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नोएडा एयरपोर्ट ----- 72 एकड़ जमीन का पैसा ट्रिब्युनल में कराया जमा
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नोएडा एयरपोर्ट : 72 हेक्टेयर जमीन का 180 करोड़ रुपया ट्रिब्युनल में जमा
ग्रेटर नोएडा/ जेवर। नोएडा एयरपोर्ट की जमीन अधिग्रहण में जुटे जिला प्रशासन ने 72 हेक्टेयर जमीन का 180 करोड़ रुपया भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण में जमा कर दिया है। अब इस जमीन पर 15 जनवरी तक कब्जा ले लिया जाएगा। अब तक छह गांवों की 1076 हेक्टेयर जमीन का मुआवजा किसान उठा चुके हैं। एयरपोर्ट के लिए 1334 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इसमें से जिला प्रशासन 1239 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण कर रहा है। बाकी जमीन सरकारी है। यह जमीन रनहेरा, रोही, पारोही, किशोरपुर, बनवारीवास व दयानतपुर गांव की है। इन गांवों में 1076 हेक्टेयर जमीन का किसानों ने मुआवजा ले लिया है। जिला प्रशासन ने कब्जा लेकर यमुना प्राधिकरण को सौंप दिया है।
नियमों के मुताबिक अगर किसी प्रोजेक्ट की 80 प्रतिशत जमीन पर कब्जा मिल गया है और बाकी जमीन लेने में दिक्कत आ रही है तो यह पैसा संबंधित ट्रिब्युनल में जमा कर दिया जाता है। इसके बाद जमीन पर कब्जा ले लिया जाता है। जिला प्रशासन ने इसी के तहत रुपया जमा कराया है। एडीएम (एलए) बलराम सिंह ने बताया कि जिस भूमि का पैसा प्राधिकरण में जमा करा दिया गया है उस पर 15 जनवरी तक कब्जा ले लिया जाएगा।
मंत्रालय को भेजी वन्य जीवों के संरक्षण की रिपोर्ट
एयरपोर्ट के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूएलआईआई) देहरादून की रिपोर्ट को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है। अब एयरपोर्ट को मंजूरी शीघ्र मिलने की उम्मीद है। मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने नोएडा एयरपोर्ट क्षेत्र में पर्यावरण से जुड़े सात पहलुओं की जांच की थी, जिसमें समिति ने पर्यावरण के मामले में उपाय नहीं करने पर प्रोजेक्ट को टालने की सिफारिश की थी। इन सात बिंदुओं पर नियाल ने डब्ल्यूएलआईआई की विशेषज्ञों की समिति को जिम्मेदारी सौंपी थी। समिति के सदस्यों ने एरिया में दो महीने तक प्रवास कर यह जाना कि क्षेत्र में काले हिरण, सारस, मोर आदि वन्य जीव रहते हैं। ये पक्षी सैकड़ों की संख्या में हैं, लेकिन इनके संरक्षण के लिए अभी कोई उपाय नहीं है। वन्य जीवों के संरक्षण के लिए डब्ल्यूएलआईआई योजना बनाने के लिए तैयार हो गया हैं। विशेष टीम का गठन किया है। वन्य जीवों के लिए एयरपोर्ट से दस किलोमीटर दूर संरक्षण स्थल बनाया जाएगा। इसके निर्माण पर आने वाला खर्च यमुना प्राधिकरण वहन करेगा। डब्ल्यूएलआईआई ने संरक्षण की योजना का खाका तैयार कर रिपोर्ट नियाल को सौंप दी थी। नियाल ने अब रिपोर्ट मंत्रालय के पास मंजूरी के लिए भेज दी है। ब्यूरो
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ज्यूरिख के साथ बैठक 15 जनवरी को
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने वाली कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी और नियाल के साथ 15 जनवरी को बैठक होगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) के साथ यह बैठक यमुना प्राधिकरण में होगी। बैठक में एयरपोर्ट की आगामी योजना पर चर्चा होगी। एसपीवी गठन के साथ इसकी डीपीआर पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। एसपीवी के बनने के बाद सुरक्षा सर्टिफिकेट के लिए गृह मंत्रालय में आवेदन किया जाएगा।
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ग्रेटर नोएडा/ जेवर। नोएडा एयरपोर्ट की जमीन अधिग्रहण में जुटे जिला प्रशासन ने 72 हेक्टेयर जमीन का 180 करोड़ रुपया भूमि अर्जन, पुनर्वासन एवं पुनर्व्यवस्थापन प्राधिकरण में जमा कर दिया है। अब इस जमीन पर 15 जनवरी तक कब्जा ले लिया जाएगा। अब तक छह गांवों की 1076 हेक्टेयर जमीन का मुआवजा किसान उठा चुके हैं। एयरपोर्ट के लिए 1334 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इसमें से जिला प्रशासन 1239 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण कर रहा है। बाकी जमीन सरकारी है। यह जमीन रनहेरा, रोही, पारोही, किशोरपुर, बनवारीवास व दयानतपुर गांव की है। इन गांवों में 1076 हेक्टेयर जमीन का किसानों ने मुआवजा ले लिया है। जिला प्रशासन ने कब्जा लेकर यमुना प्राधिकरण को सौंप दिया है।
नियमों के मुताबिक अगर किसी प्रोजेक्ट की 80 प्रतिशत जमीन पर कब्जा मिल गया है और बाकी जमीन लेने में दिक्कत आ रही है तो यह पैसा संबंधित ट्रिब्युनल में जमा कर दिया जाता है। इसके बाद जमीन पर कब्जा ले लिया जाता है। जिला प्रशासन ने इसी के तहत रुपया जमा कराया है। एडीएम (एलए) बलराम सिंह ने बताया कि जिस भूमि का पैसा प्राधिकरण में जमा करा दिया गया है उस पर 15 जनवरी तक कब्जा ले लिया जाएगा।
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मंत्रालय को भेजी वन्य जीवों के संरक्षण की रिपोर्ट
एयरपोर्ट के लिए वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (डब्ल्यूएलआईआई) देहरादून की रिपोर्ट को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है। अब एयरपोर्ट को मंजूरी शीघ्र मिलने की उम्मीद है। मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने नोएडा एयरपोर्ट क्षेत्र में पर्यावरण से जुड़े सात पहलुओं की जांच की थी, जिसमें समिति ने पर्यावरण के मामले में उपाय नहीं करने पर प्रोजेक्ट को टालने की सिफारिश की थी। इन सात बिंदुओं पर नियाल ने डब्ल्यूएलआईआई की विशेषज्ञों की समिति को जिम्मेदारी सौंपी थी। समिति के सदस्यों ने एरिया में दो महीने तक प्रवास कर यह जाना कि क्षेत्र में काले हिरण, सारस, मोर आदि वन्य जीव रहते हैं। ये पक्षी सैकड़ों की संख्या में हैं, लेकिन इनके संरक्षण के लिए अभी कोई उपाय नहीं है। वन्य जीवों के संरक्षण के लिए डब्ल्यूएलआईआई योजना बनाने के लिए तैयार हो गया हैं। विशेष टीम का गठन किया है। वन्य जीवों के लिए एयरपोर्ट से दस किलोमीटर दूर संरक्षण स्थल बनाया जाएगा। इसके निर्माण पर आने वाला खर्च यमुना प्राधिकरण वहन करेगा। डब्ल्यूएलआईआई ने संरक्षण की योजना का खाका तैयार कर रिपोर्ट नियाल को सौंप दी थी। नियाल ने अब रिपोर्ट मंत्रालय के पास मंजूरी के लिए भेज दी है। ब्यूरो
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ज्यूरिख के साथ बैठक 15 जनवरी को
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाने वाली कंपनी ज्यूरिख इंटरनेशनल एयरपोर्ट एजी और नियाल के साथ 15 जनवरी को बैठक होगी। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (नियाल) के साथ यह बैठक यमुना प्राधिकरण में होगी। बैठक में एयरपोर्ट की आगामी योजना पर चर्चा होगी। एसपीवी गठन के साथ इसकी डीपीआर पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। एसपीवी के बनने के बाद सुरक्षा सर्टिफिकेट के लिए गृह मंत्रालय में आवेदन किया जाएगा।