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मेवात का शहीदी दिवस आज

Thu, 18 Nov 2021 11:12 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 18 Nov 2021 11:12 PM IST
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Mewat's martyrdom day today
पिनगवां। 1857 देश की आजादी के पहले संग्राम में मेवाती बहादुरों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया बल्कि फ्रेजर जैसे कई बडे अंग्रेज अधिकारियों को कत्ल भी किया। भले ही अंग्रेजों के प्रतिशोध की आग देश के अन्य इलाकों में जल्द शांत हो गई थी लेकिन मेवात में 8 नवंबर 1857 से 7 दिसंबर 1858 तक सैकड़ों गांवों में खेली गई खून की होली में मेवात इलाके के करीब 10 हजार बहादुर शहीद हुए।
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भारत मां की इज्जत बचाने के लिए 19 नवंबर 1857 को अकेले रूपडाका गांव के 425 बहादुर शहीद हुए थे। जब मेवाती वीरों ने अंग्रेजों के बडे़-बडे़ अफसरों को कत्ल किया तो गुस्साए अंग्रेजों ने तीन दर्जन से अधिक गांवों में आग लगाकर तहस नहस कर दिया बल्कि गांवों की जमीनें छीनकर उनको बेदखल कर दिया, अंग्रेजों द्वारा छीनी गई जमीनें आज तक लोगों को वापस नहीं मिली हैं। देश के जांबाजों में आपसी तालमेल न होने और देश के गद्दार लोगों की वजह से अंग्रेजों ने दोबारा से दिल्ली पर 20 सितंबर 1857 को अपना अधिकार जमा लिया था। दिल्ली के नजदीक होने के कारण अंग्रेजों को सबसे ज्याद खतरा केवल मेवातियों से ही था। मेवातियाें को मिटाने की खातिर अंग्रेजों ने सबसे क्रूरता के लिए माने जाने वाले फौजी अफसरान सावर्ज, डूमंड, हडसन, कैप्टन रामसे, किली फोर्ड, होर्सेज, लेफ्टिनेंट रांगटन को भारी फौज, गोला बारूद और तोपखानों के साथ भेजा था। शहीद हुए 600 लोगों में से रूपडाका गांव के 425 मेवाती बहादुर थे। जिनको बेरहमी से कत्ल कर दिया गया।
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8 नवंबर 1857 से शुरू हुआ कहर
अंग्रेजों की इस दमनकारी योजना का कहर मेवात में 8 नवंबर 1857 को घासेड़ा में 157 को शहीद करके शुरू हुआ जो 7 दिसंबर 1858 तक चला। अंग्रेजी फौज ने 19 नवंबर को रूपडाका में 425, पहली जनवरी 1858 को होडल गढ़ी में किशन सिंह और किशन लाल जाठ सहित 85, दो जनवरी 1858 को हसनपुर में चांद खां, रहीम खां, 6 जनवरी को सहसोला में फिरोजखां मेव सहित 12, बडका में खुशी खां मेव सहित 30, नूंह में 18, ताऊडू में 19, जनवरी 1858 को महूं तिगांव में बदरूदीन सहित 73 लोगों को शहीद कर दिया था।
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शहीदों की याद में बनाई जाए मीनार
अखिल भारतीय शहीदाने मेवात सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सरफूदीन मेवाती का कहना है कि शहीदों की सूची बहुत लंबी है। उन्होंने मेहनत से इतिहासकारों को साथ मिलकर इसे तैयार किया है। हरियाणा के रिकॉर्ड में इनकी संख्या कम है लेकिन शहीद होने वालों की संख्या दस हजार से ज्यादा है। हरियाणा सरकार को चाहिए कि 1857 के हजारों गुमशुदा शहीदों के नाम खोजकर सभी गांवों में शहीदी मीनार बनाई जाएं।
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