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Noida News: बीटेक से महंगी नर्सरी की पढ़ाई
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बीटेक से महंगी हुई नर्सरी की पढ़ाई
- नर्सरी से फर्स्ट तक पहुंचने में अभिभावकों को शिक्षा पर खर्च करने पड़ रहे सात से आठ लाख रुपये
- कुछ स्कूलों का बजट 20 लाख के पार, 14 हजार से 25 हजार तक पड़ रही महीने की ट्यूशन फीस
- एक्टिविटी के नाम पर साल भर में खर्च हो रहा मोटा पैसा, कट रही अभिभावकों की जेब
नेहा शर्मा
नोएडा। शहर के सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड के पब्लिक और कान्वेंट स्कूलों में केजी से नर्सरी तक की पढ़ाई बीटेक से भी महंगी हो गई है। इन कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावकों को सालाना दो से तीन लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। कुछ स्कूलों में पढ़ाने के लिए तो यह बजट पांच लाख रुपये तक पहुंचा गया है। इससे अलावा एक्टिविटी के नाम पर भी अभिभावकों को जेब खाली हो रही है। जबकि बीटेक के एक वर्ष की पढ़ाई का खर्चा करीब 1.20 से 1.70 लाख रुपये है।
अब अधिकतर अभिभावक अपने बच्चे को निजी स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। इसलिए नर्सरी में दाखिले के लिए मारामारी रहती है। अभिभावक दाखिले के लिए डोनेशन तक देने को तैयार रहते हैं। नर्सरी में दाखिले के दौरान अलग-अलग स्कूलों में 50 से एक लाख रुपये एडमिशन फीस, ड्रेस, किताबें समेत अन्य शुल्क के रूप में ले रहे हैं। इसके अलावा 10 से 14 हजार रुपये के बीच महीने की फीस है। अभिभावकों को साल में डेढ़ से दो लाख रुपये का खर्चा आता है। ऐसे में नर्सरी से फर्स्ट तक की पढ़ाई में अभिभावकों के सात से आठ लाख रुपये तक खर्च हो जाते हैं। कुछ स्कूलों में एडमिशन फीस ही 1.50 लाख रुपये हैं। ट्यूशन फीस प्रतिमाह 25 हजार से ज्यादा है। इसके अलावा अन्य शुल्क मिलाकर अभिभावक को पढ़ाई पर सालाना 5 लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। किताबों के लिए अलग से शुल्क देना पड़ रहा है।
जिसका कमीशन ज्यादा उस प्रकाशक की किताबें
निजी स्कूल कमीशन के खेल में एनसीईआरटी की किताबों के अलावा रेफरेंस बुक के नाम पर निजी प्रकाशन की किताबें भी लगवा रहे हैं। बुक के साथ स्टेशनरी भी अभिभावकों को स्कूल से ही लेनी पड़ रही है। ऐसे में सिर्फ किताबें लेने में ही 5 से 9 हजार रुपये का खर्चा आ जाता है।
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आरटीई के तहत भी नहीं देते दाखिला
निजी स्कूलों को एक-एक सीट पर लाखों की कमाई होती है। इसलिए स्कूल आरटीई के तहत दाखिला देने से भी बचते हैं। कई स्कूल ऐसे हैं जो आरटीई के नाम पर एक भी दाखिला नहीं दे रहे हैं। ऐसे स्कूलों की दर्जनों शिकायतें शिक्षा विभाग के पास पहुंची हैं।
कुछ स्कूल प्रतिमाह 14 हजार से 25 हजार रुपये तक ट्यूशन फीस ले रहे हैं। इसके अलावा एडमिशन फीस और अन्य शुल्क अलग है। स्कूलों ने अपने अनुसार फीस निर्धारित कर दी है। उच्च शिक्षा से भी नर्सरी शिक्षा महंगी पड़ रही है।
यतेंद्र कसाना, अध्यक्ष, ऑल नोएडा पैरेंट्स एसोसिएशन
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- नर्सरी से फर्स्ट तक पहुंचने में अभिभावकों को शिक्षा पर खर्च करने पड़ रहे सात से आठ लाख रुपये
- कुछ स्कूलों का बजट 20 लाख के पार, 14 हजार से 25 हजार तक पड़ रही महीने की ट्यूशन फीस
- एक्टिविटी के नाम पर साल भर में खर्च हो रहा मोटा पैसा, कट रही अभिभावकों की जेब
नेहा शर्मा
नोएडा। शहर के सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड के पब्लिक और कान्वेंट स्कूलों में केजी से नर्सरी तक की पढ़ाई बीटेक से भी महंगी हो गई है। इन कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्रों के अभिभावकों को सालाना दो से तीन लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। कुछ स्कूलों में पढ़ाने के लिए तो यह बजट पांच लाख रुपये तक पहुंचा गया है। इससे अलावा एक्टिविटी के नाम पर भी अभिभावकों को जेब खाली हो रही है। जबकि बीटेक के एक वर्ष की पढ़ाई का खर्चा करीब 1.20 से 1.70 लाख रुपये है।
अब अधिकतर अभिभावक अपने बच्चे को निजी स्कूल में पढ़ाना चाहते हैं। इसलिए नर्सरी में दाखिले के लिए मारामारी रहती है। अभिभावक दाखिले के लिए डोनेशन तक देने को तैयार रहते हैं। नर्सरी में दाखिले के दौरान अलग-अलग स्कूलों में 50 से एक लाख रुपये एडमिशन फीस, ड्रेस, किताबें समेत अन्य शुल्क के रूप में ले रहे हैं। इसके अलावा 10 से 14 हजार रुपये के बीच महीने की फीस है। अभिभावकों को साल में डेढ़ से दो लाख रुपये का खर्चा आता है। ऐसे में नर्सरी से फर्स्ट तक की पढ़ाई में अभिभावकों के सात से आठ लाख रुपये तक खर्च हो जाते हैं। कुछ स्कूलों में एडमिशन फीस ही 1.50 लाख रुपये हैं। ट्यूशन फीस प्रतिमाह 25 हजार से ज्यादा है। इसके अलावा अन्य शुल्क मिलाकर अभिभावक को पढ़ाई पर सालाना 5 लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। किताबों के लिए अलग से शुल्क देना पड़ रहा है।
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जिसका कमीशन ज्यादा उस प्रकाशक की किताबें
निजी स्कूल कमीशन के खेल में एनसीईआरटी की किताबों के अलावा रेफरेंस बुक के नाम पर निजी प्रकाशन की किताबें भी लगवा रहे हैं। बुक के साथ स्टेशनरी भी अभिभावकों को स्कूल से ही लेनी पड़ रही है। ऐसे में सिर्फ किताबें लेने में ही 5 से 9 हजार रुपये का खर्चा आ जाता है।
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आरटीई के तहत भी नहीं देते दाखिला
निजी स्कूलों को एक-एक सीट पर लाखों की कमाई होती है। इसलिए स्कूल आरटीई के तहत दाखिला देने से भी बचते हैं। कई स्कूल ऐसे हैं जो आरटीई के नाम पर एक भी दाखिला नहीं दे रहे हैं। ऐसे स्कूलों की दर्जनों शिकायतें शिक्षा विभाग के पास पहुंची हैं।
कुछ स्कूल प्रतिमाह 14 हजार से 25 हजार रुपये तक ट्यूशन फीस ले रहे हैं। इसके अलावा एडमिशन फीस और अन्य शुल्क अलग है। स्कूलों ने अपने अनुसार फीस निर्धारित कर दी है। उच्च शिक्षा से भी नर्सरी शिक्षा महंगी पड़ रही है।
यतेंद्र कसाना, अध्यक्ष, ऑल नोएडा पैरेंट्स एसोसिएशन