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Noida News: नायक फिल्म की तरह राजकीय महाविद्यालय में लगेगा लेटर बॉक्स
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सुझाव, प्रशंसा व शिकायत कर सकेंगे छात्र, लेखन क्षमता बेहतर करने और समन्वय के लिए फैसला
एआई और इंटरनेट, गूगल पर आश्रित होने से आ रही छात्रों में लेखन क्षमता की कमी
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। अब राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्र अपनी बात सीधे प्राचार्य तक पहुंचा सकेंगे, वो भी बिल्कुल नायक फिल्म की तर्ज पर। महाविद्यालय प्रशासन की ओर से परिसर में एक विशेष लेटर बॉक्स स्थापित किया जा रहा है जिसमें छात्र अपने विचार, सुझाव, समस्याएं या प्रशंसा से जुड़े पत्र डाल सकेंगे। सेक्टर-39 स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य के अनुसार इस पहल का उद्देश्य युवाओं में तेजी से लुप्त होती लिखने की कला को फिर से जीवंत करना है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया में जहां अधिकतर कार्य एक क्लिक में पूरे हो जाते हैं, वहीं इससे छात्र अब अपनी बातों को सोच-समझकर कागज पर लिखने की ओर प्रेरित होंगे। महाविद्यालय प्रशासन का मानना है कि स्मार्टफोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अत्यधिक प्रयोग से छात्रों की बौद्धिक क्षमता, अभिव्यक्ति और स्मरणशक्ति पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। इस पहल के जरिये छात्रों को पुनः लेखन की मूल शैली की ओर लौटाने की कोशिश की जा रही है।
लेटर बॉक्स के माध्यम से छात्र अपने शिक्षक या प्राचार्य को कोई भी व्यक्तिगत विचार, सुझाव, शिकायत या सकारात्मक प्रतिक्रिया सीधे कागज पर लिखकर भेज सकेंगे। हर दिन निर्धारित समय पर इन पत्रों को एकत्र कर प्राचार्य तक पहुंचाया जाएगा जिन पर विचार कर आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी। प्राचार्य ने बताया कि इस पहल से एक ओर जहां छात्रों को सोचने, लिखने और व्यक्त करने की स्वतंत्रता मिलेगी, वहीं पारंपरिक संवाद के इस माध्यम से छात्र-प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित होगा।
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90 के दशक में प्रचलित थे पत्र और डाकघर
90 के दशक में दूर संचार का सबसे प्रचलित माध्यम डाकघर था। जहां लोग अपने मन की बात को कागजों में लिखकर उन्हें डाक के माध्यम से दूसरे व्यक्ति तक अपना संदेश पहुंचाते थे। समय के साथ संचार की प्रक्रिया तेज और सरल होती गई लेकिन डाक सबसे भरोसेमंद होने के साथ साथ आज भी केंद्र सरकार द्वारा दुनियाभर में अपनी सेवाएं दे रहा है। इसी डाक की खासियत और डाक प्रक्रिया के प्रति छात्रों को जागरूक किया जाएगा।
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छात्रों की लेखन क्षमता को बेहतर करने और डाक व्यवस्था व अन्य पुरानी व्यवस्थाओं के प्रति जागरूक करने के लिए संस्थान में लेटर बॉक्स लगाया जाएगा। इन लेटर्स को समय समय पर हमारे द्वारा संज्ञान लेकर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। -डॉ राजीव कुमार गुप्ता, प्राचार्य, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नोएडा
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एआई और इंटरनेट, गूगल पर आश्रित होने से आ रही छात्रों में लेखन क्षमता की कमी
संवाद न्यूज एजेंसी
नोएडा। अब राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के छात्र अपनी बात सीधे प्राचार्य तक पहुंचा सकेंगे, वो भी बिल्कुल नायक फिल्म की तर्ज पर। महाविद्यालय प्रशासन की ओर से परिसर में एक विशेष लेटर बॉक्स स्थापित किया जा रहा है जिसमें छात्र अपने विचार, सुझाव, समस्याएं या प्रशंसा से जुड़े पत्र डाल सकेंगे। सेक्टर-39 स्थित राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य के अनुसार इस पहल का उद्देश्य युवाओं में तेजी से लुप्त होती लिखने की कला को फिर से जीवंत करना है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की दुनिया में जहां अधिकतर कार्य एक क्लिक में पूरे हो जाते हैं, वहीं इससे छात्र अब अपनी बातों को सोच-समझकर कागज पर लिखने की ओर प्रेरित होंगे। महाविद्यालय प्रशासन का मानना है कि स्मार्टफोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के अत्यधिक प्रयोग से छात्रों की बौद्धिक क्षमता, अभिव्यक्ति और स्मरणशक्ति पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। इस पहल के जरिये छात्रों को पुनः लेखन की मूल शैली की ओर लौटाने की कोशिश की जा रही है।
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लेटर बॉक्स के माध्यम से छात्र अपने शिक्षक या प्राचार्य को कोई भी व्यक्तिगत विचार, सुझाव, शिकायत या सकारात्मक प्रतिक्रिया सीधे कागज पर लिखकर भेज सकेंगे। हर दिन निर्धारित समय पर इन पत्रों को एकत्र कर प्राचार्य तक पहुंचाया जाएगा जिन पर विचार कर आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी। प्राचार्य ने बताया कि इस पहल से एक ओर जहां छात्रों को सोचने, लिखने और व्यक्त करने की स्वतंत्रता मिलेगी, वहीं पारंपरिक संवाद के इस माध्यम से छात्र-प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित होगा।
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90 के दशक में प्रचलित थे पत्र और डाकघर
90 के दशक में दूर संचार का सबसे प्रचलित माध्यम डाकघर था। जहां लोग अपने मन की बात को कागजों में लिखकर उन्हें डाक के माध्यम से दूसरे व्यक्ति तक अपना संदेश पहुंचाते थे। समय के साथ संचार की प्रक्रिया तेज और सरल होती गई लेकिन डाक सबसे भरोसेमंद होने के साथ साथ आज भी केंद्र सरकार द्वारा दुनियाभर में अपनी सेवाएं दे रहा है। इसी डाक की खासियत और डाक प्रक्रिया के प्रति छात्रों को जागरूक किया जाएगा।
छात्रों की लेखन क्षमता को बेहतर करने और डाक व्यवस्था व अन्य पुरानी व्यवस्थाओं के प्रति जागरूक करने के लिए संस्थान में लेटर बॉक्स लगाया जाएगा। इन लेटर्स को समय समय पर हमारे द्वारा संज्ञान लेकर अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। -डॉ राजीव कुमार गुप्ता, प्राचार्य, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, नोएडा