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पांच साल में गौतमबुद्ध नगर में नौ बड़े बस हादसे: दुर्घटनाओं में 13 लोगों की मौत और 99 घायल, देखें आंकड़े

Fri, 25 Sep 2026 03:22 PM IST
Akash Dubey माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा/नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, ग्रेटर नोएडा/नोएडा Published by: Akash Dubey Updated Fri, 25 Sep 2026 03:22 PM IST
सार

जिले में पांच वर्षों में नौ बस हादसों में 13 लोगों की मौत और 99 घायल हुए। तेज रफ्तार के अलावा आग, कोहरा, भिड़ंत और क्षमता से अधिक यात्री भी हादसों की वजह रहे।

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Nine major bus accidents in Gautam Buddha Nagar in five years 13 people killed
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

जिले में करीब पांच वर्षों में बसों से जुड़े नौ बड़े हादसे हुए हैं। इनमें 13 लोगों की मौत हुई और 99 घायल हुए हैं। बस हादसों की वजह केवल तेज रफ्तार नहीं रही है। अलग-अलग घटनाओं में बस में आग लगने, खड़े वाहन से टक्कर, घने कोहरे, ट्रैक्टर-ट्रॉली और कंटेनर से भिड़ंत, बस पलटने और क्षमता से अधिक यात्रियों की स्थिति सामने आई है। कई हादसों में डबल डेकर और स्लीपर बसें शामिल रहीं हैं। 

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2021: दो हादसे, 2 मौतें
13 फरवरी: दनकौर क्षेत्र में निजी बस खड़े ट्रक से टकरा गई थी। इसके बाद पीछे से दूसरी बस और कारें भी भिड़ गई थीं। हादसे में 12 लोग घायल हुए थे।

24 अक्तूबर जीरो प्वॉइंट से करीब पांच
किलोमीटर दूर दनकौर क्षेत्र में खराब मिनी बस खड़ी थी। पीछे से कार टकराने के बाद बस से उतर चुके यात्री भी चपेट में आ गए थे। हादसे में दो लोगों की मौत और चार लोग घायल हुए थे।

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2022 : कंटेनर से भिड़ी बस
20 दिसंबर गलगोटिया विश्वविद्यालय के पास दनकौर क्षेत्र में डबल डेकर बस कंटेनर से टकराने के बाद एक्सप्रेसवे से नीचे गिर गई थी। हादसे में एक व्यक्ति की मौत और 24 लोग घायल हुए थे।

2023 : ट्रैक्टर-ट्रॉली से भिड़ी
13 जुलाई : यमुना एक्सप्रेसवे पर दिल्ली से आगरा जा रही बस ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई थी। हादसे में आठ लोग घायल हुए थे। हालांकि, इस घटना में किसी की मौत नहीं हुई थी।

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2024 में कोहरा और ट्रैक्टर-ट्रॉली बनी वजह
27 जनवरी: जेवर क्षेत्र में घने कोहरे के बीच बस, कैंटर और दो कारों की भिड़ंत हो गई थी। हादसे में एक व्यक्ति की मौत और नौ लोग घायल हुए थे।

04 जुलाई दनकौर क्षेत्र में बीआईसी के पास स्लीपर/डबल डेकर बस ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराकर एक्सप्रेसवे से नीचे गिर गई थी। इसमें 13 लोग घायल हुए थे।

2025 में दो दुर्घटनाएं
19 जून : जेवर टोल प्लाजा के पास इटावा से दिल्ली जा रही डबल डेकर बस कैंटर में पीछे से घुस गई थी। हादसे में 15 यात्री घायल हुए थे।

नवंबर: दनकौर क्षेत्र में दिल्ली से वाराणसी जा रही बस पलट गई थी। हादसे में 14 यात्रियों के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना सामने आई थी।

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14 वर्षों में 8812 दुर्घटनाएं
वर्ष 2022 में एक्सप्रेसवे पर 311 दुर्घटनाएं हुई थीं, जो 2025 में बढ़कर 659 तक पहुंच गईं। वर्ष 2012 से 2025 के बीच एक्सप्रेसवे पर कुल 8812 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इस हिसाब से 14 वर्षों में यहां औसतन हर दिन करीब दो दुर्घटनाएं हुईं। आरटीआई से सामने आए आंकड़े बताते हैं कि हादसों की सबसे बड़ी वजह चालक को नींद या झपकी आना रही। 14 वर्षों में 3700 हादसे इसी कारण हुए। यह कुल दुर्घटनाओं का करीब 42 प्रतिशत है। 

लापरवाही को 22.7 प्रतिशत हादसों का कारण माना गया है। तेज रफ्तार भी सुरक्षित सफर में बड़ी चुनौती बनी हुई है। ओवरस्पीडिंग के कारण 1319 दुर्घटनाएं हुईं, जो कुल हादसों का करीब 15 प्रतिशत हैं। इसके अलावा टायर फटने से 853 वाहन हादसे का शिकार हुए। परिवहन विभाग ने सात सितंबर को जिस अभियान की शुरुआत की थी, उसे नौ सितंबर को ही विराम दे दिया गया।

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