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Noida News: स्कूलों में अब मासिक धर्म प्रबंधन की होगी निगरानी
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- चार दिन में 1000 स्कूलों के शिक्षकों को मिला प्रशिक्षण
माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। स्कूल में सैनिटरी पैड उपलब्ध हैं, लेकिन जरूरत के समय छात्रा उन्हें लेने में झिझक तो नहीं रही? शौचालय में पानी और साबुन की व्यवस्था है या नहीं? इस्तेमाल किए गए पैड को फेंकने के लिए सुरक्षित जगह है या नहीं? मासिक धर्म के दौरान इन छोटी-छोटी परेशानियों के कारण किसी छात्रा की पढ़ाई प्रभावित तो नहीं हो रही? अब स्कूलों में इन सवालों के जवाब भी तलाशे जाएंगे।
बेसिक शिक्षा विभाग ने मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं प्रबंधन (एमएचएम) की व्यवस्था को सिर्फ सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने तक सीमित न रखते हुए इसकी नियमित निगरानी की तैयारी की है। चार दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का बुधवार को समापन हुआ। अंतिम दिन जेवर ब्लॉक के परिषदीय, राजकीय और निजी विद्यालयों के करीब 200 स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। चार दिनों में बिसरख, दनकौर, दादरी और जेवर ब्लॉक के करीब 1,000 विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया।
डीसी बालिका शिक्षा विनय कुमार सिंह ने बताया कि छात्राओं और छात्रों को मासिक धर्म, किशोरावस्था और व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाएगा। वहीं, अर्चना पांडेय ने बताया कि छात्राओं से सीधे फीडबैक लेकर यह भी जाना जाएगा कि स्कूल में उपलब्ध सुविधाएं उनके लिए कितनी उपयोगी हैं। इससे कमियों की पहचान कर उनमें सुधार किया जा सकेगा।
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। स्कूल में सैनिटरी पैड उपलब्ध हैं, लेकिन जरूरत के समय छात्रा उन्हें लेने में झिझक तो नहीं रही? शौचालय में पानी और साबुन की व्यवस्था है या नहीं? इस्तेमाल किए गए पैड को फेंकने के लिए सुरक्षित जगह है या नहीं? मासिक धर्म के दौरान इन छोटी-छोटी परेशानियों के कारण किसी छात्रा की पढ़ाई प्रभावित तो नहीं हो रही? अब स्कूलों में इन सवालों के जवाब भी तलाशे जाएंगे।
बेसिक शिक्षा विभाग ने मासिक धर्म स्वास्थ्य एवं प्रबंधन (एमएचएम) की व्यवस्था को सिर्फ सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने तक सीमित न रखते हुए इसकी नियमित निगरानी की तैयारी की है। चार दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का बुधवार को समापन हुआ। अंतिम दिन जेवर ब्लॉक के परिषदीय, राजकीय और निजी विद्यालयों के करीब 200 स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। चार दिनों में बिसरख, दनकौर, दादरी और जेवर ब्लॉक के करीब 1,000 विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया।
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डीसी बालिका शिक्षा विनय कुमार सिंह ने बताया कि छात्राओं और छात्रों को मासिक धर्म, किशोरावस्था और व्यक्तिगत स्वच्छता के प्रति जागरूक किया जाएगा। वहीं, अर्चना पांडेय ने बताया कि छात्राओं से सीधे फीडबैक लेकर यह भी जाना जाएगा कि स्कूल में उपलब्ध सुविधाएं उनके लिए कितनी उपयोगी हैं। इससे कमियों की पहचान कर उनमें सुधार किया जा सकेगा।
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