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Noida News: नया उत्पादन रोका, 50 हजार श्रमिकों के रोजगार पर संकट
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-अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ में 50 फीसदी की वृद्धि के फैसले का असर
-ग्रेनो के ईपीआईपी सेक्टर हर साल अमेरिका में होता है 1500-2000 करोड़ का निर्यात
-150 उद्योगों में उत्पादन बंद होने का मुरादाबाद, सहारनपुर व सिकंदराबाद तक प्रभाव
- उद्यमियों ने कहा, अमेरिका के व्यापारी भी फैसले से असंतुष्ट, माल की डिलीवरी रोकी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अमेरिका के राष्ट्रपति के टैरिफ बढ़ाने के फैसले से ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक सेक्टर एक्सपोर्ट प्रमोशन इंडस्ट्रियल पार्क (ईपीआईपी) के उद्योगों में उत्पादन रुक गया है। इसके बाद से अमेरिका के व्यापारियों ने माल की डिलीवरी रोक दी है। संभावित नुकसान के मद्देनजर उद्यमियों ने नया उत्पादन रोक दिया है। इससे इन इकाइयों में काम करने वाले 50 हजार से अधिक श्रमिकों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। उद्यमियों का कहना है कि काम बंद होने से मुरादाबाद, सहारनपुर और सिकंदराबाद के करीब दस हजार श्रमिकों पर भी प्रभाव पड़ेगा।
हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ कारोबार में टैरिफ को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया। इसका असर पूरे भारत के कारोबारियों पर पड़ रहा है। ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक सेक्टर ईपीआईपी के उद्यमी भी प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि सेक्टर में 150 उद्योग हैं। जो हैंडीक्रॉफ्ट, गारमेंट्स और वुड्स वर्क से जुड़े हैं। हर साल अमेरिका के लिए 1500-2000 करोड़ रुपये का माल निर्यात किया जाता है। पहले अमेरिका ने टैरिफ को 10 प्रतिशत किया। फिर बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया। उस स्थिति में उद्यमियों ने अपनी बचत को कम किया। अमेरिका के व्यापारियों ने भी ऐसा ही किया, लेकिन टैरिफ 50 प्रतिशत होने पर कारोबार करना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि कंपनियों को बड़ी मात्रा में ऑर्डर मिले थे। सात अगस्त तक काफी ऑर्डर निकाल दिया गया, लेकिन उसके बाद वहां की कंपनियों ने माल की डिलीवरी रोक दी। इसके बाद उन्होंने नया उत्पादन रोक दिया है। जिस कच्चे माल की कटिंग हो चुकी है, उसी को तैयार कराया जा रहा है। उद्यमियों के साथ इसका असर यहां काम करने वाले श्रमिकों पर भी पड़ेगा।
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श्रमिकों का रोजगार संकट में
उद्यमियों ने बताया कि ईपीआईपी में ही 40 हजार से अधिक श्रमिक काम कर रहे हैं। उत्पादन रुकने पर उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। वहीं यहां की कंपनियों का काफी काम जैसे मेटल, डाई और लकड़ी का काम मुरादाबाद, सहारनपुर व सिकंदराबाद में होता है। वहां के करीब दस हजार श्रमिकों पर भी इसका असर पड़ना लाजमी है।
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अमेरिका के व्यापारी भी संतुष्ट नहीं
ईपीआईपी की चेंबर ऑफ एक्सपोर्ट्स के महासचिव विकास शर्मा ने बताया कि अमेरिका के कारोबारियों से बातचीत हो रही हैं। वो भी अपने राष्ट्रपति के फैसले से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने माल की डिलीवरी को फिलहाल रोका है। वो भी कुछ रास्ता निकलने का इंतजार कर रहे हैं। उनकी तरफ से भारत सरकार से मांग की गई है कि अमेरिका से वार्ता कर टैरिफ को वापस कराने का प्रयास किया जाए। निर्यातकों के लिए तत्काल आर्थिक व नीति समर्थन दिया जाए। वैकल्पिक बाजार उपलब्ध कराए जाए। इसके लिए टास्क फोर्स बनाने की मांग की है। ताकि निर्यातकों को तत्काल संकट से उबारा जा सके।
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-ग्रेनो के ईपीआईपी सेक्टर हर साल अमेरिका में होता है 1500-2000 करोड़ का निर्यात
-150 उद्योगों में उत्पादन बंद होने का मुरादाबाद, सहारनपुर व सिकंदराबाद तक प्रभाव
- उद्यमियों ने कहा, अमेरिका के व्यापारी भी फैसले से असंतुष्ट, माल की डिलीवरी रोकी
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। अमेरिका के राष्ट्रपति के टैरिफ बढ़ाने के फैसले से ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक सेक्टर एक्सपोर्ट प्रमोशन इंडस्ट्रियल पार्क (ईपीआईपी) के उद्योगों में उत्पादन रुक गया है। इसके बाद से अमेरिका के व्यापारियों ने माल की डिलीवरी रोक दी है। संभावित नुकसान के मद्देनजर उद्यमियों ने नया उत्पादन रोक दिया है। इससे इन इकाइयों में काम करने वाले 50 हजार से अधिक श्रमिकों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। उद्यमियों का कहना है कि काम बंद होने से मुरादाबाद, सहारनपुर और सिकंदराबाद के करीब दस हजार श्रमिकों पर भी प्रभाव पड़ेगा।
हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के साथ कारोबार में टैरिफ को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया। इसका असर पूरे भारत के कारोबारियों पर पड़ रहा है। ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक सेक्टर ईपीआईपी के उद्यमी भी प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि सेक्टर में 150 उद्योग हैं। जो हैंडीक्रॉफ्ट, गारमेंट्स और वुड्स वर्क से जुड़े हैं। हर साल अमेरिका के लिए 1500-2000 करोड़ रुपये का माल निर्यात किया जाता है। पहले अमेरिका ने टैरिफ को 10 प्रतिशत किया। फिर बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया। उस स्थिति में उद्यमियों ने अपनी बचत को कम किया। अमेरिका के व्यापारियों ने भी ऐसा ही किया, लेकिन टैरिफ 50 प्रतिशत होने पर कारोबार करना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि कंपनियों को बड़ी मात्रा में ऑर्डर मिले थे। सात अगस्त तक काफी ऑर्डर निकाल दिया गया, लेकिन उसके बाद वहां की कंपनियों ने माल की डिलीवरी रोक दी। इसके बाद उन्होंने नया उत्पादन रोक दिया है। जिस कच्चे माल की कटिंग हो चुकी है, उसी को तैयार कराया जा रहा है। उद्यमियों के साथ इसका असर यहां काम करने वाले श्रमिकों पर भी पड़ेगा।
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श्रमिकों का रोजगार संकट में
उद्यमियों ने बताया कि ईपीआईपी में ही 40 हजार से अधिक श्रमिक काम कर रहे हैं। उत्पादन रुकने पर उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। वहीं यहां की कंपनियों का काफी काम जैसे मेटल, डाई और लकड़ी का काम मुरादाबाद, सहारनपुर व सिकंदराबाद में होता है। वहां के करीब दस हजार श्रमिकों पर भी इसका असर पड़ना लाजमी है।
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अमेरिका के व्यापारी भी संतुष्ट नहीं
ईपीआईपी की चेंबर ऑफ एक्सपोर्ट्स के महासचिव विकास शर्मा ने बताया कि अमेरिका के कारोबारियों से बातचीत हो रही हैं। वो भी अपने राष्ट्रपति के फैसले से संतुष्ट नहीं है। उन्होंने माल की डिलीवरी को फिलहाल रोका है। वो भी कुछ रास्ता निकलने का इंतजार कर रहे हैं। उनकी तरफ से भारत सरकार से मांग की गई है कि अमेरिका से वार्ता कर टैरिफ को वापस कराने का प्रयास किया जाए। निर्यातकों के लिए तत्काल आर्थिक व नीति समर्थन दिया जाए। वैकल्पिक बाजार उपलब्ध कराए जाए। इसके लिए टास्क फोर्स बनाने की मांग की है। ताकि निर्यातकों को तत्काल संकट से उबारा जा सके।