निठारी कांड: बेगुनाहों के खून से रंगी उस कोठी की पूरी कहानी, जिससे 17 साल पहले दहल उठा था देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के चर्चित निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली को दोषमुक्त कर दिया है। सोमवार को हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुनाया। कोर्ट ने सुरेंद्र कोली की फांसी की सजा रद्द कर दी है। निचली अदालत ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोठी D 5 के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को भी कोर्ट ने बरी कर दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा के चर्चित निठारी कांड के दोषी सुरेंद्र कोली और मनिंदर सिंह पंढेर को सोमवार को बड़ी राहत दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोली को 12 और मनिंदर सिंह पंढेर को दो मामलों में बरी करते हुए फांसी की सजा रद्द कर दी है। मनिंदर सिंह पंढेर की वकील ने इस बारे में जानकारी दी है।
कई दिनों तक चली बहस के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित कर लिया था। सोमवार को हाईकोर्ट ने सुरेंद्र कोली को दोषमुक्त कर दिया। गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट ने दोनों को 10 महीने पहले फांसी की सजा सुनाई थी।
इसके खिलाफ उसने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोठी D-5 के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को भी कोर्ट ने बरी कर दिया है। न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एसएएच रिजवी की अदालत ने यह फैसला सुनाया।
गौरतलब है कि सीबीआई ने निठारी कांड में 16 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से सुरेंद्र कोली को 14 मामलों में फांसी की सजा मिली थी, जबकि मनिंदर सिंह पंढेर के खिलाफ दो मुकदमे में ट्रायल कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। दिसंबर 2006 में हुए इस कांड के खुलासे ने लोगों को हिला कर रख दिया था।
नोएडा सेक्टर-31 के पास गांव निठारी की डी-5 नंबर की कोठी मोनिंदर सिंह पंढेर ने 2005 में खरीदी थी। घर-परिवार चंडीगढ़ में होने की वजह से नोएडा में रहने का ठिकाना बनाया था, क्योंकि नोएडा में ही उसकी कंपनी थी। नोएडा में परिवार नहीं होने से मोनिंदर ने चंडीगढ़ में नौकरी कर चुके सुरेंद्र कोली को नोएडा बुला लिया। सुरेंद्र खाना बनाने में एक्सपर्ट था।
खासतौर पर नॉनवेज बनाने में। इसलिए मोनिंदर सिंह ने उसे नोएडा में अपने पास रख लिया। वह कोठी में ही छत पर बने एक कमरे में रहने लगा, लेकिन महीने में अधिकांश दिन मोनिंदर सिंह कहीं न कहीं टूर पर ही रहता था। लिहाजा, कोठी में मालिक की तरह सुरेंद्र ही रहता था।
घरों में साफ-सफाई का काम करने वाली महिला 31 अक्तूबर 2006 को अपने घर से चलते समय पति को बताकर गई थी कि आज उसे सुरेंद्र कोली ने बुलाया है। इसलिए वह पंढेर की कोठी संख्या डी-5 पर काम की बात करने जाएगी।
महिला पहले भी पंढेर की इस कोठी पर झाड़ू-पोंछा का काम करती थी, मगर बाद में प्रेगनेंसी के चलते उसने काम छोड़ दिया था। बच्चे को जन्म देने के कुछ माह बाद वह दोबारा इस कोठी पर काम करना चाहती थी।
सुरेंद्र कोली ने उससे बात भी की थी। इसी के चलते वह काम की बात करने डी-5 पर गई और फिर कभी लौटकर नहीं आई। 29 दिसंबर 2006 को निठारी कांड खुलने के बाद आरोपी कोली ने कोठी के पीछे गैलरी से भी काफी सामान बरामद कराया था। इसमें कपडे़, चप्पल, जूते आदि शामिल थे।
9. 08 दिसंबर 2017 : सुरेंद्र कोली एवं मोनिंदर सिंह पंढेर को फांसी की सजा।
10. 02 मार्च 2019 : सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा। पंढेर बरी।
11. 06 अप्रैल 2019 : सुरेंद्र कोली को फांसी की सजा। पंढेर बरी।
12. 15 जनवरी 2021 : सुरेंद्र कोली दोषी करार। मोनिंदर पंढेर बरी।
निठारी कांड के खुलते ही देश भर में हलचल मच गई थी। यह एक ऐसा कांड था, जिसने पूरे देश और दुनिया को हिलाकर रख दिया। आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा की मांग देश के कोने-कोने से उठी। मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच सीबीआई ने शुरू की। 11 जनवरी 2007 को सीबीआई ने पूरा केस अपने हाथ में ले लिया। 28 फरवरी और 01 मार्च 2007 को सुरेंद्र कोली ने दिल्ली में एसीएमएम के यहां अपने इकबालिया बयान दर्ज कराए थे। इन बयानों की वीडियोग्राफी भी हुई थी।