फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Noida News ›   Kalraj Mishra said new UGC rules should be abolished In Noida

UGC के नए नियमों पर रार: नोएडा में कलराज मिश्र बोले- यूजीसी के नए नियम को समाप्त किया जाए

Wed, 28 Jan 2026 10:17 PM IST
अनुज कुमार माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा
माई सिटी रिपोर्टर, नोएडा Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 28 Jan 2026 10:17 PM IST
सार

पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने नोएडा में अपने आवास पर प्रेस वार्ता में यूजीसी के नए नियम को संवैधानिक विरोधी करार दिया। उन्होंने इन नए नियमों का पुरजोर विरोध किया है। उन्होंने  कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य के लिए इसे तुरंत समाप्त किया जाए।

विज्ञापन
Kalraj Mishra said new UGC rules should be abolished In Noida
कलराज मिश्र - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यूजीसी के नए नियमों के विरोध में पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र भी खुलकर उतर गए हैं। बुधवार को उन्होंने यूजीसी के इस नियम को पूर्ण रूप से संवैधानिक विरोधी बताया। कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाना है तो यह नियम समाप्त करना होगा। इस नियम से भेदभाव बढ़ने से स्थिति और खराब हो सकती है। विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाजपा नेता और पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्र ने सेक्टर-51 स्थित आवास पर प्रेसवार्ता की। 

विज्ञापन


13 जनवरी को यूजीसी की ओर से लागू किए गए नियम पर मिश्र ने कहा, इसे जल्द समाप्त किया जाए। शिक्षण संस्थानों में सभी छात्रों को समानता का अधिकार मिले। नियम के कारण छात्रों में भेदभाव की स्थिति उत्पन्न होगी। किसी तरह के भेदभाव, अभद्र टिप्पणी का शिकार होने पर सभी वर्ग के छात्रों को शिकायत करने का अधिकार मिलना चाहिए। परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. सतीश शर्मा व उनके प्रतिनिधि मंडल ने इस मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात करके नियम को वापस लेने की अपील की।

विज्ञापन

'किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा'
देशभर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के 2026 के नए नियमों को लेकर बढ़ते असंतोष के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार प्रतिक्रिया दी थी। बीते दिन उन्होंने सभी छात्रों और शिक्षाविदों को आश्वस्त किया था कि इन नियमों को लागू करने में पूरी निष्पक्षता बरती जाएगी और किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा। मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून का कोई भी दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा।

क्या हैं यूजीसी के नए नियम
यूजीसी के नए नियम, जो 15 जनवरी 2026 से लागू हो गए हैं, का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देना है। इन नियमों का मुख्य लक्ष्य कैंपस में जातिगत भेदभाव को रोकना और सभी वर्गों के छात्रों के लिए एक समान, सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना है। 

हालांकि, इन नियमों के लागू होने के बाद से ही देशभर में इसका विरोध हो रहा है। नई दिल्ली, मेरठ, हापुड़, सहारनपुर, अलवर, मधुबनी सहित कई शहरों में छात्र, शिक्षक और सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शन कर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। कुछ समर्थकों का मानना है कि यदि नियमों को सही ढंग से लागू किया जाए तो ये समानता को मजबूत कर सकते हैं।

यूजीसी के नए नियमों के तहत, अब हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ स्थापित करना अनिवार्य होगा। इसके अतिरिक्त, संस्थान स्तर पर एक 'इक्वालिटी कमेटी' का गठन भी किया जाएगा। इस समिति में महिला, एससी, एसटी और ओबीसी और दिव्यांग छात्रों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

यह समिति छह महीने में एक रिपोर्ट तैयार कर यूजीसी को सौंपेगी। आयोग का मानना है कि इस कदम से शिकायतों की निगरानी में सुधार होगा और सभी के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी। मंत्री ने शिक्षण संस्थानों से इन नियमों को जिम्मेदारी से लागू करने का आग्रह किया है।

ये भी पढ़ें: Fatehpur: यूजीसी नियमों का पुरजोर विरोध, भाजपा नेता ने खून से लिखा पीएम को पत्र, जमकर हुई नारेबाजी

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed