुख्यमंत्री ने चार थानों को भी इसी माह अनुमति देने का आश्वासन दिया है।
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सीईओ डॉ. अरुणवीर सिंह ने बताया कि आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों से अध्ययन कराने के बाद यमुना एक्सप्रेसवे पर खामियों को दूर कराया गया था, लेकिन बृहस्पतिवार को सड़क सुरक्षा समिति की बैठक लखनऊ में बुलाई गई थी। इसमें सभी एक्सप्रेसवे पर चर्चा की गई। साथ ही, यमुना एक्सप्रेसवे पर इसी माह हुए दो हादसों में 12 लोगों की मौत के बाद हादसे रोकने के सख्त निर्देश दिए गए। अब प्राधिकरण और जेपी प्रबंधन मिलकर एक्सप्रेसवे पर ओवरलोड वाहनों को एक्सप्रेसवे पर चढ़ने नहीं देंगे। बीच के टोल से चढ़ने वाले वाहनों का भी वहां पर वजन कराया जाएगा और किसी भी हालत में उनको आगे नहीं जाने दिया जाएगा। चालान की भी कार्रवाई होगी। इसके अलावा बस और ट्रक को एक लेन में ही चलाने की योजना बनाई जा रही है। यदि दूसरी लेन में प्रवेश किया तो चालान किया जाएगा। कार और दोपहिया वाहनों के लिए भी अलग-अलग लेन बनेंगी। इस कार्ययोजना पर सोमवार को जेपी प्रबंधन के साथ बैठक होगी और फिर काम शुरू कर दिया जाएगा।
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40 किमी दूरी को 42 मिनट में किया था तय
यमुना प्राधिकरण के सीईओ ने बताया कि 12 मई को हुए हादसे में बोलेरो ने मथुरा से जेवर तक 40 किमी की दूूरी को 42 मिनट में तय किया था। इसका मतलब है कि 100 किमी की रफ्तार थी और वह भी सुबह के समय जब नींद का समय था और कार में अधिकतर लोग सो रहे थे। इससे चालक को नींद आना सामान्य बात थी और आगे जा रहे डंपर की रफ्तार काफी धीमी थी।
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पांच मिनट में एक्सप्रेसवे पर मिलेगी मदद
सीईओ ने बताया कि एक्सप्रेसवे पर हादसे के पांच मिनट में क्विक रिस्पांस टीम पहुंचेगी और तत्काल अस्पताल पहुंचाने में मदद करेगी। इससे जीवन बचाने का गोल्डन टाइम हादसे में घायलों को मिलेगा। इसके लिए क्विक रिस्पांस टीम और एंबुलेंस की संख्या भी दोगुनी की जा रही है और मुख्यमंत्री ने चार थानों को भी इसी माह अनुमति देने का आश्वासन दिया है।