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20 हजार उद्योगों में बनेंगी मानसिक स्वास्थ्य हेल्प डेस्क

Sun, 26 Jun 2022 01:57 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 26 Jun 2022 01:57 AM IST
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Mental health help desk will be made in 20 thousand industries
नोएडा। मानसिक समस्या से पीड़ित वयस्कों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कार्य स्थल के तनाव और रोजगार की अनिश्चितता जैसी समस्याओं ने नौकरीपेशा वर्ग की चिंता बढ़ाई है। औद्योगिक गतिविधियों में कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखने के लिए जिले के करीब 20 हजार उद्योगों में मानसिक स्वास्थ्य हेल्प डेस्क बनेंगी। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से इसका प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसे आगामी जिला स्वास्थ्य समिति (डीएचएस) की बैठक में रखा जाएगा। जिलाधिकारी की मंजूरी मिलने के बाद कार्य स्थलों पर 10 लाख से ज्यादा कर्मचारियों की काउंसिलिंग का नियम अनिवार्य होगा।
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स्वास्थ्य विभाग की जिला सलाहकार डॉ. श्वेता खुराना ने बताया कि जिला अस्पताल के अलावा चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर काउंसलर की व्यवस्था पहले से है, लेकिन कोरोना के कारण मानसिक स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। जिले में 20 हजार से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। इनमें काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या दस लाख से अधिक है। 1200 से अधिक आईटी कंपनियां हैं जिनमें 60 हजार से अधिक कर्मचारी हैं। साथ ही, कई सरकारी व निजी दफ्तर हैं। इन सभी में मानसिक स्वास्थ्य के लिए नियमित काउंसलिंग अनिवार्य करने का प्रस्ताव डीएचएस के समक्ष रखा जाएगा। विभाग के विशेषज्ञ कंपनियों के हेल्प डेस्क प्रतिनिधियों को प्रशिक्षित करेंगे। डीएचएस की अगली बैठक की तारीख प्रशासन की तरफ से तय की जानी है, जिसमें यह प्रस्ताव रखा जाएगा।
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हर पांचवां वयस्क मानसिक समस्या से पीड़ित
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) नोएडा के अध्यक्ष डॉ. सुनील अवाना ने बताया कि अस्पतालों की ओपीडी में कोविड के दौरान बड़ा बदलाव देखने में आया है। एक से डेढ़ साल में मानसिक समस्याओं से पीड़ित मरीजों की संख्या 25 फीसदी तक बढ़ी है। ओपीडी में पहुंचने वाला हर पांचवां-छठा मरीज इस समस्या से ग्रसित है। एक रिपोर्ट के अनुसार, निजी क्षेत्र के 40 फीसदी से अधिक कर्मचारी अवसाद या सामान्य चिंता विकार से पीड़ित हैं। इनमें 25 से 39 वर्ष के पीड़ितों की संख्या 80 फीसदी तक है। प्रशासन की तरफ से कार्य स्थल पर काउंसिलिंग कराने की पहल बेहतर परिणाम देगी।
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वर्क फ्रॉम होम ने बिगाड़ी काम की क्षमता
मेट्रो अस्पताल की वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. मनीषा सिंघल ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य पर कोविड का असर निश्चित तौर पर पड़ा है। आईटी व निजी सेक्टर में काम करने वाले युवा सबसे ज्यादा काउंसिलिंग के लिए अस्पताल में आ रहे हैं। दो साल तक वर्क फ्रॉम होम के बाद अचानक से बदली दिनचर्या, कार्य स्थल पर बदले काम के तरीकों के अलावा कई और वजह हैं जिनसे काम करने की क्षमता पर बुरा असर पड़ा है। इस समस्या का समाधान काउंसिलिंग है। अगर कार्य स्थल पर ही यह सुविधा मिले तो इससे बेहतर कुछ नहीं होगा।
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