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तीनों प्राधिकरणों की साझेदारी से साकार हुआ एयरपोर्ट का सपना
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यमुना प्राधिकरण में नोएडा एयरर्पोट की फाइनेंशियल बिड निकालते प्रमुख सचिव एसपी गोयल।
- फोटो : Grnoida
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तीनों प्राधिकरणों की साझेदारी से साकार हुआ एयरपोर्ट का सपना
ग्रेटर नोएडा। जेवर में नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के बनने का सपना अगर साकार हुआ है तो इसके पीछे नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरणों की सामूहिक साझेदारी बेहद अहम रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा एयरपोर्ट बनाने के लिए नियाल कंपनी गठित की तो उसमें सरकार और नोएडा की साझेदारी बराबर की रही, जबकि ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण का हिस्सा कम है।
नोएडा एयरपोर्ट बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने जून में नियाल को मंजूरी दी थी। प्रदेश सरकार ने अपने पास 37.5 फीसदी हिस्सेदारी रखी, जबकि तीनों प्राधिकरणों में नोएडा प्राधिकरण का हिस्सा सबसे ज्यादा हिस्सा (37.5 फीसदी) तय किया गया। ग्रेटर नोएडा व यीडा की हिस्सेदारी (12.5-12.5 फीसदी) है। करीब 5 माह पहले गठित कंपनी के खाते में करीब 4000 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। सभी हिस्सेदारों ने अपने-अपने हिस्से के हिसाब से कंपनी के खाते में पैसे जमा किए। उत्तर प्रदेश सरकार ने 1500 करोड़ रुपये, नोएडा प्राधिकरण ने 1500 करोड़ रुपये और ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण ने 500 -500 करोड़ रुपये जमा किए। इसी पैसे से किसानों से नोएडा एयरपोर्ट के लिए जमीन खरीदी गई और उनके पुनर्वास का काम हो रहा है। जून में ही कंपनी के सात सदस्यीय निदेशक मंडल का गठन हुआ, जिसमें मुख्य सचिव इसके अध्यक्ष व बाकी छह सदस्य होंगे। इनमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यीडा के अलावा नागरिक उड्डयन विभाग, औद्योगिक विकास विभाग व वित्त विभाग के प्रतिनिधि शामिल हैं।
1921 में हुई थी ज्यूरिख एयरपोर्ट की शुरुआत
नोएडा एयरपोर्ट बनाने के लिए सबसे ज्यादा बोली लगाने वाली स्विट्जरलैंड की कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी मौजूदा समय में सिर्फ लैटिन अमेरिका में ही आठ एयरपोर्ट का निर्माण कर रही है। इसके अलावा ब्राजील में चार और चिली में दो एयरपोर्ट का निर्माण भी यही कंपनी कर रही है। स्विट्जरलैंड में सबसे पहले 1921 में ज्यूरिख से हवाई उड़ान शुरू हुई थी। यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक प्रति यात्री लाभांश के पैटर्न पर पहली बार ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनाने का टेंडर निकाला गया और प्रति यात्री किराये में से पहली बार कोई कंपनी इतना ज्यादा लाभांश दे रही है। नियाल के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने उम्मीद जताई है कि ज्यूरिख कंपनी तय समय पर काम शुरू कर देगी और 2023 में नोएडा एयरपोर्ट से उड़ान शुरू हो सकेगी।
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नियाल कंपनी में अंशधारिता
- उत्तर प्रदेश सरकार 37.5 प्रतिशत
- नोएडा 37.5 प्रतिशत
- ग्रेटर नोएडा 12.5 प्रतिशत
- यीडा 12.5 प्रतिशत
ये है निदेशक मंडल
मुख्य सचिव चेयरमैन, निदेशक सिविल एविएशन सदस्य, सीईओ नोएडा सदस्य, सीईओ ग्रेटर नोएडा सदस्य, सीईओ यीडा सदस्य, सचिव औद्योगिक विकास विभाग सदस्य, सचिव वित्त विभाग सदस्य
2500 करोड़ किसानों के पुनर्वास पर खर्च होंगे
एयरपोर्ट के कारण विस्थापित होने वाले परिवारों के पुनर्वास पर करीब 2500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सबसे अधिक 1905 किसानों को दूसरी जगह बसाने में खर्च होंगे। किसानों को दी जाने वाली जमीन की रजिस्ट्री पर स्टांप शुल्क करीब 200 करोड़ रुपये का खर्च भी प्रदेश सरकार वहन करेगी। दरअसल, विस्थापित होने वाले प्रत्येक किसान परिवार को गांव में उनकी मौजूदा आबादी का 50 फीसदी भूखंड दिया जाना है। इन परिवार को भूखंड देने के लिए करीब 200 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ेगी। इतनी जमीन खरीदने और उसे विकसित करने में करीब 1500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्राधिकरण जितनी जमीन लेगा उसका 50 फीसदी हिस्सा विकास कार्यों में चली जाती है, जिनमें पार्क, सड़क, सीवर, बिजली लाइन, पेयजल पाइप लाइन आदि शामिल हैं। इसमें भी हरित पट्टी, स्कूल, मंदिर, बारात घर, स्वास्थ्य केंद्र आदि बनाने पर 28 फीसदी जमीन ही बचती है। किसानों को भूखंड की रजिस्ट्री शुल्क से भी छूट का वादा किया गया है। इस वादे को पूरा करने के लिए सरकार अपनी जेब से करीब दो सौ करोड़ रुपये स्टांप शुल्क का भुगतान करेगी। पुनर्वास के दौरान सभी खातेदारों को 5.85 लाख रुपये मिलेंगे। इसमें पांच लाख रुपये नौकरी, 50 हजार रुपये प्रभावित परिवार को अपने सामान को नए जगह ले जाने, 10 हजार रुपये उन्हें घर खर्च के लिए और 25 हजार रुपये रोजगार शुरु करने के लिए दिए जाएंगे। एयरपोर्ट को जमीन देने वाले किसान परिवार के एक सदस्य को नौकरी का भी प्रावधान है। एयरपोर्ट का निर्माण करने वाली कंपनी का चयन होने के बाद अब नियाल किसानों के पुनर्वास पर जोर देगी।
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ग्रेटर नोएडा। जेवर में नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के बनने का सपना अगर साकार हुआ है तो इसके पीछे नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरणों की सामूहिक साझेदारी बेहद अहम रही है। उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा एयरपोर्ट बनाने के लिए नियाल कंपनी गठित की तो उसमें सरकार और नोएडा की साझेदारी बराबर की रही, जबकि ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण का हिस्सा कम है।
नोएडा एयरपोर्ट बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने जून में नियाल को मंजूरी दी थी। प्रदेश सरकार ने अपने पास 37.5 फीसदी हिस्सेदारी रखी, जबकि तीनों प्राधिकरणों में नोएडा प्राधिकरण का हिस्सा सबसे ज्यादा हिस्सा (37.5 फीसदी) तय किया गया। ग्रेटर नोएडा व यीडा की हिस्सेदारी (12.5-12.5 फीसदी) है। करीब 5 माह पहले गठित कंपनी के खाते में करीब 4000 करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। सभी हिस्सेदारों ने अपने-अपने हिस्से के हिसाब से कंपनी के खाते में पैसे जमा किए। उत्तर प्रदेश सरकार ने 1500 करोड़ रुपये, नोएडा प्राधिकरण ने 1500 करोड़ रुपये और ग्रेटर नोएडा व यमुना प्राधिकरण ने 500 -500 करोड़ रुपये जमा किए। इसी पैसे से किसानों से नोएडा एयरपोर्ट के लिए जमीन खरीदी गई और उनके पुनर्वास का काम हो रहा है। जून में ही कंपनी के सात सदस्यीय निदेशक मंडल का गठन हुआ, जिसमें मुख्य सचिव इसके अध्यक्ष व बाकी छह सदस्य होंगे। इनमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा व यीडा के अलावा नागरिक उड्डयन विभाग, औद्योगिक विकास विभाग व वित्त विभाग के प्रतिनिधि शामिल हैं।
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1921 में हुई थी ज्यूरिख एयरपोर्ट की शुरुआत
नोएडा एयरपोर्ट बनाने के लिए सबसे ज्यादा बोली लगाने वाली स्विट्जरलैंड की कंपनी ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी मौजूदा समय में सिर्फ लैटिन अमेरिका में ही आठ एयरपोर्ट का निर्माण कर रही है। इसके अलावा ब्राजील में चार और चिली में दो एयरपोर्ट का निर्माण भी यही कंपनी कर रही है। स्विट्जरलैंड में सबसे पहले 1921 में ज्यूरिख से हवाई उड़ान शुरू हुई थी। यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों के मुताबिक प्रति यात्री लाभांश के पैटर्न पर पहली बार ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट बनाने का टेंडर निकाला गया और प्रति यात्री किराये में से पहली बार कोई कंपनी इतना ज्यादा लाभांश दे रही है। नियाल के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया ने उम्मीद जताई है कि ज्यूरिख कंपनी तय समय पर काम शुरू कर देगी और 2023 में नोएडा एयरपोर्ट से उड़ान शुरू हो सकेगी।
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नियाल कंपनी में अंशधारिता
- उत्तर प्रदेश सरकार 37.5 प्रतिशत
- नोएडा 37.5 प्रतिशत
- ग्रेटर नोएडा 12.5 प्रतिशत
- यीडा 12.5 प्रतिशत
ये है निदेशक मंडल
मुख्य सचिव चेयरमैन, निदेशक सिविल एविएशन सदस्य, सीईओ नोएडा सदस्य, सीईओ ग्रेटर नोएडा सदस्य, सीईओ यीडा सदस्य, सचिव औद्योगिक विकास विभाग सदस्य, सचिव वित्त विभाग सदस्य
2500 करोड़ किसानों के पुनर्वास पर खर्च होंगे
एयरपोर्ट के कारण विस्थापित होने वाले परिवारों के पुनर्वास पर करीब 2500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सबसे अधिक 1905 किसानों को दूसरी जगह बसाने में खर्च होंगे। किसानों को दी जाने वाली जमीन की रजिस्ट्री पर स्टांप शुल्क करीब 200 करोड़ रुपये का खर्च भी प्रदेश सरकार वहन करेगी। दरअसल, विस्थापित होने वाले प्रत्येक किसान परिवार को गांव में उनकी मौजूदा आबादी का 50 फीसदी भूखंड दिया जाना है। इन परिवार को भूखंड देने के लिए करीब 200 हेक्टेयर जमीन की जरूरत पड़ेगी। इतनी जमीन खरीदने और उसे विकसित करने में करीब 1500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्राधिकरण जितनी जमीन लेगा उसका 50 फीसदी हिस्सा विकास कार्यों में चली जाती है, जिनमें पार्क, सड़क, सीवर, बिजली लाइन, पेयजल पाइप लाइन आदि शामिल हैं। इसमें भी हरित पट्टी, स्कूल, मंदिर, बारात घर, स्वास्थ्य केंद्र आदि बनाने पर 28 फीसदी जमीन ही बचती है। किसानों को भूखंड की रजिस्ट्री शुल्क से भी छूट का वादा किया गया है। इस वादे को पूरा करने के लिए सरकार अपनी जेब से करीब दो सौ करोड़ रुपये स्टांप शुल्क का भुगतान करेगी। पुनर्वास के दौरान सभी खातेदारों को 5.85 लाख रुपये मिलेंगे। इसमें पांच लाख रुपये नौकरी, 50 हजार रुपये प्रभावित परिवार को अपने सामान को नए जगह ले जाने, 10 हजार रुपये उन्हें घर खर्च के लिए और 25 हजार रुपये रोजगार शुरु करने के लिए दिए जाएंगे। एयरपोर्ट को जमीन देने वाले किसान परिवार के एक सदस्य को नौकरी का भी प्रावधान है। एयरपोर्ट का निर्माण करने वाली कंपनी का चयन होने के बाद अब नियाल किसानों के पुनर्वास पर जोर देगी।