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Noida News: प्लास्टिक मुक्त भारत बनाने में मदद कर रहे युवा
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फोटो है
-प्रकृति संरक्षण के लिए खुद ही यमुना में जाकर साफ कर रहे प्लास्टिक और कचरा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। प्रकृति संरक्षण के लिए युवा बेहद संवेदनशील हैं। ये लोग प्लास्टिक को यमुना और आसपास के एरिया में जाकर खुद साफ कर रहे हैं। वहीं, कुछ युवा एनजीओ के माध्यम से प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने प्लास्टिक लाओ और शिक्षा पाओ अभियान शुरू किया है। इसके तहत बच्चों से सिंगल यूज प्लास्टिक मंगाया जा रहा है और बदले में उन्हें शिक्षा दी जा रही है। यही नहीं, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर भी छात्रों को जागरूक करने के साथ ही उनके कार्य में हाथ बंटा रहे हैं। विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर हमने ऐसे ही कुछ लोगों से बात की ...
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प्लास्टिक लाओ और शिक्षा पाओ
चैलेंजर्स की पाठशाला के संस्थापक प्रिंस शर्मा ने बताया कि प्रकृति संरक्षण के लिए हम बच्चों को भी जागरूक कर रहे हैं। इसके तहत हमने प्लास्टिक लाओ शिक्षा पाओ अभियान शुरू किया था। इसके तहत हम गरीब और असहाय बच्चों को निशुल्क पढ़ाते हैं और उनसे कोई फीस नहीं लेते। इसके बजाय, हम उनसे वेस्ट सिंगल यूज प्लास्टिक जमा करवाते हैं। इस माध्यम से बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ती है। बच्चों को वेस्ट प्लास्टिक से नई चीजें और आकृतियां बनाने का प्रशिक्षण देते हैं।
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300 किलो प्लास्टिक निकाला और 2000 पौधे लगवाए
सेक्टर 93ए स्थित सिल्वर सिटी निवासी डॉ. प्रशांत शर्मा एमिटी विवि में समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत ने बताया कि उन्होंने चेंजमेकर्स क्लब की स्थापना की है। इस क्लब का मुख्य उद्देश्य छात्रों में संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों की जागरूकता बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को एक जन आंदोलन के रूप में बढ़ाना है। इस क्लब से अबतक 100 से अधिक छात्र एवं छात्राएं जुड़ चुके हैं और पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। इसके तहत नदियों की सफाई की जा रही है और पौधरोपण और नुक्कड़ नाटक का आयोजन भी किया जा रहा है।
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हर सप्ताह करते हैं यमुना की सफाई
एमिटी विवि के समाज कार्य विभाग के छात्र आयुष कुमार लाल ने बताया कि वह समाज कार्य विभाग के छात्र हैं और पिछले एक साल से पर्यावरण संरक्षण पर काम कर रहे हैं। आयुष ने बताया कि वह हर सप्ताह पर यमुना में सफाई करने जाते हैं और अबतक उन्होंने 60 किलो प्लास्टिक व अन्य कचरा यमुना से साफ किया है। इस कचरे को रिसाइकिल सेंटर पर भेजा जाता है। इसके अलावा अबतक 20 पौधे भी लगा चुके हैं। हम अपनी पूरी टीम के साथ जाते हैं और अलग-अलग गांवों और सेक्टरों में काम करते हैं।
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-प्रकृति संरक्षण के लिए खुद ही यमुना में जाकर साफ कर रहे प्लास्टिक और कचरा
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। प्रकृति संरक्षण के लिए युवा बेहद संवेदनशील हैं। ये लोग प्लास्टिक को यमुना और आसपास के एरिया में जाकर खुद साफ कर रहे हैं। वहीं, कुछ युवा एनजीओ के माध्यम से प्लास्टिक मुक्त भारत अभियान का हिस्सा बन रहे हैं। उन्होंने प्लास्टिक लाओ और शिक्षा पाओ अभियान शुरू किया है। इसके तहत बच्चों से सिंगल यूज प्लास्टिक मंगाया जा रहा है और बदले में उन्हें शिक्षा दी जा रही है। यही नहीं, कॉलेज और यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर भी छात्रों को जागरूक करने के साथ ही उनके कार्य में हाथ बंटा रहे हैं। विश्व प्रकृति संरक्षण दिवस पर हमने ऐसे ही कुछ लोगों से बात की ...
प्लास्टिक लाओ और शिक्षा पाओ
चैलेंजर्स की पाठशाला के संस्थापक प्रिंस शर्मा ने बताया कि प्रकृति संरक्षण के लिए हम बच्चों को भी जागरूक कर रहे हैं। इसके तहत हमने प्लास्टिक लाओ शिक्षा पाओ अभियान शुरू किया था। इसके तहत हम गरीब और असहाय बच्चों को निशुल्क पढ़ाते हैं और उनसे कोई फीस नहीं लेते। इसके बजाय, हम उनसे वेस्ट सिंगल यूज प्लास्टिक जमा करवाते हैं। इस माध्यम से बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ती है। बच्चों को वेस्ट प्लास्टिक से नई चीजें और आकृतियां बनाने का प्रशिक्षण देते हैं।
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300 किलो प्लास्टिक निकाला और 2000 पौधे लगवाए
सेक्टर 93ए स्थित सिल्वर सिटी निवासी डॉ. प्रशांत शर्मा एमिटी विवि में समाज कार्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत ने बताया कि उन्होंने चेंजमेकर्स क्लब की स्थापना की है। इस क्लब का मुख्य उद्देश्य छात्रों में संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों की जागरूकता बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को एक जन आंदोलन के रूप में बढ़ाना है। इस क्लब से अबतक 100 से अधिक छात्र एवं छात्राएं जुड़ चुके हैं और पर्यावरणीय मुद्दों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। इसके तहत नदियों की सफाई की जा रही है और पौधरोपण और नुक्कड़ नाटक का आयोजन भी किया जा रहा है।
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हर सप्ताह करते हैं यमुना की सफाई
एमिटी विवि के समाज कार्य विभाग के छात्र आयुष कुमार लाल ने बताया कि वह समाज कार्य विभाग के छात्र हैं और पिछले एक साल से पर्यावरण संरक्षण पर काम कर रहे हैं। आयुष ने बताया कि वह हर सप्ताह पर यमुना में सफाई करने जाते हैं और अबतक उन्होंने 60 किलो प्लास्टिक व अन्य कचरा यमुना से साफ किया है। इस कचरे को रिसाइकिल सेंटर पर भेजा जाता है। इसके अलावा अबतक 20 पौधे भी लगा चुके हैं। हम अपनी पूरी टीम के साथ जाते हैं और अलग-अलग गांवों और सेक्टरों में काम करते हैं।