होमगार्ड वेतन घोटालाः नोएडा पुलिस की जांच प्रदेश भर में बन रही नजीर, अन्य जिलों में भी होगी जांच
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फर्जी ड्यूटी दिखाकर होमगार्डों के वेतन निकासी मामले में नोएडा पुलिस की जांच प्रदेश के लिए नजीर बनी है। अब प्रदेश के अन्य जिलों में भी होमगार्डों के वेतन देने की जांच की कवायद शुरू हो रही है।
नोएडा पुलिस की जांच रिपोर्ट के बाद शासन स्तर पर इस मामले को लेकर कई बैठकें हुईं। इसमें इस तरह के फर्जीवाड़े को पकड़ने के लिए जांच कराने पर सहमति बनी। इसके बाद विभाग के मंत्री चेतन चौहान ने अन्य जिलों में इस तरह की जांच के आदेश दिए। इससे पहले नोएडा पुलिस ने अग्निशमन विभाग में ऑनलाइन एनओसी का फर्जीवाड़ा भी पकड़ा था।
इसमें एफएसओ कुलदीप कुमार को गिरफ्तार किया गया था। नोएडा पुलिस की इस कार्रवाई के बाद ऑनलाइन एनओसी में फर्जीवाड़ा रोकने की कवायद शासन स्तर पर हो रही है। के लिए एनओसी के आवेदकों को आधार नंबर अनिवार्य रूप से शामिल करने पर विमर्श चल रहा है।
जुलाई में मामला आया था सामने
जुलाई 2019 में एसएसपी वैभव कृष्ण के पास होमगार्डों की वेतन निकासी के फर्जीवाड़े की शिकायत आई थी। इसके बाद इसकी जांच एसपी सिटी विनीत जायसवाल ने की तो एक के बाद एक परतें खुलती गईं। होमगार्डों की तैनाती थानों के अलावा पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के कार्यालय में होती है।
एसपी सिटी ने जांच की तो पता चला कि मई व जून में ही करीब आठ लाख रुपये का घोटाला वेतन निकासी में हुआ। एसपी सिटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया। इसके बाद इस रिपोर्ट का शासन ने संज्ञान लिया। बुधवार को कोतवाली सूरजपुर में इस मामले में होमगार्ड के जिला कमांडेंट ऑफिस में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया।
कमांडेंट ऑफिस में नया मास्टर रोल किया जाता था तैयार
होमगार्ड को वेतन देने के लिए जो ओरिजिनल मस्टर रोल बनता था। उसे फाड़कर कमांडेंट ऑफिस में ही फर्जी मस्टर रोल बनाया जाता था। इस पर थानाध्यक्ष के फर्जी हस्ताक्षर व मुहरें लगाई जाती थीं।
जांच में यह बात भी सामने आई है कि एक खास कमांडेंट की तैनाती के दौरान सबसे अधिक अनियमितता बरती गई। पुलिस उस कमांडेंट की भूमिका की भी जांच कर रही है। इसमें एक अहम बात सामने आई है कि देहात क्षेत्र से अधिक शहरी क्षेत्र में तैनाती के दौरान अधिक अनियमितता बरती गई।
अग्निशमन विभाग में ऑनलाइन सिस्टम में भी पकड़ी थी सेंधमारी
नोएडा पुलिस ने सितंबर में अग्निशमन विभाग के ऑनलाइन सिस्टम में सेंधमारी कर एनओसी के नाम पर भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। इसमें एनओसी के नाम पर घूस लेने के आरोपी एफएसओ कुलदीप कुमार और फायर वेंडर अरविंद गुप्ता को नोएडा पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
इसकी जांच में पता चला था कि दोनों आरोपी मिलकर ऑनलाइन सिस्टम में सेंधमारी कर रहे थे। इसके लिए फायर वेंडर खुद व अपने सहयोगियों के नाम पर भवनों, विद्यालयों, अस्पतालों, उद्योगों के लिए एनओसी लेते थे। अग्निशमन विभाग के ऑनलाइन साइट पर जाकर एनओसी के लिए जो फॉर्म भरते थे। उसमें नाम, ई-मेल, मोबाइल नंबर वेंडर का होता था और पता उस संबंधित बिल्डिंग का।
पहले तो एनओसी जारी करने को लेकर बिल्डिंग मालिक से पैसे लेते थे। बाद में अग्निशमन विभाग की तरफ से बिल्डिंग के लिए जो भी अपडेट आता था वह वेंडर के नंबर व ई-मेल पर आता था। फिर वेंडर अग्निशमन अधिकारी के साथ मिलकर बिल्डिंग मालिक से पैसे ऐंठता था। नोएडा पुलिस ने इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी तो ऑनलाइन सिस्टम को दुरुस्त करने को लेकर बैठकें हुई। शासन स्तर पर यह बात चल रही है कि एनओसी के लिए आवेदन देने वाले अपना आधार नंबर भी देंगे। इससे फर्जीवाड़ारुकेगा।