ये माटी के दीये: महंगाई और टेक्नोलॉजी की मार, संघर्ष कर रहे कुम्हार, पूर्वजों की परंपरा के लिए कर रहे मेहनत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Published by: Vikas Kumar
Updated Fri, 21 Oct 2022 10:52 PM IST
सार
इस कार्य से जुड़े लोग दूसरे का घर रोशन करने के दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। कस्बे निवासी भूरा, छत्तर और रमेश प्रजापति आदि ने बताया कि कड़ी मेहनत के बाद रोजाना 600-700 दीये ही बन पाते हैं।
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दीये बनाते कारीगर
- फोटो : अमर उजाला