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Noida News: अब पानी का रिकॉर्ड रखेगा प्राधिकरण
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अब पानी का रिकॉर्ड रखेगा प्राधिकरण
-जल विभाग के ओएसडी ने दिए अधिकारियों को निर्देश
माई सिटी रिपोर्ट
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण की ओर से अब पानी का रिकॉर्ड रखा जाएगा। कितना पानी आया और कितने की आपूर्ति हुई। इसका रोजाना एक आंकड़ा तैयार होगा। इसका मकसद शहर के लोगों की परेशानियों को दूर करना और प्राधिकरण की ओर से खुद का आंकलन करना होगा। इस बाबत जल विभाग के प्रभारी ओएसडी अविनाश त्रिपाठी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहीं-कहीं बरसाती कुओं का निरीक्षण भी किया।
प्राधिकरण की ओर से शहर में ट्यूबवेल संचालन के अलावा भूमिगत जलाशय (यूजीआर) में अनुमान के मुताबिक कितना पानी आया, सबसे पहले इस आंकड़े को नोट किया जाएगा। इसके बाद पूरे दिन कितने जल की आपूर्ति हुई, यह पता लगाया जाएगा। इससे शहर के निवासियों की जलापूर्ति में कमी पता चल सकेगी। हालांकि प्राधिकरण का दावा है कि जलापूर्ति से कई गुना अधिक पानी प्राधिकरण के भूमिगत जलाशयों में जमा रहता है।
इसके अलावा कहीं कोई खराब नजर आती है तो उसे ठीक कराया जाएगा। जितने भी ट्यूबवेल, यूजीआर, सीवेज पंपिंग स्टेशन हैं। सभी की जांच होगी। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि ये कितने क्रियाशील हैं। जहां कहीं भी अतिक्रमण आदि की शिकायत मिलती है तो उसे हटाने की कार्रवाई होगी। यहां हरियाली विकसित करने की भी कोशिश होगी। पानी में टीडीएस के स्तर को कम करने के लिए गंगाजल की मात्रा को बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
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-जल विभाग के ओएसडी ने दिए अधिकारियों को निर्देश
माई सिटी रिपोर्ट
नोएडा। नोएडा प्राधिकरण की ओर से अब पानी का रिकॉर्ड रखा जाएगा। कितना पानी आया और कितने की आपूर्ति हुई। इसका रोजाना एक आंकड़ा तैयार होगा। इसका मकसद शहर के लोगों की परेशानियों को दूर करना और प्राधिकरण की ओर से खुद का आंकलन करना होगा। इस बाबत जल विभाग के प्रभारी ओएसडी अविनाश त्रिपाठी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहीं-कहीं बरसाती कुओं का निरीक्षण भी किया।
प्राधिकरण की ओर से शहर में ट्यूबवेल संचालन के अलावा भूमिगत जलाशय (यूजीआर) में अनुमान के मुताबिक कितना पानी आया, सबसे पहले इस आंकड़े को नोट किया जाएगा। इसके बाद पूरे दिन कितने जल की आपूर्ति हुई, यह पता लगाया जाएगा। इससे शहर के निवासियों की जलापूर्ति में कमी पता चल सकेगी। हालांकि प्राधिकरण का दावा है कि जलापूर्ति से कई गुना अधिक पानी प्राधिकरण के भूमिगत जलाशयों में जमा रहता है।
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इसके अलावा कहीं कोई खराब नजर आती है तो उसे ठीक कराया जाएगा। जितने भी ट्यूबवेल, यूजीआर, सीवेज पंपिंग स्टेशन हैं। सभी की जांच होगी। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि ये कितने क्रियाशील हैं। जहां कहीं भी अतिक्रमण आदि की शिकायत मिलती है तो उसे हटाने की कार्रवाई होगी। यहां हरियाली विकसित करने की भी कोशिश होगी। पानी में टीडीएस के स्तर को कम करने के लिए गंगाजल की मात्रा को बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
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