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सुविधा : आधे दामों पर हो सकेगा एमआरआई और सीटी स्कैन
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जिम्स अस्पताल।
- फोटो : Grnoida
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सुविधा : आधे दामों पर हो सकेगा एमआरआई और सीटी स्कैन
ग्रेटर नोएडा। लखनऊ के किंग जॉर्ज और कानपुर के गणेश शकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में भी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी मॉडल) की तर्ज पर मैगनेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) और कंप्यूटेड टोमोग्रॉफी (सीटी) स्कैन की सुविधा लोगों को मिल सकेगी। खास बात यह है कि निजी अस्पतालों से लगभग आधे दाम में यह सुविधा मिलेगी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया के बाद प्राइवेट एजेंसी का चयन भी कर लिया गया है। अगले दो माह में लोगों को यह सुविधा मिल सकेगी। बता दें कि जिम्स में शासन की ओर से ट्रॉमा सेंटर के लिए मंजूरी मिल चुकी है। इसके लिए अस्पताल में मानक के अनुसार सुविधाएं जुटाना जरूरी है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसके लिए पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी। अस्पताल प्रशासन की ओर से एमआरई और सीटी स्कैन मशीन लगाने को हरी झंडी दी गई। इसके लिए निजी कंपनियों को आमंत्रित किया गया। टेंडर प्रक्रिया के बाद कंपनी का चयन हो गया है। मशीन मंगवाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। संभावना है कि दो माह बाद लोगों को सुविधा मिलने लगेगी।
8 से 15 हजार रुपये तक लगते हैं निजी अस्पतालों में
अभी तक लोगों को एमआरआई और सीटी स्कैन कराने के लिए निजी अस्पतालों के चक्कर लगाना पड़ता है। विभिन्न एमआरआई के लिए अस्पताल 8 से 15 हजार रुपये तक लोगों से चार्ज करते हैं। अब पीपीपी मॉडल के जिम्स में लगाई जाने वाली मशीनों में निजी अस्पतालों से आधी कीमत पर एमआरआई और सीटी स्कैन किया जाएगा।
अस्पताल प्रशासन जगह देकर किराया लेगा
अस्पताल प्रशासन मशीन लगाने के लिए परिसर में जगह उपलब्ध कराएगा। यहां कंपनी अपनी मशीन लगाएगी। साथ ही एमआरआई और सीटी स्कैन करने वाले डॉक्टर और कर्मी कंपनी के ही होंगे। जिम्स प्रशासन जगह की एवज में किराया लेगा।
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पीपीपी मॉडल के तहत एमआरआई-सीटी स्कैन मशीन लगवाई जा रही है। कंपनी का चयन कर लिया गया है। निजी अस्पतालों की तुलना में लगभग आधी कीमत पर लोगों को सुविधा उपलब्ध होगी।
- बिग्रेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता, निदेशक, जिम्स
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ग्रेटर नोएडा। लखनऊ के किंग जॉर्ज और कानपुर के गणेश शकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज की तर्ज पर ग्रेटर नोएडा स्थित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) में भी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी मॉडल) की तर्ज पर मैगनेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) और कंप्यूटेड टोमोग्रॉफी (सीटी) स्कैन की सुविधा लोगों को मिल सकेगी। खास बात यह है कि निजी अस्पतालों से लगभग आधे दाम में यह सुविधा मिलेगी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया के बाद प्राइवेट एजेंसी का चयन भी कर लिया गया है। अगले दो माह में लोगों को यह सुविधा मिल सकेगी। बता दें कि जिम्स में शासन की ओर से ट्रॉमा सेंटर के लिए मंजूरी मिल चुकी है। इसके लिए अस्पताल में मानक के अनुसार सुविधाएं जुटाना जरूरी है। मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसके लिए पहले से ही तैयारी शुरू कर दी थी। अस्पताल प्रशासन की ओर से एमआरई और सीटी स्कैन मशीन लगाने को हरी झंडी दी गई। इसके लिए निजी कंपनियों को आमंत्रित किया गया। टेंडर प्रक्रिया के बाद कंपनी का चयन हो गया है। मशीन मंगवाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। संभावना है कि दो माह बाद लोगों को सुविधा मिलने लगेगी।
8 से 15 हजार रुपये तक लगते हैं निजी अस्पतालों में
अभी तक लोगों को एमआरआई और सीटी स्कैन कराने के लिए निजी अस्पतालों के चक्कर लगाना पड़ता है। विभिन्न एमआरआई के लिए अस्पताल 8 से 15 हजार रुपये तक लोगों से चार्ज करते हैं। अब पीपीपी मॉडल के जिम्स में लगाई जाने वाली मशीनों में निजी अस्पतालों से आधी कीमत पर एमआरआई और सीटी स्कैन किया जाएगा।
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अस्पताल प्रशासन जगह देकर किराया लेगा
अस्पताल प्रशासन मशीन लगाने के लिए परिसर में जगह उपलब्ध कराएगा। यहां कंपनी अपनी मशीन लगाएगी। साथ ही एमआरआई और सीटी स्कैन करने वाले डॉक्टर और कर्मी कंपनी के ही होंगे। जिम्स प्रशासन जगह की एवज में किराया लेगा।
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पीपीपी मॉडल के तहत एमआरआई-सीटी स्कैन मशीन लगवाई जा रही है। कंपनी का चयन कर लिया गया है। निजी अस्पतालों की तुलना में लगभग आधी कीमत पर लोगों को सुविधा उपलब्ध होगी।
- बिग्रेडियर डॉ. राकेश कुमार गुप्ता, निदेशक, जिम्स