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Noida News: 350 संस्थानों को नोटिस जारी, 17 इंडस्ट्रियल यूनिट्स की एनओसी रद्द

Mon, 09 Oct 2023 07:56 AM IST
अनुज कुमार नवीन कुमार, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
नवीन कुमार, अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Published by: अनुज कुमार Updated Mon, 09 Oct 2023 07:56 AM IST
सार

ग्रेटर नोएडा में भूजल विभाग ने एनओसी लेने के बाद नियमों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई की है। कई ने शुल्क जमा नहीं किया था। विभाग ने रिपोर्ट नहीं देने वाले 350 संस्थानों को नोटिस जारी किए हैं। 

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Noida Notice issued to 350 institutions and NOC 17 industrial units canceled
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में विभिन्न संस्थान एनओसी लेकर भूजल दोहन कर रहे हैं। इनमें से कई एनओसी की शर्तों का पालन नहीं कर रहे है। अब उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद विभाग ने रिपोर्ट नहीं देने वाले 350 संस्थानों को नोटिस जारी किए हैं। साथ ही एनओसी का शुल्क जमा नहीं करने वाले 17 औद्योगिक इकाइयों की एनओसी रद्द कर दी है। 

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350 से अधिक संस्थान ने भूगर्भ जल विभाग से एनओसी ली
गौतमबुद्ध नगर का भूगर्भ जल स्तर तेजी से गिर रहा है। इस कारण एनजीटी ने बिना अनुमति भूजल दोहन पर रोक लगा रखी हैं। सख्ती के बाद 350 से अधिक संस्थान ने भूगर्भ जल विभाग से एनओसी ली हैं। इनमें उद्योग, व्यवयायिक, बिल्डर समेत अन्य संस्थान शामिल हैं। लेकिन सभी नियमों का पालन नहीं कर रहे है। 
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वर्ष 2021 में 17 उद्योगों ने भूजल दोहन की एनओसी ली थी। एनओसी लेने के बाद उनको छह माह के अंदर शुल्क जमा करना था। जो 16 हजार से लेकर 18 लाख रुपये तक था, लेकिन किसी ने शुल्क जमा नहीं किया। इन सभी की एनओसी रद्द हो गई है। इस पर विभाग मेहरबान था। निरीक्षण कर कार्रवाई नहीं करने का फायदा उठाकर उद्योग लगातार भूजल दोहन करते आ रहे हैं। 
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एनओसी रद्द होने का नोटिस जारी
अब दो साल बाद विभाग ने 17 उद्योगों को एनओसी रद्द होने का नोटिस जारी किया है। उधर विभाग ने 350 संस्थान को नोटिस जारी कर नियमों का पालन करने का आदेश दिया है। इन सभी संस्थान ने भूजल उपयोग की एनओसी ली और शुल्क भी जमा किया, लेकिन अन्य नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। विभाग को हर माह रिपोर्ट उपलब्ध नहीं करा रहे हैं।

हर माह देनी होती है भूजल स्तर की रिपोर्ट
नियमों के तहत संस्थान को एनओसी लेने के बाद पीजोमीटर लगाना जरूरी है। पीजोमीटर भूजल स्तर बताता है। किसी भी संस्थान ने इसकी रिपोर्ट विभाग को नहीं दी है। साथ ही संस्थान को हर माह उपयोग होने वाले भूजल की जानकारी भी देनी जरूरी है। इसका भी पालन नहीं किया जा रहा है।

जिन संस्थानों ने एनओसी ली है, उन्हें शर्तों का पालन करना होगा। हाल ही में 350 संस्थानों को नोटिस जारी किए गए हैं। जवाब आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। - अंकिता राय, हाइड्रोलॉजिस्ट, भूगर्भ जल विभाग


1.10 रुपये प्रति किलोलीटर प्रति दिन है शुल्क की दर
भूजल उपयोग की एनओसी लेने वाले को 1.10 रुपये प्रति किलोलीटर प्रतिदिन की दर से शुल्क देना होता है। एनओसी की वैधता पांच वर्ष की होती है। एनओसी धारक को पांच साल का शुल्क जमा करना होता है। अगर एनओसी में तय मानक से अधिक पानी का उपयोग किया जाता है तो उसका भी शुल्क देना होगा, लेकिन जिले में इसकी निगरानी नहीं हो रही हैं।

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